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300 घोषणाओं पर 7500 करोड़ खर्च होना था, एक भी पैसा खर्च नहीं हुआ : संपत
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फोटो -
इनेलो के राष्ट्रीय संरक्षक ने राज्य सरकार पर लगाया वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। इनेलो के राष्ट्रीय संरक्षक पूर्व मंत्री प्रो. संपत सिंह ने 2025-26 के बजट में राज्य सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन और जनता के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया है। चंडीगढ़ स्थित इनेलो मुख्यालय में प्रेसवार्ता के दौरान पूर्व मंत्री ने कहा कि सरकार ने कुल 729 घोषणाएं की थीं। करीब 300 घोषणाओं पर 7500 करोड़ रुपये खर्च होना था लेकिन उन पर 31 मार्च 2026 तक कोई पैसा खर्च नहीं हुआ है जबकि सीएम नायब सैनी ने 2 मार्च 2026 को बजट अभिभाषण में बीते वर्ष के बजट का 98 फीसदी खर्च करने की बात कही थी।
पूर्व मंत्री ने कहा कि ऑनलाइन बजट आवंटन निगरानी एवं विश्लेषण प्रणाली से यह आंकड़े एकत्रित किए हैं। इस मामले की प्रिंसिपल अकाउंटेंट जरनल, सेंटर फाइनेंस कमीशन और राज्यपाल से शिकायत करेंगे। संपत सिंह ने बताया कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग में 406.12 करोड़ रुपये, पंचायती राज और ग्रामीण विकास में 890 करोड़, स्वच्छ भारत मिशन के तहत 248 करोड़, करनाल स्मार्ट सिटी के 73 करोड़, स्वास्थ्य सेवाओं और राष्ट्रीय कैंसर रोकथाम के 357 करोड़, अग्निशमन सेवाओं के 306 करोड़, शहरी आवास में 1,339.90 करोड़, ग्रामीण आवास में 1,540 करोड़ में से 1,335 करोड़ रुपये बिना खर्च के रह गए। सूक्ष्म सिंचाई के 1,129 करोड़, पेयजल-क्षेत्रीय विकास के 865 करोड़, ग्रामीण विकास के 300 करोड़, मनरेगा में 446 करोड़ में से 347 करोड़, सामाजिक न्याय के 591 करोड़, महिला एवं बाल विकास के 221 करोड़ और ड्रोन दीदी व कौशल योजनाओं के भी 151 करोड़ रुपये खर्च नहीं हुए है। पोषण के 90 करोड़ में से 84 करोड़ और बेटी बचाओ में भी ज्यादातर बजट बचा रह गया। शिक्षा विभाग में इंफ्रास्ट्रक्चर के 310 करोड़ रुपये बच गए, प्रमुख शिक्षा योजनाओं के लिए आवंटित 1,415 करोड़ में से केवल 240 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाए।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। इनेलो के राष्ट्रीय संरक्षक पूर्व मंत्री प्रो. संपत सिंह ने 2025-26 के बजट में राज्य सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन और जनता के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया है। चंडीगढ़ स्थित इनेलो मुख्यालय में प्रेसवार्ता के दौरान पूर्व मंत्री ने कहा कि सरकार ने कुल 729 घोषणाएं की थीं। करीब 300 घोषणाओं पर 7500 करोड़ रुपये खर्च होना था लेकिन उन पर 31 मार्च 2026 तक कोई पैसा खर्च नहीं हुआ है जबकि सीएम नायब सैनी ने 2 मार्च 2026 को बजट अभिभाषण में बीते वर्ष के बजट का 98 फीसदी खर्च करने की बात कही थी।
पूर्व मंत्री ने कहा कि ऑनलाइन बजट आवंटन निगरानी एवं विश्लेषण प्रणाली से यह आंकड़े एकत्रित किए हैं। इस मामले की प्रिंसिपल अकाउंटेंट जरनल, सेंटर फाइनेंस कमीशन और राज्यपाल से शिकायत करेंगे। संपत सिंह ने बताया कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग में 406.12 करोड़ रुपये, पंचायती राज और ग्रामीण विकास में 890 करोड़, स्वच्छ भारत मिशन के तहत 248 करोड़, करनाल स्मार्ट सिटी के 73 करोड़, स्वास्थ्य सेवाओं और राष्ट्रीय कैंसर रोकथाम के 357 करोड़, अग्निशमन सेवाओं के 306 करोड़, शहरी आवास में 1,339.90 करोड़, ग्रामीण आवास में 1,540 करोड़ में से 1,335 करोड़ रुपये बिना खर्च के रह गए। सूक्ष्म सिंचाई के 1,129 करोड़, पेयजल-क्षेत्रीय विकास के 865 करोड़, ग्रामीण विकास के 300 करोड़, मनरेगा में 446 करोड़ में से 347 करोड़, सामाजिक न्याय के 591 करोड़, महिला एवं बाल विकास के 221 करोड़ और ड्रोन दीदी व कौशल योजनाओं के भी 151 करोड़ रुपये खर्च नहीं हुए है। पोषण के 90 करोड़ में से 84 करोड़ और बेटी बचाओ में भी ज्यादातर बजट बचा रह गया। शिक्षा विभाग में इंफ्रास्ट्रक्चर के 310 करोड़ रुपये बच गए, प्रमुख शिक्षा योजनाओं के लिए आवंटित 1,415 करोड़ में से केवल 240 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाए।
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