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Bhiwani News: कागजों में बस गए घर, 15 साल बाद भी लोग बेघर
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भिवानी। गांव धनाना के करीब 110 अनुसूचित जाति परिवारों को वर्ष 2011 में महात्मा गांधी ग्रामीण बस्ती योजना के तहत 100-100 वर्ग गज के प्लॉट अलॉट किए गए थे लेकिन रजिस्ट्री और इंतकाल होने के बावजूद उन्हें आज तक प्लॉटों का कब्जा नहीं मिल पाया है। पात्र परिवारों का आरोप है कि 15 साल बीत जाने के बाद भी उनके हाथ सिर्फ कागजात आए हैं, जमीन का कब्जा नहीं। पीड़ित परिवार जिला उपायुक्त से लेकर सीएम विंडो तक शिकायत कर चुके हैं लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हो सका है।
ग्रामीणों के अनुसार तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान वर्ष 2011 में गांव धनाना के अनुसूचित जाति परिवारों को 100-100 वर्ग गज के प्लॉट आवंटित किए गए थे। इन प्लॉटों की रजिस्ट्री, इंतकाल और अन्य सभी आवश्यक कानूनी दस्तावेज संबंधित पात्र ग्रामीणों के पास सुरक्षित हैं। इसके बावजूद उन्हें न तो जमीन का मालिकाना हक व्यवहारिक रूप से मिल पाया है और न ही कब्जा दिया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिन जमीनों पर उन्हें प्लॉट अलॉट किए गए थे वह भूमि गांव धनाना तृतीय की है जबकि वे गांव धनाना प्रथम के निवासी हैं। उनका आरोप है कि वर्ष 2012 में उसी स्थान पर गांव धनाना तृतीय के लिए जलघर का निर्माण कर दिया गया। ऐसे में यदि संबंधित स्थान पर कब्जा दिलाने में कोई प्रशासनिक अड़चन है तो उन्हें किसी अन्य उपयुक्त पंचायती भूमि पर वर्ष 2011 के नियमों के अनुसार प्लॉट काटकर तत्काल कब्जा दिया जाना चाहिए ताकि उनकी समस्या का समाधान हो सके।
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निवासी धनाना प्रथम के, प्लॉट मिले धनाना तृतीय में
गांव धनाना के जिन अनुसूचित जाति परिवारों को सरकार द्वारा प्लॉट अलॉट किए गए हैं वे प्लॉट गांव धनाना की ग्राम पंचायत तृतीय की भूमि में स्थित हैं जबकि संबंधित परिवार गांव धनाना प्रथम के निवासी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि धनाना प्रथम में चार से पांच एकड़ पंचायती भूमि खाली पड़ी है। ऐसे में उनका मानना है कि संबंधित लोगों को उनकी अपनी पंचायत की भूमि में ही प्लॉट मिलने चाहिए न कि किसी दूसरी पंचायत की भूमि में।
हमारे पास वर्ष 2011 से अलॉटेड प्लॉटों की पक्की रजिस्ट्री और इंतकाल हैं। इसके बावजूद हमारी जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है। वहां अवैध तरीके से जलघर और अन्य अवैध ढांचे खड़े कर दिए गए हैं जो पूरी तरह गैर-कानूनी हैं। जब सरकार और प्रशासन ने हमें ये प्लॉट दिए थे तो हमें अपनी ही जमीन के लिए दर-दर की ठोकरें खाने पर क्यों मजबूर किया जा रहा है। इसलिए हमारी मांग है कि हमें जल्द से जल्द प्लॉट दिलाए जाए। -ऋतु धनाना, पंच।
हमें अलॉट हुए प्लॉटों पर यदि कब्जा दिलाने में कोई प्रशासनिक अड़चन है तो हमें किसी अन्य उपयुक्त पंचायती जमीन पर वर्ष 2011 के नियमों के अनुसार ही प्लॉट काटकर तुरंत कब्जा दिया जाए जिससे हमें हमारा हक मिल सके। यह हमारे हकों की लड़ाई है और जब तक हमें न्याय नहीं मिलता, हमारा यह संघर्ष और तेज होगा। -सादिक, ग्रामीण।
हमें अलॉट हुए सभी 100-100 वर्ग गज के प्लॉटों से अवैध कब्जे हटाए जाए। कानूनी दस्तावेजों (रजिस्ट्री व इंतकाल) के आधार पर वास्तविक पात्र ग्रामीणों को उनके प्लॉटों का भौतिक कब्जा तुरंत प्रभाव से दिलाया जाए। यदि मौजूदा विवादित भूमि पर कब्जा दिलाना संभव न हो तो गांव की ही किसी अन्य उपयुक्त पंचायती भूमि पर सभी पीड़ितों को समान आकार के प्लॉट अलॉट कर कब्जा सुनिश्चित किया जाए। -बाली, ग्रामीण।
गांव धनाना के अनुसूचित जाति परिवारों को अलॉट किए गए प्लॉटों का मामला मेरे संज्ञान में आया है। इस बारे में जिला उपायुक्त से बैठक कर पात्र लोगों को उनकी पंचायत में ही खाली पड़ी पंचायती भूमि पर प्लॉट दिए जाएंगे। इस बारे में जल्द ही प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी। किसी को कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी। -नवीन मलिक, बीडीपीओ, भिवानी।
ग्रामीणों के अनुसार तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान वर्ष 2011 में गांव धनाना के अनुसूचित जाति परिवारों को 100-100 वर्ग गज के प्लॉट आवंटित किए गए थे। इन प्लॉटों की रजिस्ट्री, इंतकाल और अन्य सभी आवश्यक कानूनी दस्तावेज संबंधित पात्र ग्रामीणों के पास सुरक्षित हैं। इसके बावजूद उन्हें न तो जमीन का मालिकाना हक व्यवहारिक रूप से मिल पाया है और न ही कब्जा दिया गया है।
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ग्रामीणों का कहना है कि जिन जमीनों पर उन्हें प्लॉट अलॉट किए गए थे वह भूमि गांव धनाना तृतीय की है जबकि वे गांव धनाना प्रथम के निवासी हैं। उनका आरोप है कि वर्ष 2012 में उसी स्थान पर गांव धनाना तृतीय के लिए जलघर का निर्माण कर दिया गया। ऐसे में यदि संबंधित स्थान पर कब्जा दिलाने में कोई प्रशासनिक अड़चन है तो उन्हें किसी अन्य उपयुक्त पंचायती भूमि पर वर्ष 2011 के नियमों के अनुसार प्लॉट काटकर तत्काल कब्जा दिया जाना चाहिए ताकि उनकी समस्या का समाधान हो सके।
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निवासी धनाना प्रथम के, प्लॉट मिले धनाना तृतीय में
गांव धनाना के जिन अनुसूचित जाति परिवारों को सरकार द्वारा प्लॉट अलॉट किए गए हैं वे प्लॉट गांव धनाना की ग्राम पंचायत तृतीय की भूमि में स्थित हैं जबकि संबंधित परिवार गांव धनाना प्रथम के निवासी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि धनाना प्रथम में चार से पांच एकड़ पंचायती भूमि खाली पड़ी है। ऐसे में उनका मानना है कि संबंधित लोगों को उनकी अपनी पंचायत की भूमि में ही प्लॉट मिलने चाहिए न कि किसी दूसरी पंचायत की भूमि में।
हमारे पास वर्ष 2011 से अलॉटेड प्लॉटों की पक्की रजिस्ट्री और इंतकाल हैं। इसके बावजूद हमारी जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है। वहां अवैध तरीके से जलघर और अन्य अवैध ढांचे खड़े कर दिए गए हैं जो पूरी तरह गैर-कानूनी हैं। जब सरकार और प्रशासन ने हमें ये प्लॉट दिए थे तो हमें अपनी ही जमीन के लिए दर-दर की ठोकरें खाने पर क्यों मजबूर किया जा रहा है। इसलिए हमारी मांग है कि हमें जल्द से जल्द प्लॉट दिलाए जाए। -ऋतु धनाना, पंच।
हमें अलॉट हुए प्लॉटों पर यदि कब्जा दिलाने में कोई प्रशासनिक अड़चन है तो हमें किसी अन्य उपयुक्त पंचायती जमीन पर वर्ष 2011 के नियमों के अनुसार ही प्लॉट काटकर तुरंत कब्जा दिया जाए जिससे हमें हमारा हक मिल सके। यह हमारे हकों की लड़ाई है और जब तक हमें न्याय नहीं मिलता, हमारा यह संघर्ष और तेज होगा। -सादिक, ग्रामीण।
हमें अलॉट हुए सभी 100-100 वर्ग गज के प्लॉटों से अवैध कब्जे हटाए जाए। कानूनी दस्तावेजों (रजिस्ट्री व इंतकाल) के आधार पर वास्तविक पात्र ग्रामीणों को उनके प्लॉटों का भौतिक कब्जा तुरंत प्रभाव से दिलाया जाए। यदि मौजूदा विवादित भूमि पर कब्जा दिलाना संभव न हो तो गांव की ही किसी अन्य उपयुक्त पंचायती भूमि पर सभी पीड़ितों को समान आकार के प्लॉट अलॉट कर कब्जा सुनिश्चित किया जाए। -बाली, ग्रामीण।
गांव धनाना के अनुसूचित जाति परिवारों को अलॉट किए गए प्लॉटों का मामला मेरे संज्ञान में आया है। इस बारे में जिला उपायुक्त से बैठक कर पात्र लोगों को उनकी पंचायत में ही खाली पड़ी पंचायती भूमि पर प्लॉट दिए जाएंगे। इस बारे में जल्द ही प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी। किसी को कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी। -नवीन मलिक, बीडीपीओ, भिवानी।