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मानवाधिकार आयोग सख्त: फरीदाबाद में 16 दिन से पानी को तरसे सैनिक कॉलोनी के लोग, 14 शिकायतों का एक साथ संज्ञान
Sat, 08 Aug 2026 12:23 PM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Sat, 08 Aug 2026 12:23 PM IST
सार
सैनिक कॉलोनी के जे और के ब्लॉक के निवासी करीब 16 दिनों से पर्याप्त पेयजल के लिए परेशान हैं। कई घरों में नियमित पानी नहीं पहुंच रहा। शिकायतकर्ताओं के अनुसार क्षेत्र का ट्यूबवेल लंबे समय से बंद है, जबकि रैनी वेल से पिछले महीने केवल एक-दो बार ही पानी मिला।
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हरियाणा मानवाधिकार आयोग
- फोटो : फाइल
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विस्तार
फरीदाबाद के सैनिक कॉलोनी, सेक्टर-49 में 16 दिनों से जारी पेयजल संकट पर हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने क्षेत्र के लोगों की 14 शिकायतों का एक साथ संज्ञान लेते हुए नगर निगम फरीदाबाद और फरीदाबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (एफएमडीए) से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
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आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह महज प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन, स्वास्थ्य और गरिमा से जुड़े मानवाधिकारों का मामला है।
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जस्टिस ललित बत्रा के समक्ष रखी गई शिकायतों में बताया गया कि सैनिक कॉलोनी के जे और के ब्लॉक के निवासी करीब 16 दिनों से पर्याप्त पेयजल के लिए परेशान हैं। कई घरों में नियमित पानी नहीं पहुंच रहा। शिकायतकर्ताओं के अनुसार क्षेत्र का ट्यूबवेल लंबे समय से बंद है, जबकि रैनी वेल से पिछले महीने केवल एक-दो बार ही पानी मिला। प्रशासन की ओर से भेजे जा रहे पानी के टैंकर भी जरूरत के मुकाबले अपर्याप्त बताए गए हैं।
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अधिकारियों की जानकारी में भी विरोधाभास
शिकायतों में यह भी आरोप लगाया गया है कि जलापूर्ति को लेकर अधिकारियों की ओर से अलग-अलग जानकारी दी जा रही है। संबंधित अधिकारी का संपर्क विवरण आधिकारिक वेबसाइट पर गलत होने की शिकायत भी आयोग के सामने रखी गई। आयोग ने इन आरोपों की जांच जरूरी मानते हुए संबंधित विभागों से जवाब मांगा है।
इन बिंदुओं पर मांगी रिपोर्ट
आयोग ने नगर निगम आयुक्त और एफएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी से प्रभावित क्षेत्र में वर्तमान जलापूर्ति की स्थिति, संकट के कारण, ट्यूबवेल और बूस्टर स्टेशन की कार्यशीलता, रैनी वेल से पानी की आपूर्ति, टैंकरों समेत वैकल्पिक व्यवस्था की पर्याप्तता और अब तक मिली शिकायतों पर की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी है। साथ ही नियमित जलापूर्ति बहाल करने और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए उठाए गए और प्रस्तावित कदमों का ब्यौरा भी मांगा गया है।
असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा के अनुसार, संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले विस्तृत रिपोर्ट आयोग के समक्ष पेश करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर 2026 को होगी।