{"_id":"6a25c8a330eedcc6050b5f40","slug":"the-first-fortnight-of-june-is-most-suitable-for-sowing-guar-dr-saini-bhiwani-news-c-125-1-shsr1009-152202-2026-06-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"ग्वार की बिजाई के लिए जून का प्रथम पखवाड़ा सबसे उपयुक्त : डॉ. सैनी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ग्वार की बिजाई के लिए जून का प्रथम पखवाड़ा सबसे उपयुक्त : डॉ. सैनी
विज्ञापन
लोहारू क्षेत्र में कृषि शिविर में किसानों को संबोधित करते आरके सैनी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
लोहारू। प्रदेश के रेतीले एवं बारानी क्षेत्रों में ग्वार की अच्छी पैदावार के लिए जून का प्रथम पखवाड़ा सबसे उपयुक्त समय है। किसानों को गहरा चलेवा कर इस अवधि में ग्वार की बिजाई करनी चाहिए ताकि पौधे मानसून की बारिश से पहले अच्छी तरह स्थापित हो सकें। यह बात चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के कीट विज्ञान विभाग से सेवानिवृत्त वैज्ञानिक डॉ. आरके सैनी ने कही।
वे कृषि एवं किसान कल्याण विभाग तथा हिन्दुस्तान गम एंड कैमिकल्स, भिवानी के संयुक्त तत्वावधान में खंड लोहारू के गांव ढाणा जोगी में आयोजित कृषि शिविर में किसानों को संबोधित कर रहे थे। डॉ. सैनी ने कहा कि ग्वार प्रदेश के रेतीले एवं बारानी क्षेत्रों की प्रमुख फसल है जो कम पानी में तैयार हो जाती है। ऐसे क्षेत्रों में किसान सामान्यतः मानसून या प्री-मानसून की अच्छी बारिश के बाद इसकी बिजाई करते हैं। हालांकि जहां सिंचाई के पानी की पर्याप्त व्यवस्था है वहां जून के प्रथम पखवाड़े में ग्वार की बिजाई करने से बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
शिविर में ग्वार के अलावा बाजरा, मूंग, नरमा तथा सब्जियों के उत्पादन बढ़ाने के उपायों पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक डॉ. जगदेव सिंह ने जल संरक्षण के विभिन्न उपायों पर चर्चा की। उन्होंने किसानों को जड़ों के समुचित विकास के लिए फास्फोरस युक्त उर्वरकों के प्रयोग की सलाह दी।
विज्ञापन
कृषि विकास अधिकारी डॉ. संदीप यादव ने किसानों को सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कृषि योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने किसानों से फसल अवशेषों को जलाने के बजाय भूमि में दबाने तथा कुछ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती अपनाने का आग्रह किया। शिविर में 70 से अधिक किसानों ने भाग लिया। इस दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों द्वारा उठाई गई विभिन्न कृषि समस्याओं का समाधान भी सुझाया।
वे कृषि एवं किसान कल्याण विभाग तथा हिन्दुस्तान गम एंड कैमिकल्स, भिवानी के संयुक्त तत्वावधान में खंड लोहारू के गांव ढाणा जोगी में आयोजित कृषि शिविर में किसानों को संबोधित कर रहे थे। डॉ. सैनी ने कहा कि ग्वार प्रदेश के रेतीले एवं बारानी क्षेत्रों की प्रमुख फसल है जो कम पानी में तैयार हो जाती है। ऐसे क्षेत्रों में किसान सामान्यतः मानसून या प्री-मानसून की अच्छी बारिश के बाद इसकी बिजाई करते हैं। हालांकि जहां सिंचाई के पानी की पर्याप्त व्यवस्था है वहां जून के प्रथम पखवाड़े में ग्वार की बिजाई करने से बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
शिविर में ग्वार के अलावा बाजरा, मूंग, नरमा तथा सब्जियों के उत्पादन बढ़ाने के उपायों पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक डॉ. जगदेव सिंह ने जल संरक्षण के विभिन्न उपायों पर चर्चा की। उन्होंने किसानों को जड़ों के समुचित विकास के लिए फास्फोरस युक्त उर्वरकों के प्रयोग की सलाह दी।
Trending Videos
कृषि विकास अधिकारी डॉ. संदीप यादव ने किसानों को सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कृषि योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने किसानों से फसल अवशेषों को जलाने के बजाय भूमि में दबाने तथा कुछ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती अपनाने का आग्रह किया। शिविर में 70 से अधिक किसानों ने भाग लिया। इस दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों द्वारा उठाई गई विभिन्न कृषि समस्याओं का समाधान भी सुझाया।