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Bhiwani News: वृद्ध साधु की मौत पर आयोग ने अधिकारियों को जारी किया नोटिस
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भिवानी। चरखी दादरी के नागरिक अस्पताल में एक वृद्ध साधु को समय पर इलाज नहीं मिलने और अस्पताल परिसर में तड़पते हुए उसकी मौत हो जाने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने गंभीर संज्ञान लिया है। आयोग ने मामले को प्रथम दृष्टया मानवाधिकार उल्लंघन मानते हुए हरियाणा सरकार के संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) मांगी है।
यह शिकायत भिवानी के गांव ढाणीमाहू निवासी सामाजिक कार्यकर्ता एवं हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य सुशील वर्मा ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भेजी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि चरखी दादरी के नागरिक अस्पताल में पेट दर्द से गंभीर रूप से पीड़ित एक वृद्ध साधु को केवल इसलिए तत्काल इलाज नहीं दिया गया क्योंकि उसके पास कोई पहचान दस्तावेज नहीं था।
शिकायत के अनुसार 22 मई को वृद्ध करीब चार घंटे तक अस्पताल के फर्श पर दर्द से तड़पता रहा। इस दौरान वह कई बार बेहोश होकर गिरा लेकिन अस्पताल प्रशासन और कर्मचारियों ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई।
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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 की धारा 12 के तहत मामले का संज्ञान लेते हुए जिला उपायुक्त चरखी दादरी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी चरखी दादरी और हरियाणा स्वास्थ्य सेवाएं महानिदेशक पंचकूला को नोटिस जारी किया है। आयोग ने संबंधित अधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
शिकायतकर्ता सुशील वर्मा ने कहा कि भारत साधुओं और संतों की भूमि है। यदि किसी गरीब, असहाय या साधु को केवल आधार कार्ड या पहचान पत्र नहीं होने के कारण इलाज से वंचित किया जाता है तो यह न केवल मानवता, बल्कि संविधान से प्रदत्त जीवन के अधिकार का भी गंभीर उल्लंघन है।
यह शिकायत भिवानी के गांव ढाणीमाहू निवासी सामाजिक कार्यकर्ता एवं हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य सुशील वर्मा ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भेजी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि चरखी दादरी के नागरिक अस्पताल में पेट दर्द से गंभीर रूप से पीड़ित एक वृद्ध साधु को केवल इसलिए तत्काल इलाज नहीं दिया गया क्योंकि उसके पास कोई पहचान दस्तावेज नहीं था।
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शिकायत के अनुसार 22 मई को वृद्ध करीब चार घंटे तक अस्पताल के फर्श पर दर्द से तड़पता रहा। इस दौरान वह कई बार बेहोश होकर गिरा लेकिन अस्पताल प्रशासन और कर्मचारियों ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई।
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शिकायतकर्ता सुशील वर्मा ने कहा कि भारत साधुओं और संतों की भूमि है। यदि किसी गरीब, असहाय या साधु को केवल आधार कार्ड या पहचान पत्र नहीं होने के कारण इलाज से वंचित किया जाता है तो यह न केवल मानवता, बल्कि संविधान से प्रदत्त जीवन के अधिकार का भी गंभीर उल्लंघन है।