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Bhiwani News: लिंगानुपात सुधारने के लिए खंगाला जा रहा अल्ट्रासाउंड केंद्रों का रिकॉर्ड
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शहर में निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र का निरीक्षण करती स्वास्थ्य विभाग की टीम।
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भिवानी। जिले में लिंगानुपात सुधारने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अल्ट्रासाउंड और पीएनडीटी केंद्रों के रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है। डीसी साहिल गुप्ता के निर्देशानुसार सिविल सर्जन डॉ. रघुवीर शांडिल्य के मार्गदर्शन में गठित विशेष टीमें जिलेभर में अल्ट्रासाउंड केंद्रों और पीएनडीटी केंद्रों का निरीक्षण कर रिकॉर्ड खंगाल रही हैं।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर संबंधित केंद्र का लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है।सोमवार को पीसीपीएनडीटी टीम के नोडल ऑफिसर डॉ. अन्नू चौधरी, डॉ. दीपक और हेल्थ इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद ने शहर के दो अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच की। इनमें देशवाल अल्ट्रासाउंड केंद्र और जेबी गुप्ता नर्सिंग होम स्थित अल्ट्रासाउंड केंद्र शामिल रहे। जांच के दौरान दोनों केंद्रों का संबंधित रिकॉर्ड सही पाया गया।
टीम सदस्यों ने बताया कि जांच के दौरान गर्भवती महिलाओं के रिकॉर्ड की विशेष रूप से जांच की जा रही है। सभी अल्ट्रासाउंड केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि गर्भवती महिला का पूरा विवरण, नाम, पता, आधार कार्ड नंबर, फोन नंबर और आरसीएच आईडी अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाए।स्वास्थ्य विभाग की विशेष नजर उन दंपतियों पर है जिनकी पहली या दूसरी संतान लड़की है। विभाग ने निर्देश दिए हैं कि महिला के पूर्व में कितने बच्चे हैं इसका स्पष्ट उल्लेख रिकॉर्ड में किया जाए। यदि महिला की पहली संतान लड़की है तो उस केस पर विशेष निगरानी रखते हुए पीएनडीटी नियमों की कड़ाई से पालना सुनिश्चित की जाए।
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जिले के सभी अधिकृत एमटीपी केंद्रों को भी निर्देश दिए गए हैं कि 10 से 20 सप्ताह तक की गई एमटीपी के रिकॉर्ड में गर्भ के लिंग का उल्लेख अनिवार्य रूप से किया जाए। संबंधित केंद्रों को समस्त रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से मेंटेन रखने और महिला की आरसीएच आईडी दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
सिविल सर्जन डॉ. रघुवीर शांडिल्य ने बताया कि जिले में कम लिंगानुपात वाले सीएचसी धनाना, सीएचसी जमालपुर और सीएचसी कैरू के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी एवं इंचार्ज को शोकॉज नोटिस जारी किए गए हैं। उनसे कम लिंगानुपात के कारण और इसमें सुधार के लिए अगले दो महीने का रोडमैप मांगा गया है। उन्होंने बताया कि जिले की सभी सीएचसी और पीएचसी प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में लिंगानुपात सुधारने के लिए जागरूकता अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश घर-घर तक पहुंच सके और जिले के लिंगानुपात में सुधार हो।
सिविल सर्जन डॉ. रघुवीर शांडिल्य ने कहा कि जांच अभियान के दौरान किसी भी केंद्र पर किसी भी स्तर पर अनियमितता मिलने पर संबंधित केंद्र का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। पीएनडीटी नियमों की पालना में किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि टीम द्वारा जिले के सभी केंद्रों का निरीक्षण कर रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। अल्ट्रासाउंड और एमटीपी केंद्रों की जांच का उद्देश्य केवल निरीक्षण करना नहीं बल्कि जिले के लिंगानुपात में स्थायी सुधार लाना है।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर संबंधित केंद्र का लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है।सोमवार को पीसीपीएनडीटी टीम के नोडल ऑफिसर डॉ. अन्नू चौधरी, डॉ. दीपक और हेल्थ इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद ने शहर के दो अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच की। इनमें देशवाल अल्ट्रासाउंड केंद्र और जेबी गुप्ता नर्सिंग होम स्थित अल्ट्रासाउंड केंद्र शामिल रहे। जांच के दौरान दोनों केंद्रों का संबंधित रिकॉर्ड सही पाया गया।
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टीम सदस्यों ने बताया कि जांच के दौरान गर्भवती महिलाओं के रिकॉर्ड की विशेष रूप से जांच की जा रही है। सभी अल्ट्रासाउंड केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि गर्भवती महिला का पूरा विवरण, नाम, पता, आधार कार्ड नंबर, फोन नंबर और आरसीएच आईडी अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाए।स्वास्थ्य विभाग की विशेष नजर उन दंपतियों पर है जिनकी पहली या दूसरी संतान लड़की है। विभाग ने निर्देश दिए हैं कि महिला के पूर्व में कितने बच्चे हैं इसका स्पष्ट उल्लेख रिकॉर्ड में किया जाए। यदि महिला की पहली संतान लड़की है तो उस केस पर विशेष निगरानी रखते हुए पीएनडीटी नियमों की कड़ाई से पालना सुनिश्चित की जाए।
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जिले के सभी अधिकृत एमटीपी केंद्रों को भी निर्देश दिए गए हैं कि 10 से 20 सप्ताह तक की गई एमटीपी के रिकॉर्ड में गर्भ के लिंग का उल्लेख अनिवार्य रूप से किया जाए। संबंधित केंद्रों को समस्त रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से मेंटेन रखने और महिला की आरसीएच आईडी दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
सिविल सर्जन डॉ. रघुवीर शांडिल्य ने बताया कि जिले में कम लिंगानुपात वाले सीएचसी धनाना, सीएचसी जमालपुर और सीएचसी कैरू के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी एवं इंचार्ज को शोकॉज नोटिस जारी किए गए हैं। उनसे कम लिंगानुपात के कारण और इसमें सुधार के लिए अगले दो महीने का रोडमैप मांगा गया है। उन्होंने बताया कि जिले की सभी सीएचसी और पीएचसी प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में लिंगानुपात सुधारने के लिए जागरूकता अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश घर-घर तक पहुंच सके और जिले के लिंगानुपात में सुधार हो।
सिविल सर्जन डॉ. रघुवीर शांडिल्य ने कहा कि जांच अभियान के दौरान किसी भी केंद्र पर किसी भी स्तर पर अनियमितता मिलने पर संबंधित केंद्र का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। पीएनडीटी नियमों की पालना में किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि टीम द्वारा जिले के सभी केंद्रों का निरीक्षण कर रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। अल्ट्रासाउंड और एमटीपी केंद्रों की जांच का उद्देश्य केवल निरीक्षण करना नहीं बल्कि जिले के लिंगानुपात में स्थायी सुधार लाना है।