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IDFC बैंक घोटाला : दिल्ली-एनसीआर तक पहुंची सीबीआई की जांच, छह ठिकानों पर छापेमारी; क्या बोली जांच एजेंसी?
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Sun, 07 Jun 2026 11:44 PM IST
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सार
जांच एजेंसी ने हरियाणा कैडर के जिन आईएएस अधिकारियों के आवासों पर छापे मारे उनमें मोहम्मद शाईन, पंकज अग्रवाल और प्रदीप कुमार व आईएफएस अधिकारी नवनीत कुमार श्रीवास्तव शामिल हैं।
आईडीएफसी बैंक
- फोटो : फाइल
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विस्तार
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाले की जांच अब हरियाणा से बाहर निकल कर दिल्ली-एनसीआर में पहुंच गई है। शनिवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इस मामले में चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली एनसीआर में हरियाणा कैडर के तीन आईएएस अधिकारियों और एक आईएफएस अधिकारी के आवास समेत छह ठिकानों पर छापे डाले। इस मामले में सीबीआई ने पहली बार हरियाणा-चंडीगढ़ के बाहर छापा डाला है।
जांच एजेंसी ने दावा किया है कि ऐसे सबूत मिले हैं जिनसे पता चलता है कि कुछ सरकारी कर्मचारियों ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर सरकारी खाते खुलवाने, पैसे ट्रांसफर करने और बाद में उन पैसों के गलत इस्तेमाल में मदद की। एजेंसी का आरोप है कि इस काम में सहयोग करने और अनियमितताओं पर कार्रवाई नहीं करने के बदले उन्हें फायदा पहुंचाया गया।
जांच एजेंसी ने हरियाणा कैडर के जिन आईएएस अधिकारियों के आवासों पर छापे मारे उनमें मोहम्मद शाईन, पंकज अग्रवाल और प्रदीप कुमार व आईएफएस अधिकारी नवनीत कुमार श्रीवास्तव शामिल हैं। जिस दौरान बैंक धोखाधड़ी हुई मोहम्मद शाईन हरियाणा विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (एचपीजीसीएल) के प्रबंध निदेशक थे। पंकज अग्रवाल कृषि विभाग के प्रशासनिक सचिव थे और प्रदीप कुमार हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव थे। आईएफएस अधिकारी नवनीत कुमार श्रीवास्तव चंडीगढ़ नवीकरणीय ऊर्जा और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संवर्धन सोसायटी (सीआरईएसटी) के सीईओ पद पर तैनात थे। आरोप है कि इन्हीं आईएएस अधिकारियों के इशारे पर आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में सरकारी विभागों के खाते खोले गए थे और विभागीय बैंक खातों से उनके कार्यकाल के दौरान गबन हुआ था।
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नोएडा की कंपनी में जमा की गई घोटाले की रकम
661 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले की जांच के दौरान सीबीआई ने नोएडा स्थित मेसर्स विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक के ठिकानों पर भी सर्च अभियान चलाया। इस मामले में पहली बार इस कंपनी का नाम सामने आया है। जांच एजेंसी का दावा है कि घोटाले से जुड़ी रकम कंपनी के बैंक खाते में जमा कराई गई थी जिसे बाद में निदेशक के निजी खाते में ट्रांसफर कर दिया गया। तलाशी के दौरान सीबीआई ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, संपत्ति से जुड़े कागजात और अन्य संदिग्ध सामग्री जब्त की है। इनकी जांच की जा रही है। सीबीआई की ओर से संकेत मिले हैं कि जल्द ही इस मामले में एक और चार्जशीट दायर की जाएगी।
जांच एजेंसी ने दावा किया है कि ऐसे सबूत मिले हैं जिनसे पता चलता है कि कुछ सरकारी कर्मचारियों ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर सरकारी खाते खुलवाने, पैसे ट्रांसफर करने और बाद में उन पैसों के गलत इस्तेमाल में मदद की। एजेंसी का आरोप है कि इस काम में सहयोग करने और अनियमितताओं पर कार्रवाई नहीं करने के बदले उन्हें फायदा पहुंचाया गया।
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जांच एजेंसी ने हरियाणा कैडर के जिन आईएएस अधिकारियों के आवासों पर छापे मारे उनमें मोहम्मद शाईन, पंकज अग्रवाल और प्रदीप कुमार व आईएफएस अधिकारी नवनीत कुमार श्रीवास्तव शामिल हैं। जिस दौरान बैंक धोखाधड़ी हुई मोहम्मद शाईन हरियाणा विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (एचपीजीसीएल) के प्रबंध निदेशक थे। पंकज अग्रवाल कृषि विभाग के प्रशासनिक सचिव थे और प्रदीप कुमार हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव थे। आईएफएस अधिकारी नवनीत कुमार श्रीवास्तव चंडीगढ़ नवीकरणीय ऊर्जा और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संवर्धन सोसायटी (सीआरईएसटी) के सीईओ पद पर तैनात थे। आरोप है कि इन्हीं आईएएस अधिकारियों के इशारे पर आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में सरकारी विभागों के खाते खोले गए थे और विभागीय बैंक खातों से उनके कार्यकाल के दौरान गबन हुआ था।
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नोएडा की कंपनी में जमा की गई घोटाले की रकम
661 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले की जांच के दौरान सीबीआई ने नोएडा स्थित मेसर्स विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक के ठिकानों पर भी सर्च अभियान चलाया। इस मामले में पहली बार इस कंपनी का नाम सामने आया है। जांच एजेंसी का दावा है कि घोटाले से जुड़ी रकम कंपनी के बैंक खाते में जमा कराई गई थी जिसे बाद में निदेशक के निजी खाते में ट्रांसफर कर दिया गया। तलाशी के दौरान सीबीआई ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, संपत्ति से जुड़े कागजात और अन्य संदिग्ध सामग्री जब्त की है। इनकी जांच की जा रही है। सीबीआई की ओर से संकेत मिले हैं कि जल्द ही इस मामले में एक और चार्जशीट दायर की जाएगी।
सीबीआई एक अधिकारी को बनाएगी गवाह
बैंक घोटाले में सीबीआई हरियाणा कैडर के एक आईएएस अधिकारी को गवाह बनाने जा रही है। यह अधिकारी विकास व पंचायती राज विभाग में कार्यरत रहे थे। इससे पहले हरियाणा सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत आठ आईएएस अधिकारियों की जांच की अनुमति दी थी। इनमें मोइम्मद शाईन, पंकज अग्रवाल, विनीत गर्ग, आरके सिंह, प्रदीप कुमार, मनीराम शर्मा, साकेत कुमार और डीके बेहरा शामिल हैं। इन अधिकारियों से सीबीआई पूछताछ कर चुकी है और उनके मोबाइल फोन भी जब्त कर चुकी है। घोटाला सामने आने पर हरियाणा सरकार ने दो आईएएस अधिकारियों आरके सिंह व प्रदीप कुमार को निलंबित कर दिया और बाकी का तबादला कर दिया।
यह था मामला
सीबीआई ने इस बैंक घोटाले में 8 अप्रैल को एफआईआर दर्ज की थी। इससे पहले इस मामले की जांच राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो कर रहा था। अब सीबीआई के साथ-साथ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी मामले की जांच कर रहा है। जांच में सामने आया कि सरकारी विभागों के पैसे को एफडीआर में जमा किया जाना था लेकिन एफडीआर बनाई ही नहीं गईं। विभागों को नकली एफडीआर दिखाकर भरोसे में लिया गया और करोड़ों रुपये अलग-अलग लोगों, कंपनियों और कथित फर्जी संस्थाओं के खातों में भेज दिए गए। इस मामले में सीबीआई बीती 21 मई को 13 लोगों और दो फर्जी संस्थाओं के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। इस आरोप पत्र में हरियाणा सरकार के दो बड़े विभागों हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के अधिकारियों की भूमिका व उनके तौर तरीकों का पूरा कच्चा चिट्ठा खोला गया है। आरोपियों में छह बैंक अधिकारी ऋभव ऋषि, अभय कुमार, सीमा धीमान, प्रियंका भाटोआ, अनुज कौशल और अरुण शर्मा शामिल हैं। इसके अलावा स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स के निदेशक अभिषेक सिंगला, स्वाति सिंगला और एसआरआर प्लानिंग गुरुज के निदेशक अंकुर शर्मा को भी आरोपी बनाया गया है।
बैंक घोटाले में सीबीआई हरियाणा कैडर के एक आईएएस अधिकारी को गवाह बनाने जा रही है। यह अधिकारी विकास व पंचायती राज विभाग में कार्यरत रहे थे। इससे पहले हरियाणा सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत आठ आईएएस अधिकारियों की जांच की अनुमति दी थी। इनमें मोइम्मद शाईन, पंकज अग्रवाल, विनीत गर्ग, आरके सिंह, प्रदीप कुमार, मनीराम शर्मा, साकेत कुमार और डीके बेहरा शामिल हैं। इन अधिकारियों से सीबीआई पूछताछ कर चुकी है और उनके मोबाइल फोन भी जब्त कर चुकी है। घोटाला सामने आने पर हरियाणा सरकार ने दो आईएएस अधिकारियों आरके सिंह व प्रदीप कुमार को निलंबित कर दिया और बाकी का तबादला कर दिया।
यह था मामला
सीबीआई ने इस बैंक घोटाले में 8 अप्रैल को एफआईआर दर्ज की थी। इससे पहले इस मामले की जांच राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो कर रहा था। अब सीबीआई के साथ-साथ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी मामले की जांच कर रहा है। जांच में सामने आया कि सरकारी विभागों के पैसे को एफडीआर में जमा किया जाना था लेकिन एफडीआर बनाई ही नहीं गईं। विभागों को नकली एफडीआर दिखाकर भरोसे में लिया गया और करोड़ों रुपये अलग-अलग लोगों, कंपनियों और कथित फर्जी संस्थाओं के खातों में भेज दिए गए। इस मामले में सीबीआई बीती 21 मई को 13 लोगों और दो फर्जी संस्थाओं के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। इस आरोप पत्र में हरियाणा सरकार के दो बड़े विभागों हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के अधिकारियों की भूमिका व उनके तौर तरीकों का पूरा कच्चा चिट्ठा खोला गया है। आरोपियों में छह बैंक अधिकारी ऋभव ऋषि, अभय कुमार, सीमा धीमान, प्रियंका भाटोआ, अनुज कौशल और अरुण शर्मा शामिल हैं। इसके अलावा स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स के निदेशक अभिषेक सिंगला, स्वाति सिंगला और एसआरआर प्लानिंग गुरुज के निदेशक अंकुर शर्मा को भी आरोपी बनाया गया है।