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IDFC Bank Scam: 590 करोड़ के गबन में सीबीआई का बड़ा एक्शन, चंडीगढ़-पंचकूला में कई ठिकानों पर छापे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Fri, 15 May 2026 11:25 AM IST
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सार
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के कुछ अधिकारियों ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के लोक सेवकों के साथ मिलीभगत कर सरकारी धन का गबन किया।जांच में सामने आया है कि धोखाधड़ी के जरिए सरकारी राशि को गलत तरीके से निजी लाभार्थियों तक पहुंचाया गया।
सीबीआई
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने हरियाणा में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक से जुड़े 590 करोड़ के सरकारी धन गबन मामले में चंडीगढ़ और पंचकूला में कई स्थानों पर तलाशी ली। यह कार्रवाई 14 मई को की गई, जिसमें सरकारी धन के दुरुपयोग और धोखाधड़ी से जुड़े अहम दस्तावेज व डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं।
सीबीआई के अनुसार, हरियाणा सरकार ने इस मामले की जांच एजेंसी को सौंपी थी। आरोप है कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के कुछ अधिकारियों ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के लोक सेवकों के साथ मिलीभगत कर सरकारी धन का गबन किया। जांच में सामने आया है कि धोखाधड़ी के जरिए सरकारी राशि को गलत तरीके से निजी लाभार्थियों तक पहुंचाया गया।
सीबीआई ने इस मामले में कुल सात स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। इनमें आवासीय परिसरों के अलावा ज्वैलर्स के शोरूम, संदिग्ध लाभार्थियों के ठिकाने और जांच से जुड़ी अन्य निजी संस्थाओं के परिसर शामिल रहे। तलाशी के दौरान वित्तीय रिकॉर्ड, लेनदेन से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एजेंसी के मुताबिक, इस घोटाले में अब तक 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सीबीआई कई वित्तीय लेनदेन और संदिग्ध नेटवर्क की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में और भी खुलासे होने की संभावना है तथा जांच तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है।
सीबीआई ने कहा कि सरकारी धन के कथित गबन से जुड़े पूरे नेटवर्क का पता लगाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए व्यापक जांच जारी रहेगी।
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सीबीआई के अनुसार, हरियाणा सरकार ने इस मामले की जांच एजेंसी को सौंपी थी। आरोप है कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के कुछ अधिकारियों ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के लोक सेवकों के साथ मिलीभगत कर सरकारी धन का गबन किया। जांच में सामने आया है कि धोखाधड़ी के जरिए सरकारी राशि को गलत तरीके से निजी लाभार्थियों तक पहुंचाया गया।
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सीबीआई ने इस मामले में कुल सात स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। इनमें आवासीय परिसरों के अलावा ज्वैलर्स के शोरूम, संदिग्ध लाभार्थियों के ठिकाने और जांच से जुड़ी अन्य निजी संस्थाओं के परिसर शामिल रहे। तलाशी के दौरान वित्तीय रिकॉर्ड, लेनदेन से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एजेंसी के मुताबिक, इस घोटाले में अब तक 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सीबीआई कई वित्तीय लेनदेन और संदिग्ध नेटवर्क की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में और भी खुलासे होने की संभावना है तथा जांच तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है।
सीबीआई ने कहा कि सरकारी धन के कथित गबन से जुड़े पूरे नेटवर्क का पता लगाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए व्यापक जांच जारी रहेगी।