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Haryana: सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बनेंगे लेवल-3 ट्रॉमा सेंटर, उच्च स्तरीय कमेटी गठित; 10 दिन में रिपोर्ट

आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Tue, 21 Apr 2026 11:24 AM IST
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सार

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कमेटी में सर्जरी विभाग प्रमुख सहित कल्पना चावला गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, करनाल, भगत फूल सिंह गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, खानपुर कलां (सोनीपत) और शहीद हसन खान मेवाती गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, नूंह के निदेशक को भी शामिल किया गया है।

Haryana Level 3 Trauma Centers to be Established in Government Medical Colleges
ट्रॉमा सेंटर - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार

हरियाणा में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लेवल-3 ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता पंडित भगवत दयाल शर्मा पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, रोहतक के निदेशक करेंगे।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कमेटी में सर्जरी विभाग प्रमुख सहित कल्पना चावला गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, करनाल, भगत फूल सिंह गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, खानपुर कलां (सोनीपत) और शहीद हसन खान मेवाती गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, नूंह के निदेशक को भी शामिल किया गया है। कमेटी को सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में चरणबद्ध तरीके से ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने की संभावनाओं का आकलन कर 10 दिन के भीतर रिपोर्ट देनी होगी।
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स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि सड़क दुर्घटनाओं में बड़ी संख्या में मौतें समय पर इलाज न मिलने के कारण होती हैं। गोल्डन ऑवर यानी दुर्घटना के बाद का पहला घंटा सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि इस दौरान मरीज को सही उपचार मिल जाए तो उसकी जान बचाई जा सकती है।

लेवल-3 ट्रॉमा सेंटर की सुविधाएं

इन केंद्रों में 24 घंटे आपातकालीन सेवाएं, सामान्य सर्जन और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ ऑन-कॉल, हड्डी रोग उपचार, आईसीयू, एक्स-रे और लैब जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। गंभीर मरीजों को जरूरत पड़ने पर उच्च स्तरीय ट्रॉमा सेंटर में रेफर करने की व्यवस्था भी रहेगी।

11 साल में 57 हजार से अधिक मौतें

आंकड़ों के अनुसार हरियाणा में 2014 से अब तक सड़क दुर्घटनाओं में 57,901 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 1.15 लाख हादसे दर्ज किए गए हैं। वर्ष 2024 में 4,689 और 2025 में 4,885 लोगों की जान गई। सबसे अधिक मौतें गुरुग्राम, सोनीपत, करनाल, पानीपत और झज्जर जिलों में दर्ज की गई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार तेज रफ्तार, लापरवाही और गलत दिशा में वाहन चलाना दुर्घटनाओं के मुख्य कारण हैं। ऐसे में ट्रॉमा सेंटरों का विस्तार आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
 
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