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Haryana: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कांस्य पदक जीतने के बाद भिवानी पहुंचे यशवीर, लोगों ने किया जोरदार स्वागत
Mon, 03 Aug 2026 06:33 PM IST
मयूर शर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Published by: मयूर शर्मा
Updated Mon, 03 Aug 2026 06:33 PM IST
सार
यशवीर ने बताया कि 7-8 साल पहले खेलना शुरू किया था और 2017 में पहला नेशनल मेडल मिला था। यशवीर ने कहा कि मेरी डाइट में ज्यादा नॉनवेज होता है और घर का बना हुआ खाना ही ज्यादा पसंद है।
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कांस्य पदक विजेता यशवीर
- फोटो : संवाद
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विस्तार
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जैवलिन थ्रो में कांस्य पदक विजेता गांव दिनोद निवासी यशवीर का सोमवार को देश पहुंचने पर स्वागत किया गया। इस दौरान यशवीर का दिल्ली एयरपोर्ट से लेकर गांव पहुंचने तक रोहतक, खरक, भिवानी शहर में स्वागत किया गया। यशवीर ने कहा कि मेरे आदर्श मेरा पिता है, जिनकी बदौलत पदक मिला। ये मेरे जीवन का पहला बड़ा इवेंट व पदक है। यह पदक मैं परिवार व गांव के साथ देश को समर्पित करता हूं।
गांव में छोटू नाम से जाने वाले यशवीर ने बताया कि 7-8 साल पहले खेलना शुरू किया था और 2017 में पहला नेशनल मेडल मिला था। यशवीर ने कहा कि मेरी डाइट में ज्यादा नॉनवेज होता है और घर का बना हुआ खाना ही ज्यादा पसंद है। उन्होंने कहा कि मेरे मार्गदर्शक मेरे पिता हैं, जो खुद बतौर जैवलिन खिलाड़ी रेलवे में कार्यरत हैं। यशवीर ने कहा कि सरकार हर खिलाड़ी को अच्छी डाइट, सुविधा व सामान दे तो अच्छे रिजल्ट आएंगे।
वहीं यशवीर के पिता व कोच रायसिंह ने कहा कि मुझे अपनी व बेटे की मेहनत पर पूरा भरोसा था, कि मेडल पक्का मिलेगा। यशवीर ने जैवलिन थ्रो में 84.41 मीटर भाला फेंक कर कांस्य पदक जीता है। मैंने बेटे को पहले बास्केटबॉल खिलाया, फिर जैवलिन में लाया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों में साथ था। इस दौरान किसी प्रकार की चिंता नहीं थी। मुझे बेटे की मेहनत पर पूरा भरोसा था। आगे आने वाले हर बड़े गेम की तैयारी मिल कर करेंगे।
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गांव में छोटू नाम से जाने वाले यशवीर ने बताया कि 7-8 साल पहले खेलना शुरू किया था और 2017 में पहला नेशनल मेडल मिला था। यशवीर ने कहा कि मेरी डाइट में ज्यादा नॉनवेज होता है और घर का बना हुआ खाना ही ज्यादा पसंद है। उन्होंने कहा कि मेरे मार्गदर्शक मेरे पिता हैं, जो खुद बतौर जैवलिन खिलाड़ी रेलवे में कार्यरत हैं। यशवीर ने कहा कि सरकार हर खिलाड़ी को अच्छी डाइट, सुविधा व सामान दे तो अच्छे रिजल्ट आएंगे।
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वहीं यशवीर के पिता व कोच रायसिंह ने कहा कि मुझे अपनी व बेटे की मेहनत पर पूरा भरोसा था, कि मेडल पक्का मिलेगा। यशवीर ने जैवलिन थ्रो में 84.41 मीटर भाला फेंक कर कांस्य पदक जीता है। मैंने बेटे को पहले बास्केटबॉल खिलाया, फिर जैवलिन में लाया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों में साथ था। इस दौरान किसी प्रकार की चिंता नहीं थी। मुझे बेटे की मेहनत पर पूरा भरोसा था। आगे आने वाले हर बड़े गेम की तैयारी मिल कर करेंगे।
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