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HBSE 10th Result: क्लर्क की बेटी ने पाया प्रदेशभर में पहला स्थान, इंजीनियर बनना सपना; मोबाइल से बनाई दूरी

संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा) Published by: Naveen Updated Thu, 14 May 2026 03:24 PM IST
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सार

दीपिका के पिता राजकुमार का कहना है कि वह बतौर इसी विद्यालय में क्लर्क हैं। हर रोज सुबह स्कूल बस खुद चलाकर चारों बेटियों के अलावा अन्य बच्चों को भी विद्यालय लाता हूं। इसके बाद अपना काम करता हूं। बेटी शुरूआत से ही पढ़ाई में होशियार रही है।

HBSE 10th Result: Clerk's Daughter Secures First Rank Across the State; Dreams of Becoming an Engineer
गांव खेड़ा निवासी दीपिका - फोटो : संवाद
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विस्तार

जिले के सिवानी खंड के गांव खेड़ा निवासी दीपिका ने 499 अंकों के साथ दसवीं में पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। दीपिका के पिता राजकुमार उसी विद्यालय में बतौर क्लर्क नौकरी कर रहे हैं, जबकि दीपिका की बड़ी बहन ने भी 97 फीसदी अंकों के साथ दसवीं में सफलता पाई है। दरअसल तोशाम क्षेत्र के गांव मिरान स्थित आदर्श सीनियर सेकेंडरी स्कूल में दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली दीपिका चार बहनों में दूसरे नंबर पर है। दीपिका की बड़ी बहन रीतिका ने भी उसी के साथ दसवीं की परीक्षा दी थी। इसी विद्यालय में दीपिका की दो और छोटी बहनें नीतिका नौंवी और चित्रा तीसरी कक्षा में पढ़ाई कर रही हैं।

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दीपिका के पिता राजकुमार का कहना है कि वह बतौर इसी विद्यालय में क्लर्क हैं। हर रोज सुबह स्कूल बस खुद चलाकर चारों बेटियों के अलावा अन्य बच्चों को भी विद्यालय लाता हूं। इसके बाद अपना काम करता हूं। बेटी शुरूआत से ही पढ़ाई में होशियार रही है। स्कूल और घर दोनों ही जगह उसने पढ़ाई पर फोक्स रखा है, जबकि मोबाइल फोन और सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी है। पढ़ाई के दौरान उसने कोई ट्यूशन या एक्सट्रा क्लास भी नहीं ली। विषय की कठिनाईयों को अध्यापकों के साथ बेहतर तालमेल बैठाकर सुलझाया। स्कूल से घर आने के बाद मां का भी घरेलू कार्याें में हाथ बंटाती है। 
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टिप्स
-कड़ी मेहनत करने वालों को निश्चित रूप से सफलता मिलती है।
- अनुशासन में रहकर पढ़ाई के प्रति पूरी तरह समर्पित 
- जितना हो सके मोबाइल फोन से दूरी बनाए रखें और किताबों को दोस्त समझें
-योजना बनाकर रोजाना पांच से छह घंटे नियमित पढ़ाई करें
- जीवन में अनुशासन बनाए रखना आवश्यक है।

लक्ष्य : इंजीनियर बनकर परिवार का नाम रोशन करना
मेरी सफलता का श्रेय मेरे परिवार को जाता है। गुरुजनों ने भी मुझे अच्छे से पढ़ाया और हर विषय की बारीकियों को समझाया, जिसकी बदौलत मुझे ये सफलता मिली है। मैं आगे चलकर इंजीनियर बनना चाहती हूं। इंजीनियर के रूप में मैं अपने माता पिता का नाम रोशन करना चाहती हूं। इसके लिए मैं अभी से तैयारी कर रही हूं। 

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