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Bhiwani News: मेडिकल कॉलेज में पेट के डॉक्टर नहीं, रोज 100 से 120 मरीज परेशान
Thu, 13 Aug 2026 01:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Thu, 13 Aug 2026 01:16 AM IST
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भिवानी। पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में पेट के डॉक्टर की तैनाती नहीं होने से रोजाना पेट से जुड़ी बीमारियों के इलाज और जांच के लिए पहुंचने वाले 100 से 120 मरीज परेशान हैं। विशेषज्ञ की कमी के कारण इन मरीजों की ओपीडी सामान्य चिकित्सकों को संभालनी पड़ रही है। गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद रोहतक पीजीआई या निजी सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में रेफर करना पड़ रहा है।
अस्पताल के आंकड़ों और दैनिक ओपीडी रिपोर्ट के अनुसार रोजाना करीब 100 से 120 मरीज पेट से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और बीमारियों के इलाज व जांच के लिए पहुंचते हैं। विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने के कारण सामान्य चिकित्सक ही इन मरीजों का प्राथमिक उपचार करते हैं। पेट में मामूली संक्रमण, गुर्दे या पित्त की पथरी और लीवर में शुरुआती सूजन जैसी सामान्य समस्याओं का इलाज सामान्य चिकित्सक अपने स्तर पर कर देते हैं। वहीं गंभीर पेट की बीमारियों के मामलों में उन्हें भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
गंभीर बीमारियों की जांच के लिए सुविधाएं सीमित
गंभीर पेट रोगों के सही निदान के लिए अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा है लेकिन एंडोस्कोपी, कोलोनोस्कोपी और उन्नत पैथोलॉजी जांच की सुविधा फिलहाल उपलब्ध नहीं है। ऐसे में आंतरिक रक्तस्राव, क्रॉनिक लीवर डिजीज और पेट के ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर करना पड़ता है।
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दूसरे शहरों में इलाज से बढ़ रहा आर्थिक बोझ
सरकारी अस्पताल में विशेषज्ञ सुविधा नहीं मिलने से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर इसका असर पड़ रहा है। दूसरे शहरों में रेफर होने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को आने-जाने और रहने का खर्च उठाना पड़ता है। वहीं निजी अस्पतालों में महंगे इलाज का खर्च भी उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन रहा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रघुबीर शांडिल्य ने कहा कि ओपीडी और विभाग में सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की मांग भेज रखी है। जल्द ही मरीजों को सभी सुविधाएं मिलनी शुरू हो जाएंगी।
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अस्पताल के आंकड़ों और दैनिक ओपीडी रिपोर्ट के अनुसार रोजाना करीब 100 से 120 मरीज पेट से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और बीमारियों के इलाज व जांच के लिए पहुंचते हैं। विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने के कारण सामान्य चिकित्सक ही इन मरीजों का प्राथमिक उपचार करते हैं। पेट में मामूली संक्रमण, गुर्दे या पित्त की पथरी और लीवर में शुरुआती सूजन जैसी सामान्य समस्याओं का इलाज सामान्य चिकित्सक अपने स्तर पर कर देते हैं। वहीं गंभीर पेट की बीमारियों के मामलों में उन्हें भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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गंभीर बीमारियों की जांच के लिए सुविधाएं सीमित
गंभीर पेट रोगों के सही निदान के लिए अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा है लेकिन एंडोस्कोपी, कोलोनोस्कोपी और उन्नत पैथोलॉजी जांच की सुविधा फिलहाल उपलब्ध नहीं है। ऐसे में आंतरिक रक्तस्राव, क्रॉनिक लीवर डिजीज और पेट के ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर करना पड़ता है।
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दूसरे शहरों में इलाज से बढ़ रहा आर्थिक बोझ
सरकारी अस्पताल में विशेषज्ञ सुविधा नहीं मिलने से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर इसका असर पड़ रहा है। दूसरे शहरों में रेफर होने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को आने-जाने और रहने का खर्च उठाना पड़ता है। वहीं निजी अस्पतालों में महंगे इलाज का खर्च भी उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन रहा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रघुबीर शांडिल्य ने कहा कि ओपीडी और विभाग में सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की मांग भेज रखी है। जल्द ही मरीजों को सभी सुविधाएं मिलनी शुरू हो जाएंगी।