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Bhiwani: हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने लिया समुराखेड़ा के गंदे तालाब मामले में संज्ञान, रिपोर्ट पेश करने के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा)
Published by: नवीन दलाल
Updated Mon, 09 Feb 2026 04:12 PM IST
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सार
मानवाधिकार आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त उपायुक्त नोडल प्राधिकारी होने के नाते तत्काल सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने और जांच कर जिम्मेदारी तय कर समेकित कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं।
गंदे पानी का तालाब
- फोटो : संवाद
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विस्तार
बवानीखेड़ा क्षेत्र के गांव समुरा खेड़ा के गंदे तालाब से हो रहे पर्यावरण प्रदूषण व ग्रामीणों के जीवन और स्वास्थ्य पर मंडरा रहे खतरे को देखते हुए हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने कड़ा संज्ञान लिया है। उपायुक्त, अतिरिक्त उपायुक्त, डीडीपीओ व बीडीपीओ से आयोग ने कार्रवाई रिपोर्ट भी तलब की है। आयोग को भेजी शिकायत में यह आरोप है कि सुमरा खेड़ा में गंदा और ठहरा हुआ है।
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पानी का तालाब है, जो पर्यावरण प्रदूषण का गंभीर स्रोत बन गया है और निवासियों के जीवन और स्वास्थ्य के लिए लगातार खतरा है।तालाब के चारों ओर किसी भी प्रकार की चाहरदीवारी, बाड़ या सुरक्षा नहीं है। इसमें डूबने से तीन नाबालिग बच्चों की मौत हो चुकी है। यह भी आरोप है कि गंदे रुके हुए पानी से उत्पन्न प्रदूषित और अस्वच्छ स्थितियों के कारण ग्रामीणों में बीमारियां फैल रही हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
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सुरक्षित वातावरण में रहने के उनके अधिकार का उल्लंघन हो रहा है। यह भी आरोप है कि ग्राम पंचायत, ग्राम सुमरा खेड़ा और उसके बाद ब्लॉक विकास एवं पंचायत अधिकारी (बीडीपीओ), जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (डीडीपीओ) और अतिरिक्त उपायुक्त भिवानी को बार-बार शिकायतें करने के बावजूद कोई प्रभावी सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई है।
मानवाधिकार आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त उपायुक्त नोडल प्राधिकारी होने के नाते तत्काल सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने और जांच कर जिम्मेदारी तय कर समेकित कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। वहीं ग्राम पंचायत समुराखेउ़ा को सार्वजनिक भूमि का रखरखाव, सुरक्षा व स्वच्छता को लेकर प्राथमिकता से काम करने के निर्देश दिए हैं।
इसी तरह इस मामले में बीडीपीओ बवानीखेड़ा पर्यवेक्षी प्राधिकारी होने के नाते निगरानी करने, उपचारात्क उपाय कर प्रगति रिपोर्ट प्रसतुत करने के आदेश दिए हैं। वहीं जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (डीडीपीओ) को पंचायती राज कानूनों के तहत पंचायत पदाधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने और अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर रिपोर्ट आयोग के समक्ष देने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई से पहले एक सप्ताह पहले आयोग के समक्ष संबंधित को अपनी-अपनी कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। अगली सुनवाई 02 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।