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My Village, My Pride: A symbol of Hindu-Muslim communal harmony for decades, the shrine of Syed Baba Datna Peer in Mundhal draws devotees from every corner of both Pakistan and India.
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मेरा गांव मेरी शान: दशकों से हिंदू-मुस्लिम सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक, मुंढाल के सैय्यद बाबा दातना पीर पर पाकिस्तान और हिंदूस्तान के हर कोने से आते हैं श्रद्धालु
मुंढाल कलां के सैय्यद पीर बाबा की मजार (दातना पीर) में हिंदू, मुस्लिम, सिक्ख और इसाई सभी धर्मों के लोगों की गहरी आस्था है। मजार की देखरेख और सेवा का कार्य कई दशकों से हिंदू परिवारों द्वारा ही की जाती आ रही है। दातना पीर मजार पर पाकिस्तान से भी लोग आते थे, मगर अब देश के हर कोने से श्रद्धालु बाबा में गहरी आस्था रखते हुए मन्नतें मांगने आते हैं। करीब 700 साल पुराने इस मंदिर के इतिहास में मामा-भांजा की दो प्राचीन मजार बने हैं, जिसके आगे दो अखंड ज्योति भी प्रज्जवलित हैं।
ऐसी मान्यता है कि बाबा दातना पीर चमत्कारी बाबा के तौर पर भी जाने जाते हैं। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि बाबा का पूरा नाम लखदातार श्याहे श्री बाबा दातना पीर है। उनके भांजे का नाम सैय्यद कलंदर है। कलंदर शाही खानदान था। दोनों की यहां करीब 700 साल पहले मजार बनी थी, उस समय संयुक्त हिंदूस्तान होता था। जिसमें पाकिस्तान का हिस्सा भी शामिल था और मुस्लिम समुदाय के लोग यहां काफी सालों तक आते रहे हैं।
भिवानी जिले के मुंढाल कलां गांव में स्थित बाबा दातना पीर (बाबा दातना सैयद पीर) एक ऐतिहासिक और सिद्ध धार्मिक स्थल है। यह स्थान सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक अनुठा प्रतीक है। जहां सभी धर्मों के लोग मजार पर माथा टेक मन्नतें मांगने आते हैं और इसे मामा-भांजा दांतना सैयद पीर के नाम से भी जाना जाता है। वास्तुकलां और धार्मिक संप्रदायिक्ता के लिहाज से देखा जाए तो पीर पैगंबर की तरह बाबा की दो मजारें बनी हैं, जबकि इसे हिंदू लोग मंदिर की तरह पूजा अर्चना करते हैं। बाबा को चादर और गुड़ की भेली चढ़ाई जाती है।
सूफी और लोक परंपरा का अनूठा संगम है बाबा दातना मंदिर
भिवानी-हिसार रोड पर स्थित बाबा दातना पीर मंदिर धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि यह हरियाणा की मिली-जुली संस्कृति (सूफी और लोक परंपरा) का एक जीवंत उदाहरण भी है। बाबा दातना पीर मंदिर सदियों पुराना है, जो पहले एक सामान्य स्थान या चबूतरे के रूप में था। जिसकी संरचना छोटी ईंटों से तैयार की गई थी। समय के साथ भक्तों की अटूट आस्था ने इसे अब भव्य और विशाल मंदिर और मजार परिसर का रूप दे दिया है।
लोक मान्यताओं के अनुसार बाबा दातना पीर इस क्षेत्र के रक्षक और एक सिद्ध संत के रूप में पूजे जाते हैं। कई पीढ़ियों से ग्रामीण इस स्थान पर पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं, जिससे यह हरियाणा के प्रमुख आस्था केंद्रों में से एक बन गया है।
स्थानीय लोगों और दूर-दराज के श्रद्धालुओं का मानना है कि जो भी सच्चे मन से बाबा के दरबार में हाजिरी लगाता है और मन्नत मांगता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। पीर शब्द होने के बावजूद, यहां हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग समान रूप से श्रद्धा रखते हैं और प्रसाद चढ़ाते हैं। साल भर में कई बार इस पवित्र स्थल पर भव्य मेलों और भंडारों का आयोजन किया जाता है, जिनमें भारी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
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