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Chandigarh-Haryana News: अब कम कलेक्टर रेट दिखाकर प्राइम खसरों की रजिस्ट्री नहीं हो पाएगी
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सरकार ने प्राइम खसरों की पहचान और उन्हें चिह्नित करने के लिए डिजिटल व्यवस्था को मंजूरी दी
प्राइम खसरा मॉड्यूल से निर्धारण प्रक्रिया में एकरूपता आएगी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने प्राइम (उच्च मूल्य वाले) खसरों की पहचान और उन्हें चिह्नित करने के लिए डिजिटल व्यवस्था को मंजूरी दी है। यह नई प्रणाली पूरे राज्य में प्राइम खसरा निर्धारण प्रक्रिया में एकरूपता लाएगी। इसका लाभ यह होगा कि प्राइम खसरों यानी 33 फुट चाैड़े मार्ग से सटे 3 से 5 एकड़ तक के क्षेत्रों में तय कलेक्टर रेट पर ही स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस देनी होगी। राजस्व विभाग के पास पूरा ब्योरा उपलब्ध होने से कम कलेक्टर रेट दिखाकर प्राइम खसरों की रजिस्ट्री नहीं हो पाएगी।
यहां जारी बयान में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्त आयुक्त डाॅ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि प्राइम खसरा मॉड्यूल विशेष रूप से प्राइम खसरों की पहचान के लिए विकसित किया गया है। इसके तहत अधिकृत राजस्व अधिकारी संबंधित रिकॉर्ड की जांच करेंगे। वे आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने के बाद प्राइम खसरे का चयन और निर्धारण कर सकेंगे। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य प्रक्रिया में एकरूपता और पारदर्शिता लाना है। यह भूमि रिकॉर्ड के डिजिटल प्रबंधन को भी मजबूत करेगा। अधिकारियों को प्राइम खसरे के सत्यापन, दस्तावेज तैयार करने और निर्धारण के लिए एक स्पष्ट प्रक्रिया मिलेगी। इससे विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग तरीके अपनाने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी।
डाॅ. मिश्रा ने कहा कि यह हरियाणा में डिजिटल राजस्व प्रशासन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने राजस्व हरियाणा पोर्टल पर प्राइम खसरा मॉड्यूल और इसके संचालन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और उपयोगकर्ता पुस्तिका को भी स्वीकृति दी है। स्वीकृत एसओपी और उपयोगकर्ता पुस्तिका मंडल आयुक्तों, उपायुक्तों और उपमंडल अधिकारियों को भेजी जाएगी। यह तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को भी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे अधिकारियों को मॉड्यूल के उपयोग और कार्रवाई के बारे में स्पष्ट मार्गदर्शन मिलेगा। इन दस्तावेज को विभागीय पोर्टल पर भी अपलोड किया जाएगा।
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अभी तक लोग प्राइम खसरों की रजिस्ट्री कराने के लिए 33 फुट चाैड़े मार्ग से सटे 3 से 5 एकड़ क्षेत्र को थोड़ा जोड़ते हुए आसपास के क्षेत्र को दिखाकर कम कलेक्टर रेट पर रजिस्ट्री करा लेते थे। इससे वह स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस कम चुकाते थे लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
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प्राइम खसरा मॉड्यूल से निर्धारण प्रक्रिया में एकरूपता आएगी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने प्राइम (उच्च मूल्य वाले) खसरों की पहचान और उन्हें चिह्नित करने के लिए डिजिटल व्यवस्था को मंजूरी दी है। यह नई प्रणाली पूरे राज्य में प्राइम खसरा निर्धारण प्रक्रिया में एकरूपता लाएगी। इसका लाभ यह होगा कि प्राइम खसरों यानी 33 फुट चाैड़े मार्ग से सटे 3 से 5 एकड़ तक के क्षेत्रों में तय कलेक्टर रेट पर ही स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस देनी होगी। राजस्व विभाग के पास पूरा ब्योरा उपलब्ध होने से कम कलेक्टर रेट दिखाकर प्राइम खसरों की रजिस्ट्री नहीं हो पाएगी।
यहां जारी बयान में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्त आयुक्त डाॅ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि प्राइम खसरा मॉड्यूल विशेष रूप से प्राइम खसरों की पहचान के लिए विकसित किया गया है। इसके तहत अधिकृत राजस्व अधिकारी संबंधित रिकॉर्ड की जांच करेंगे। वे आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने के बाद प्राइम खसरे का चयन और निर्धारण कर सकेंगे। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य प्रक्रिया में एकरूपता और पारदर्शिता लाना है। यह भूमि रिकॉर्ड के डिजिटल प्रबंधन को भी मजबूत करेगा। अधिकारियों को प्राइम खसरे के सत्यापन, दस्तावेज तैयार करने और निर्धारण के लिए एक स्पष्ट प्रक्रिया मिलेगी। इससे विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग तरीके अपनाने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी।
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डाॅ. मिश्रा ने कहा कि यह हरियाणा में डिजिटल राजस्व प्रशासन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने राजस्व हरियाणा पोर्टल पर प्राइम खसरा मॉड्यूल और इसके संचालन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और उपयोगकर्ता पुस्तिका को भी स्वीकृति दी है। स्वीकृत एसओपी और उपयोगकर्ता पुस्तिका मंडल आयुक्तों, उपायुक्तों और उपमंडल अधिकारियों को भेजी जाएगी। यह तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को भी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे अधिकारियों को मॉड्यूल के उपयोग और कार्रवाई के बारे में स्पष्ट मार्गदर्शन मिलेगा। इन दस्तावेज को विभागीय पोर्टल पर भी अपलोड किया जाएगा।
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अभी तक लोग प्राइम खसरों की रजिस्ट्री कराने के लिए 33 फुट चाैड़े मार्ग से सटे 3 से 5 एकड़ क्षेत्र को थोड़ा जोड़ते हुए आसपास के क्षेत्र को दिखाकर कम कलेक्टर रेट पर रजिस्ट्री करा लेते थे। इससे वह स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस कम चुकाते थे लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।