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बिजाई से पहले मिट्टी की जांच कराएं, संतुलित खाद का करें प्रयोग : डॉ. बीडी यादव

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 08 Jun 2026 01:04 AM IST
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Get the soil tested before sowing, use balanced fertilizer: Dr. BD Yadav
संगोष्ठी में किसानों को जागरूक करते ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बीडी यादव।
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भिवानी। बहल खंड के गांव सिधनवा में कृषि विभाग के तत्वावधान में ग्वार फसल की पैदावार बढ़ाने को लेकर आयोजित शिविर में ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बीडी यादव ने किसानों से बिजाई से पहले मिट्टी की जांच कराने और जांच रिपोर्ट के आधार पर संतुलित खाद का प्रयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मिट्टी की जांच से यह पता चलता है कि भूमि में किस पोषक तत्व की कमी है, जिससे फसल प्रबंधन बेहतर ढंग से किया जा सकता है।

डॉ. मदन सिंह की देखरेख में आयोजित शिविर में डॉ. बीडी यादव ने किसानों को खेत की मिट्टी के नमूने लेने की सही विधि के बारे में जानकारी दी तथा उन्हें नजदीकी प्रयोगशाला में मिट्टी की जांच कराने की सलाह दी। उन्होंने किसानों को खेत में गोबर की अच्छी तरह तैयार खाद डालने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है और फसल को आवश्यक पोषण मिलता है।
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उन्होंने बताया कि ग्वार की कम पैदावार का मुख्य कारण जड़ गलन और झुलसा रोग हैं। उखेड़ा बीमारी के जीवाणु भूमि में पनपते हैं और ग्वार के उगते पौधों की जड़ों को काला कर देते हैं। इससे पौधे जमीन से नमी और पोषक तत्व लेना बंद कर देते हैं तथा मुरझाकर पीले पड़ जाते हैं और अंततः सूख जाते हैं। ऐसे पौधों की जड़ें उखाड़ने पर काली दिखाई देती हैं।
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डॉ. यादव ने बताया कि इस बीमारी की रोकथाम के लिए प्रति किलो बीज पर तीन ग्राम कार्बेन्डाजिम 50 प्रतिशत (बेविस्टीन) से सूखा बीज उपचार कर ही बिजाई करनी चाहिए। इससे 80 से 95 प्रतिशत तक रोग पर नियंत्रण पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जड़ गलन रोग का उपचार मात्र 15 रुपये के बीज उपचार से संभव है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को बीज उपचार तथा ग्वार उत्पादन बढ़ाने की नई तकनीकों के प्रति जागरूक करना है।
एटीएम डॉ. मदन सिंह ने किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने प्राकृतिक खेती अपनाने पर जोर देते हुए फसल चक्र के महत्व और उसके लाभों के बारे में भी विस्तार से बताया। डॉ. यादव ने किसानों को इस क्षेत्र के लिए ग्वार की उन्नत किस्में एचजी-365 और एचजी-563 बोने की सलाह दी।
उन्होंने बताया कि ये किस्में 85 से 100 दिन में तैयार हो जाती हैं जिससे इनके बाद सरसों की फसल आसानी से ली जा सकती है। उन्होंने प्रति एकड़ चार से पांच किलो बीज प्रयोग करने की सलाह देते हुए कहा कि ग्वार की बिजाई पोरा विधि से ही करनी चाहिए तथा छीटा मारकर बिजाई नहीं करनी चाहिए।
शिविर में उपस्थित 65 किसानों को बीज उपचार के लिए दो एकड़ की बेविस्टीन दवा तथा एक-एक जोड़ी दस्ताने निशुल्क वितरित किए गए। इस अवसर पर सूबे सिंह, जयबीर सिंह, नरेंद्र सिंह, राजेश और सुरेंद्र सहित अन्य किसान मौजूद रहे।
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