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Bhiwani News: एक चिकित्सक के सहारे चल रहा कैरू सीएचसी, मरीजों को झेलनी पड़ रही परेशानी
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गांव कैरू स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र। संवाद
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कैरू। क्षेत्र का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) इस समय एक चिकित्सक के सहारे संचालित हो रहा है जिससे क्षेत्र के लोगों को पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं। 30 बेड के इस अस्पताल में ओपीडी लगातार बढ़ रही है लेकिन चिकित्सकों और संसाधनों की कमी के कारण मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा क्षेत्र के लिए घोषणाएं किए जाने के बावजूद कैरू क्षेत्र की इस मूलभूत जरूरत पर ध्यान नहीं दिया गया।
कैरू खंड के कई गांवों की स्वास्थ्य सेवाएं पिछले चार-पांच वर्षों से प्रभावित हैं। चिकित्सकों की भारी कमी के कारण लोगों को करीब 40 किलोमीटर दूर जिला सामान्य अस्पताल, हिसार या भिवानी के अस्पतालों में महंगा इलाज करवाना पड़ता है जो उनके लिए कठिन साबित हो रहा है।
अस्पताल की वर्तमान स्थिति यह है कि एक मेडिकल ऑफिसर (एमओ) के सहारे ही इलाज चल रहा है। सीनियर मेडिकल ऑफिसर का एक पद और सात मेडिकल ऑफिसर के पद रिक्त हैं। एक एमओ बिना वेतन के अवकाश पर हैं। फिजीशियन और रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने से मरीजों को और अधिक दिक्कतें हो रही हैं। मौसमी बीमारियों के बढ़ते प्रकोप के चलते बुखार, खांसी, जुकाम, सिरदर्द और बदन दर्द के मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। कैरू और आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों मरीज अस्पताल पहुंचते हैं लेकिन सीमित संसाधनों के कारण समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा।
नेत्र एवं दंत चिकित्सक के पद लंबे समय से रिक्त
अस्पताल में आपात सेवाएं और ओपीडी दोनों की जिम्मेदारी एक ही चिकित्सक के कंधों पर है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। नेत्र एवं दंत चिकित्सक के पद लंबे समय से रिक्त हैं। यदि विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या बढ़ाई जाए तो क्षेत्रवासियों को राहत मिल सकती है।
रात को नहीं होती एमएलआर, भिवानी या तोशाम जाना पड़ता है
रात्रि के समय यदि कोई दुर्घटना या झगड़े में घायल मरीज अस्पताल पहुंचता है तो उसे प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर दिया जाता है। रात में चिकित्सक उपलब्ध न होने से एमएलआर नहीं हो पाती और मरीजों को भिवानी या तोशाम जाना पड़ता है। अस्पताल में केवल हल्की चोट वाले मरीजों को ही रखा जाता है।
अल्ट्रासाउंड की सुविधा भी नहीं
सीएचसी में अल्ट्रासाउंड मशीन की सुविधा नहीं है जिसके कारण मरीजों को निजी केंद्रों पर महंगी जांच करानी पड़ती है। इससे खासकर महिलाओं पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। अल्ट्रासाउंड जांच के लिए करीब 800 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं।
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कैरू क्षेत्र वासियों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का प्रभावित होना बड़ी समस्या बन गया है। चिकित्सकों के रिक्त पदों के कारण मरीजों और तीमारदारों को दूर-दराज इलाज के लिए भागदौड़ करनी पड़ती है। -मनोज तंवर, ग्रामीण
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क्षेत्र में कैरू ही बड़ा अस्पताल है लेकिन यहां न नेत्र चिकित्सक हैं और न ही दंत चिकित्सक। सामान्य चिकित्सकों की कमी के कारण जांच और उपचार प्रभावित हो रहा है। यदि चिकित्सक उपलब्ध हों तो लोगों को भटकना नहीं पड़ेगा। -सुरेंद्र खारियाबास, ग्रामीण
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अस्पताल में उपलब्ध स्टाफ पूरी मेहनत से सेवाएं दे रहा है। शासन व प्रशासन के निर्देशानुसार ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती होगी। चिकित्सकों की संख्या बढ़ने पर लोगों को बेहतर उपचार मिल सकेगा। -डाॅ. राहुल, मेडिकल ऑफिसर, कैरू सीएचसी।
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कैरू खंड के कई गांवों की स्वास्थ्य सेवाएं पिछले चार-पांच वर्षों से प्रभावित हैं। चिकित्सकों की भारी कमी के कारण लोगों को करीब 40 किलोमीटर दूर जिला सामान्य अस्पताल, हिसार या भिवानी के अस्पतालों में महंगा इलाज करवाना पड़ता है जो उनके लिए कठिन साबित हो रहा है।
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अस्पताल की वर्तमान स्थिति यह है कि एक मेडिकल ऑफिसर (एमओ) के सहारे ही इलाज चल रहा है। सीनियर मेडिकल ऑफिसर का एक पद और सात मेडिकल ऑफिसर के पद रिक्त हैं। एक एमओ बिना वेतन के अवकाश पर हैं। फिजीशियन और रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने से मरीजों को और अधिक दिक्कतें हो रही हैं। मौसमी बीमारियों के बढ़ते प्रकोप के चलते बुखार, खांसी, जुकाम, सिरदर्द और बदन दर्द के मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। कैरू और आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों मरीज अस्पताल पहुंचते हैं लेकिन सीमित संसाधनों के कारण समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा।
नेत्र एवं दंत चिकित्सक के पद लंबे समय से रिक्त
अस्पताल में आपात सेवाएं और ओपीडी दोनों की जिम्मेदारी एक ही चिकित्सक के कंधों पर है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। नेत्र एवं दंत चिकित्सक के पद लंबे समय से रिक्त हैं। यदि विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या बढ़ाई जाए तो क्षेत्रवासियों को राहत मिल सकती है।
रात को नहीं होती एमएलआर, भिवानी या तोशाम जाना पड़ता है
रात्रि के समय यदि कोई दुर्घटना या झगड़े में घायल मरीज अस्पताल पहुंचता है तो उसे प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर दिया जाता है। रात में चिकित्सक उपलब्ध न होने से एमएलआर नहीं हो पाती और मरीजों को भिवानी या तोशाम जाना पड़ता है। अस्पताल में केवल हल्की चोट वाले मरीजों को ही रखा जाता है।
अल्ट्रासाउंड की सुविधा भी नहीं
सीएचसी में अल्ट्रासाउंड मशीन की सुविधा नहीं है जिसके कारण मरीजों को निजी केंद्रों पर महंगी जांच करानी पड़ती है। इससे खासकर महिलाओं पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। अल्ट्रासाउंड जांच के लिए करीब 800 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं।
कैरू क्षेत्र वासियों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का प्रभावित होना बड़ी समस्या बन गया है। चिकित्सकों के रिक्त पदों के कारण मरीजों और तीमारदारों को दूर-दराज इलाज के लिए भागदौड़ करनी पड़ती है। -मनोज तंवर, ग्रामीण
क्षेत्र में कैरू ही बड़ा अस्पताल है लेकिन यहां न नेत्र चिकित्सक हैं और न ही दंत चिकित्सक। सामान्य चिकित्सकों की कमी के कारण जांच और उपचार प्रभावित हो रहा है। यदि चिकित्सक उपलब्ध हों तो लोगों को भटकना नहीं पड़ेगा। -सुरेंद्र खारियाबास, ग्रामीण
अस्पताल में उपलब्ध स्टाफ पूरी मेहनत से सेवाएं दे रहा है। शासन व प्रशासन के निर्देशानुसार ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती होगी। चिकित्सकों की संख्या बढ़ने पर लोगों को बेहतर उपचार मिल सकेगा। -डाॅ. राहुल, मेडिकल ऑफिसर, कैरू सीएचसी।