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Bhiwani News: ग्वार में बढ़ा हरा तेला और अंगमारी का प्रकोप

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 14 Aug 2026 05:00 PM IST
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Increased incidence of jassids and blight in cluster bean (guar)
भिवानी। पिछले कुछ दिनों से मौसम में नमी बढ़ने के कारण ग्वार की फसल में हरा तेला और जीवाणु अंगमारी रोग (फंगस) का प्रकोप बढ़ गया है। इस बार ग्वार की फसल अच्छी दिखाई दे रही है, ऐसे में किसानों को कीट और बीमारी की सही पहचान के बाद ही आवश्यकतानुसार दवा का चयन कर छिड़काव करना चाहिए।
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जानकारी के अभाव में दवाओं का प्रयोग करने से फसल को नुकसान हो सकता है। यह बात सेवानिवृत्त ग्वार वैज्ञानिक डॉ. बीडी यादव ने कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के साथ गांव गोकलपुरा में आयोजित किसान गोष्ठी में कही। गोष्ठी का उद्देश्य किसानों को ग्वार की प्रमुख बीमारियों के लक्षण, उनकी पहचान और रोकथाम की जानकारी देना था।
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कार्यक्रम में खंड कृषि अधिकारी डॉ. अनिल कुमार मुख्य अतिथि रहे। डॉ. बीडी यादव ने कहा कि ग्वार में कीट और फंगस से होने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए कृषि वैज्ञानिकों और कृषि अधिकारियों की सलाह के अनुसार ही दवा खरीदनी और उसका प्रयोग करना चाहिए। डॉ. यादव ने बताया कि जीवाणु अंगमारी रोग की शुरुआत में पत्तियों की किनारियां पीली पड़ने लगती हैं।
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इसके बाद धीरे-धीरे किनारियां काली हो जाती हैं। अधिक बारिश और वातावरण में नमी बढ़ने पर पत्तियों का बड़ा हिस्सा काला पड़ जाता है। इस बार ग्वार की फसल में इस तरह के लक्षण देखने को मिल रहे हैं। यह बीमारी पैदावार घटाने में काफी नुकसानदायक है, इसलिए समय रहते इसकी रोकथाम जरूरी है।

यह है दवा की मात्रा और छिड़काव का तरीका

जीवाणु अंगमारी रोग की रोकथाम के लिए 30 ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन और 400 ग्राम कॉपर ऑक्सीक्लोराइड को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करने की सलाह दी गई। यदि बीमारी के साथ हरा तेला और सफेद कीड़ों का प्रकोप भी हो तो 200 मिलीलीटर मैलाथियान-50 ईसी या डाइमेथोएट (रोगोर)-30 ईसी प्रति एकड़ उपरोक्त घोल में मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है। पहला छिड़काव बिजाई के 40-45 दिन बाद और अगला छिड़काव 12-15 दिन के अंतराल पर करने की जानकारी दी गई।
किसानों को दवाओं की मात्रा और सही घोल तैयार करने की विधि भी बताई गई। इस अवसर पर किसान मंजीत, फूलसिंह, सुनील, विकास, राकेश, बलवान, रणवीर सिंह और सुरेश मौजूद रहे।


दवा खरीदते समय पक्का बिल लें किसान
ग्वार फसल प्रशिक्षण के दौरान डॉ. मदन सिंह ने किसानों से दवा खरीदते समय विक्रेता से पक्का बिल लेने और बिल पर बैच नंबर दर्ज करवाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि दवा खरीदने से पहले बोतल पर उसकी समाप्ति तिथि भी जरूर जांच लें। खंड कृषि अधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने किसानों को ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ और फसल बीमा योजना की जानकारी दी। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने का भी आग्रह किया।
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