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Bhiwani News: ताकत का इम्तिहान...बॉक्सिंग में धुरंधर बेटियों ने बनाई पहचान
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Fri, 10 Apr 2026 12:34 AM IST
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एशियन मुक्केबाजी चैंपियनशिप में विजेता खिलाड़ी व कोच। स्रोत : सोशल मीडिया
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शुभम काैशिक
भिवानी। भिवानी की बेटियों ने मंगोलिया में आयोजित एशियन मुक्केबाजी चैंपियनशिप में अपना परचम लहराया है। प्रीति पंवार ने तीन बार की विश्व चैंपियन को हराकर स्वर्ण पदक जीता। वहीं साई खेल प्रशिक्षक केंद्र की प्रिया घणघस ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
भारतीय सेना में सूबेदार जैस्मिन लंबोरिया ने शानदार खेल प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। इसके अलावा साई केंद्र की पूजा रानी ने कांस्य पदक जीतकर भिवानी की मुक्केबाजी प्रतिभाओं की ताकत को साबित किया। इन खिलाड़ियों की सफलता उनके परिवार, प्रशिक्षकों और स्थानीय अकादमियों के मार्गदर्शन और मेहनत का परिणाम है। युवा मुक्केबाजों ने साबित कर दिया है कि मेहनत और जुनून के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी पहचान बनाई जा सकती है। संवाद
प्रीति ने तीन बार की विश्व चैंपियन को हराया
प्रीति पंवार ने एशियन मुक्केबाजी चैंपियनशिप के फाइनल में तीन बार की विश्व चैंपियन को हराकर इतिहास रचा है। 2003 में जिले के गांव बड़ेसरा की गलियों में जन्म लेकर अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में पदक हासिल करने तक का सफर तय किया है। प्रीति ने 2017 में मुक्केबाजी खेलना शुरू किया। परिवार में चाचा विनोद को खेलता देख प्रीति ने मुक्केबाज बनने की ठानी। विनोद महम में बॉक्सिंग अकादमी चलाते हैं। शुरुआती दिनों में अपनी भतीजी प्रीति का सपना पूरा करवाने के लिए उसे प्रतिदिन सुबह-शाम महम अकादमी अभ्यास के लिए लेकर जाने लगे। इसके बाद प्रीति के खेल प्रदर्शन और मेहनत देख कर प्रीति के परिवार ने महम में रहना शुरू कर दिया ताकि उसे अतिरिक्त समय मिल सकें। प्रीति के स्वर्ण पदक जीतने पर परिवार में खुशी का माहौल है।
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जैस्मिन लंबोरिया भारतीय सेना में सूबेदार
भारतीय सेना में सूबेदार के पद पर कार्यरत भिवानी की बेटी जैस्मिन लंबोरिया ने मंगोलिया में आयोजित एशियन मुक्केबाजी चैंपियनशिप के फाइनल मुकाबले में रजत पदक जीत कर देश का नाम रोशन कर दिया। इससे पहले जैस्मिन वर्ष 2025 में इंग्लैंड की लीवरपूल, कजाकिस्तान और नोएडा में आयोजित विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत चुकी है। जैस्मिन के पिता जयवीर और माता जोगिंदर कौर ने कहा कि अपने चाचा संदीप और परविंदर के ही मार्गदर्शन में जैस्मिन ने मुक्केबाजी का अभ्यास शुरू किया और लगातार पदक जीत रही है। हमें बेटी पर गर्व है।
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भिवानी साई केंद्र की प्रिया ने स्वर्ण पदक जीता
साई खेल प्रशिक्षक केंद्र भिवानी के उप निदेशक दीपक पंत ने बताया कि मंगोलिया में आयोजित एशियन मुक्केबाजी चैंपियनशिप में साई केंद्र की प्रिया घणघस ने स्वर्ण पदक हासिल किया है। द्रोणाचार्य अवॉर्डी वरिष्ठ प्रशिक्षक महावीर सिंह व प्रशिक्षक नवीन शर्मा ने दोनों खिलाड़ियों को बधाई दी। भिवानी के धनाना गांव निवासी प्रिया साई केंद्र में अभ्यास करती हैं।
कॉलेज से हुई पूजा की मुक्केबाजी की शुरुआत
एशियन मुक्केबाजी चैंपियनशिप में कांस्य पदक विजेता पूजा रानी बचपन से बॉक्सिंग का शौक था। आदर्श कॉलेज भिवानी में बीए फर्स्ट ईयर की पढ़ाई के दौरान कॉलेज की शारीरिक शिक्षक मुकेश रानी महिला मुक्केबाजों का चयन कर रही थीं। उन्होंने पूजा को देखा तो सोचा कि अच्छी हाइट के कारण यह लड़की मुक्केबाजी में अच्छा कर सकती हैं। इसी दौरान पूजा के मुक्केबाजी सफर की शुरुआत हुई। पूजा ने हवासिंह बॉक्सिंग अकादमी में प्रशिक्षक संजय श्योराण के मार्गदर्शन में मुक्केबाजी के गुर सीखे। फिलहाल साई केंद्र भिवानी की खिलाड़ी है और आयकर विभाग में कार्यरत है।
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भिवानी। भिवानी की बेटियों ने मंगोलिया में आयोजित एशियन मुक्केबाजी चैंपियनशिप में अपना परचम लहराया है। प्रीति पंवार ने तीन बार की विश्व चैंपियन को हराकर स्वर्ण पदक जीता। वहीं साई खेल प्रशिक्षक केंद्र की प्रिया घणघस ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
भारतीय सेना में सूबेदार जैस्मिन लंबोरिया ने शानदार खेल प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। इसके अलावा साई केंद्र की पूजा रानी ने कांस्य पदक जीतकर भिवानी की मुक्केबाजी प्रतिभाओं की ताकत को साबित किया। इन खिलाड़ियों की सफलता उनके परिवार, प्रशिक्षकों और स्थानीय अकादमियों के मार्गदर्शन और मेहनत का परिणाम है। युवा मुक्केबाजों ने साबित कर दिया है कि मेहनत और जुनून के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी पहचान बनाई जा सकती है। संवाद
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प्रीति ने तीन बार की विश्व चैंपियन को हराया
प्रीति पंवार ने एशियन मुक्केबाजी चैंपियनशिप के फाइनल में तीन बार की विश्व चैंपियन को हराकर इतिहास रचा है। 2003 में जिले के गांव बड़ेसरा की गलियों में जन्म लेकर अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में पदक हासिल करने तक का सफर तय किया है। प्रीति ने 2017 में मुक्केबाजी खेलना शुरू किया। परिवार में चाचा विनोद को खेलता देख प्रीति ने मुक्केबाज बनने की ठानी। विनोद महम में बॉक्सिंग अकादमी चलाते हैं। शुरुआती दिनों में अपनी भतीजी प्रीति का सपना पूरा करवाने के लिए उसे प्रतिदिन सुबह-शाम महम अकादमी अभ्यास के लिए लेकर जाने लगे। इसके बाद प्रीति के खेल प्रदर्शन और मेहनत देख कर प्रीति के परिवार ने महम में रहना शुरू कर दिया ताकि उसे अतिरिक्त समय मिल सकें। प्रीति के स्वर्ण पदक जीतने पर परिवार में खुशी का माहौल है।
जैस्मिन लंबोरिया भारतीय सेना में सूबेदार
भारतीय सेना में सूबेदार के पद पर कार्यरत भिवानी की बेटी जैस्मिन लंबोरिया ने मंगोलिया में आयोजित एशियन मुक्केबाजी चैंपियनशिप के फाइनल मुकाबले में रजत पदक जीत कर देश का नाम रोशन कर दिया। इससे पहले जैस्मिन वर्ष 2025 में इंग्लैंड की लीवरपूल, कजाकिस्तान और नोएडा में आयोजित विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत चुकी है। जैस्मिन के पिता जयवीर और माता जोगिंदर कौर ने कहा कि अपने चाचा संदीप और परविंदर के ही मार्गदर्शन में जैस्मिन ने मुक्केबाजी का अभ्यास शुरू किया और लगातार पदक जीत रही है। हमें बेटी पर गर्व है।
भिवानी साई केंद्र की प्रिया ने स्वर्ण पदक जीता
साई खेल प्रशिक्षक केंद्र भिवानी के उप निदेशक दीपक पंत ने बताया कि मंगोलिया में आयोजित एशियन मुक्केबाजी चैंपियनशिप में साई केंद्र की प्रिया घणघस ने स्वर्ण पदक हासिल किया है। द्रोणाचार्य अवॉर्डी वरिष्ठ प्रशिक्षक महावीर सिंह व प्रशिक्षक नवीन शर्मा ने दोनों खिलाड़ियों को बधाई दी। भिवानी के धनाना गांव निवासी प्रिया साई केंद्र में अभ्यास करती हैं।
कॉलेज से हुई पूजा की मुक्केबाजी की शुरुआत
एशियन मुक्केबाजी चैंपियनशिप में कांस्य पदक विजेता पूजा रानी बचपन से बॉक्सिंग का शौक था। आदर्श कॉलेज भिवानी में बीए फर्स्ट ईयर की पढ़ाई के दौरान कॉलेज की शारीरिक शिक्षक मुकेश रानी महिला मुक्केबाजों का चयन कर रही थीं। उन्होंने पूजा को देखा तो सोचा कि अच्छी हाइट के कारण यह लड़की मुक्केबाजी में अच्छा कर सकती हैं। इसी दौरान पूजा के मुक्केबाजी सफर की शुरुआत हुई। पूजा ने हवासिंह बॉक्सिंग अकादमी में प्रशिक्षक संजय श्योराण के मार्गदर्शन में मुक्केबाजी के गुर सीखे। फिलहाल साई केंद्र भिवानी की खिलाड़ी है और आयकर विभाग में कार्यरत है।