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Chandigarh-Haryana News: मधुमक्खी पालकों को मिलेगा भावांतर का लाभ, पोर्टल पर 30 जून तक करना होगा आवेदन
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- प्रदेश सरकार ने शहद का संरक्षित मूल्य 120 रुपये प्रति किलोग्राम तय किया
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश के मधुमक्खी पालकों को भावांतर का लाभ मिलेगा। शहद के लिए संरक्षित मूल्य 120 रुपये प्रति किलोग्राम तय किया गया है। भावांतर योजना का लाभ पाने के लिए मधुमक्खी पालकों के लिए पोर्टल खोला गया है। इसके लिए 30 जून तक ऑनलाइन आवेदन करना होगा। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने बताया कि प्रदेश के किसानों के लिए यह बड़ा निर्णय लिया गया है। इससे मधुमक्खी पालकों को बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव से राहत मिलेगी और उन्हें अपने उत्पाद का उचित मूल्य मिल सकेगा।
कृषि मंत्री ने कहा कि मधुमक्खी पालन किसानों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण अतिरिक्त स्रोत बनकर उभरा है। कृषि मंत्री ने कहा कि उक्त योजना के तहत पंजीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया मधुक्रांति पोर्टल (madhukranti.in) और भावांतर भरपाई योजना पोर्टल (शहद) hortharyana.gov.in के माध्यम से पूरी की जाएगी। पंजीकरण की शुरुआत 1 जनवरी से हो चुकी है और 30 जून 2026 पंजीकरण की अंतिम तिथि है। योजना का लाभ लेने के लिए राज्य की सीमा के भीतर सत्यापन अनिवार्य होगा। योजना का लाभ उन्हीं को मिलेगा जिनके परिवार पहचान पत्र और बैंक खाते के विवरण सत्यापित हों। यह प्रक्रिया अधिकृत अधिकारियों के माध्यम से पूरी पारदर्शिता के साथ पूरी की जाएगी जिससे पात्र मधुमक्खी पालकों को ही लाभ मिले। इससे ग्रामीण युवाओं व किसानों को मधुमक्खी पालन अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। कृषि मंत्री ने राज्य के सभी मधुमक्खी पालकों से अपील की है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना पंजीकरण कराकर योजना का लाभ उठाएं। इस योजना की अधिक जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 1800-180-2021 भी जारी किया गया है।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश के मधुमक्खी पालकों को भावांतर का लाभ मिलेगा। शहद के लिए संरक्षित मूल्य 120 रुपये प्रति किलोग्राम तय किया गया है। भावांतर योजना का लाभ पाने के लिए मधुमक्खी पालकों के लिए पोर्टल खोला गया है। इसके लिए 30 जून तक ऑनलाइन आवेदन करना होगा। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने बताया कि प्रदेश के किसानों के लिए यह बड़ा निर्णय लिया गया है। इससे मधुमक्खी पालकों को बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव से राहत मिलेगी और उन्हें अपने उत्पाद का उचित मूल्य मिल सकेगा।
कृषि मंत्री ने कहा कि मधुमक्खी पालन किसानों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण अतिरिक्त स्रोत बनकर उभरा है। कृषि मंत्री ने कहा कि उक्त योजना के तहत पंजीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया मधुक्रांति पोर्टल (madhukranti.in) और भावांतर भरपाई योजना पोर्टल (शहद) hortharyana.gov.in के माध्यम से पूरी की जाएगी। पंजीकरण की शुरुआत 1 जनवरी से हो चुकी है और 30 जून 2026 पंजीकरण की अंतिम तिथि है। योजना का लाभ लेने के लिए राज्य की सीमा के भीतर सत्यापन अनिवार्य होगा। योजना का लाभ उन्हीं को मिलेगा जिनके परिवार पहचान पत्र और बैंक खाते के विवरण सत्यापित हों। यह प्रक्रिया अधिकृत अधिकारियों के माध्यम से पूरी पारदर्शिता के साथ पूरी की जाएगी जिससे पात्र मधुमक्खी पालकों को ही लाभ मिले। इससे ग्रामीण युवाओं व किसानों को मधुमक्खी पालन अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। कृषि मंत्री ने राज्य के सभी मधुमक्खी पालकों से अपील की है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना पंजीकरण कराकर योजना का लाभ उठाएं। इस योजना की अधिक जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 1800-180-2021 भी जारी किया गया है।
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