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एडवोकेट जनरल के तौर पर प्रविंदर सिंह चौहान की नियुक्ति सही : हाईकोर्ट
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-नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका खारिज, संवैधानिक योग्यता पूरी तरह साबित
-चौहान की नियुक्ति को संवैधानिक प्रावधानों और न्यायिक मानकों के खिलाफ बताया था
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा के एडवोकेट जनरल प्रविंदर सिंह चौहान की नियुक्ति को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को सिरे से खारिज करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि उनकी नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 165 के अनुरूप पूरी तरह वैध और संवैधानिक है।
याचिका दाखिल करते हुए एडवोकेट प्रदीप सिंह ने हाईकोर्ट को बताया था कि प्रविंदर सिंह चौहान की हरियाणा के एडवोकेट जनरल के तौर पर नियुक्ति संवैधानिक प्रावधानों व न्यायिक मानकों के विपरीत है। याचिका में कहा था कि एडवोकेट जनरल पद के लिए योग्यता मानक वही हैं जो हाईकोर्ट के न्यायाधीश बनने के लिए संविधान में तय किए गए हैं। चौहान इस कसौटी पर खरे नहीं उतरते इसलिए उन्हें एडवोकेट जनरल भी नहीं बनाया जा सकता।
हाईकोर्ट ने कहा कि जो व्यक्ति हाईकोर्ट का न्यायाधीश बनने के योग्य है वही राज्य का एडवोकेट जनरल भी नियुक्त किया जा सकता है। कोई भी भारतीय नागरिक जिसने कम से कम 10 वर्ष तक हाईकोर्ट में वकालत की हो वह न्यायाधीश बनने के योग्य होता है। चौहान भारतीय नागरिक हैं और उन्होंने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में 10 वर्ष से अधिक समय तक वकालत की है इसलिए वह एडवोकेट जनरल बनने की सभी संवैधानिक शर्तें पूरी करते हैं।
कोर्ट ने कहा कि चौहान पर अनुचित आचरण और उनके खिलाफ कथित शिकायतों पर जनहित याचिका में जांच नहीं की जा सकती। इसका दायरा केवल यह देखने तक सीमित है कि संबंधित व्यक्ति उस पद के लिए संवैधानिक या वैधानिक रूप से पात्र है या नहीं। पेशेवर आचरण से जुड़े विवाद इस तरह की कार्यवाही में विचारणीय नहीं होते। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में असफल रहा कि एडवोकेट जनरल की नियुक्ति संविधान के विपरीत है। इस आधार पर हाईकोर्ट ने जनहित याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।
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-चौहान की नियुक्ति को संवैधानिक प्रावधानों और न्यायिक मानकों के खिलाफ बताया था
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा के एडवोकेट जनरल प्रविंदर सिंह चौहान की नियुक्ति को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को सिरे से खारिज करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि उनकी नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 165 के अनुरूप पूरी तरह वैध और संवैधानिक है।
याचिका दाखिल करते हुए एडवोकेट प्रदीप सिंह ने हाईकोर्ट को बताया था कि प्रविंदर सिंह चौहान की हरियाणा के एडवोकेट जनरल के तौर पर नियुक्ति संवैधानिक प्रावधानों व न्यायिक मानकों के विपरीत है। याचिका में कहा था कि एडवोकेट जनरल पद के लिए योग्यता मानक वही हैं जो हाईकोर्ट के न्यायाधीश बनने के लिए संविधान में तय किए गए हैं। चौहान इस कसौटी पर खरे नहीं उतरते इसलिए उन्हें एडवोकेट जनरल भी नहीं बनाया जा सकता।
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हाईकोर्ट ने कहा कि जो व्यक्ति हाईकोर्ट का न्यायाधीश बनने के योग्य है वही राज्य का एडवोकेट जनरल भी नियुक्त किया जा सकता है। कोई भी भारतीय नागरिक जिसने कम से कम 10 वर्ष तक हाईकोर्ट में वकालत की हो वह न्यायाधीश बनने के योग्य होता है। चौहान भारतीय नागरिक हैं और उन्होंने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में 10 वर्ष से अधिक समय तक वकालत की है इसलिए वह एडवोकेट जनरल बनने की सभी संवैधानिक शर्तें पूरी करते हैं।
कोर्ट ने कहा कि चौहान पर अनुचित आचरण और उनके खिलाफ कथित शिकायतों पर जनहित याचिका में जांच नहीं की जा सकती। इसका दायरा केवल यह देखने तक सीमित है कि संबंधित व्यक्ति उस पद के लिए संवैधानिक या वैधानिक रूप से पात्र है या नहीं। पेशेवर आचरण से जुड़े विवाद इस तरह की कार्यवाही में विचारणीय नहीं होते। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में असफल रहा कि एडवोकेट जनरल की नियुक्ति संविधान के विपरीत है। इस आधार पर हाईकोर्ट ने जनहित याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।