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Bhiwani News: कमजोर दीवारों ने छीनी छत...पेड़ों की छांव में सिमटी पाठशाला, सज्जनपुर के स्कूल का जर्जर भवन, लगातार कम हो रही विद्यार्थियों की संख्या

Fri, 31 Jul 2026 12:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Fri, 31 Jul 2026 12:36 AM IST
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Weak walls stole the roof...the school tucked under the shade of trees, the dilapidated building of the school in Sajjanpur, the steadily decreasing number of students
सज्जनपुर का जर्जर सरकारी स्कूल का भवन।
नरेंद्र भाकर
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बवानीखेड़ा। एक तरफ सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और बेहतर शिक्षा के दावे कर रही है। बवानीखेड़ा क्षेत्र के सज्जनपुर स्थित राजकीय उच्च विद्यालय की बदहाली इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। विद्यालय का भवन इस कदर क्षतिग्रस्त है कि हादसों के डर से शिक्षक बच्चों को पेड़ों के नीचे पढ़ाने को मजबूर हैं।
बुनियादी सुविधाओं के अभाव में कभी 300 विद्यार्थियों की क्षमता वाले इस स्कूल में अब नामांकनों की संख्या नाममात्र रह गई है। वर्तमान में कमरे, बरामदे, दरवाजे और खिड़कियां पूरी तरह जर्जर हैं। शौचालयों में दरवाजे न होने से छात्राओं को भारी मानसिक व व्यावहारिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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टूटी चहारदीवारी के कारण परिसर में आवारा मवेशी भटकते रहते हैं। सुरक्षा के इस अनिश्चित माहौल से चिंतित अभिभावक अपने बच्चों को निजी या दूसरे गांवों के स्कूलों में भेजने को विवश हैं।
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2019 में डिस्मेंटल हुई इमारत, नहीं बनी नई बिल्डिंग
विद्यालय भवन का निर्माण 1990 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मास्टर हुकम सिंह के कार्यकाल में हुआ था। वर्ष 2019 में अचानक कुछ कमरों की छतें गिर गईं। छुट्टी का समय होने के कारण बड़ा हादसा टल गया। इसके तुरंत बाद प्रशासन ने इमारत को डिस्मेंटल कर खिड़की-दरवाजों की बोली तो लगा दी लेकिन पांच साल बीत जाने के बाद भी नए भवन का निर्माण शुरू नहीं हो सका।
तीन बार ग्रांट आई पर कागजों में अटका निर्माण
सरपंच प्रतिनिधि प्रदीप कुमार और ग्रामीणों के अनुसार, समस्या के स्थायी समाधान के लिए शिक्षा विभाग को कई लिखित शिकायतें दी गईं। स्थानीय विधायक कपूर वाल्मीकि, सांसद धर्मवीर सिंह और मुख्यमंत्री के ओएसडी वीरेंद्र सिंह बड़खालसा को भी मौके का निरीक्षण करवाकर वस्तुस्थिति से अवगत कराया गया।
निर्माण कार्य में सहयोग के लिए प्रोफेसर उम्मेद सिंह के नेतृत्व में एक ग्रामीण समिति भी गठित की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि तीन बार ग्रांट जारी होने के बावजूद प्रशासनिक सुस्ती और स्कूली स्तर की खींचतान के कारण निर्माण कार्य धरातल पर नहीं उतर पाया।

आंदोलन और स्टाफ बदलने की चेतावनी
प्रशासनिक उपेक्षा से आक्रोशित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नई इमारत का निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया गया और पूरा स्टाफ नहीं बदला गया, तो वे उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने मांग की है कि गांव के बच्चों के भविष्य को देखते हुए स्कूल में तुरंत सुरक्षित वातावरण और मूलभूत सुविधाएं बहाल की जाएं।
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