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Chandigarh-Haryana News: अदालतों में चल रहे पेंशन मामलों में लापरवाही पड़ेगी भारी, दोषी अधिकारियों की तय होगी जवाबदेही
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लंबित मामलों में वित्त विभाग व प्रधान महालेखाकार की ओर से संयुक्त जवाब महाधिवक्ता कार्यालय के माध्यम से दाखिल होगा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने पेंशन संबंधी मामलों में अदालतों में दाखिल किए जाने वाले जवाब और लिखित बयानों को लेकर सभी विभागों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि पेंशन मामलों में संयुक्त लिखित बयान समय पर दाखिल किए जाएं और किसी भी प्रकार की लापरवाही को प्रशासनिक जवाबदेही के दायरे में माना जाएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी अधिकारी या विभाग की लापरवाही के कारण राज्य को वित्तीय नुकसान होता है या अदालतों में प्रतिकूल कानूनी उदाहरण स्थापित होते हैं तो संबंधित अधिकारियों की प्रशासनिक जवाबदेही तय की जाएगी। वित्त विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करने के आदेश दिए हैं।
वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि इससे पहले 29 जनवरी 2018 को भी इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। इन निर्देशों के तहत अदालतों में चल रहे मामलों में वित्त विभाग और प्रधान महालेखाकार (ए एंड ई) हरियाणा की ओर से संयुक्त जवाब दाखिल करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया था। पत्र में बताया गया है कि प्रधान महालेखाकार हरियाणा ने 10 अप्रैल 2026 को भेजे गए एक पत्र में वित्त विभाग को अवगत कराया कि कई विभाग अभी भी इन निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। इसके कारण अदालतों में प्रतिकूल निर्णय आने, कार्यों की पुनरावृत्ति व राज्य सरकार पर अनावश्यक वित्तीय बोझ बढ़ने की स्थिति पैदा हो रही है।
वित्त विभाग के अनुसार राज्य सरकार के पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों की ओर से दायर अधिकांश याचिकाएं एसीपी लाभ, वेतनमान, चिकित्सा बिलों की प्रतिपूर्ति व अन्य प्रशासनिक मामलों से संबंधित होती हैं। ऐसे मामलों का सीधा संबंध संबंधित प्रशासनिक विभागों और पेंशन स्वीकृत करने वाली प्राधिकृत संस्थाओं से होता है जबकि प्रधान महालेखाकार कार्यालय केवल प्रतिवादी की भूमिका में होता है और इन मामलों में उसकी प्रत्यक्ष प्रशासनिक भूमिका नहीं होती। नए निर्देशों के अनुसार जिला और उच्च न्यायालयों में लंबित मामलों में वित्त विभाग व प्रधान महालेखाकार की ओर से संयुक्त जवाब महाधिवक्ता कार्यालय के माध्यम से दाखिल किया जाएगा। यदि किसी मामले में वित्त विभाग के नियमों, निर्देशों या सलाह को चुनौती दी गई है तो लिखित बयान पहले वित्त विभाग से अनुमोदित कराया जाएगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने पेंशन संबंधी मामलों में अदालतों में दाखिल किए जाने वाले जवाब और लिखित बयानों को लेकर सभी विभागों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि पेंशन मामलों में संयुक्त लिखित बयान समय पर दाखिल किए जाएं और किसी भी प्रकार की लापरवाही को प्रशासनिक जवाबदेही के दायरे में माना जाएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी अधिकारी या विभाग की लापरवाही के कारण राज्य को वित्तीय नुकसान होता है या अदालतों में प्रतिकूल कानूनी उदाहरण स्थापित होते हैं तो संबंधित अधिकारियों की प्रशासनिक जवाबदेही तय की जाएगी। वित्त विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करने के आदेश दिए हैं।
वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि इससे पहले 29 जनवरी 2018 को भी इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। इन निर्देशों के तहत अदालतों में चल रहे मामलों में वित्त विभाग और प्रधान महालेखाकार (ए एंड ई) हरियाणा की ओर से संयुक्त जवाब दाखिल करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया था। पत्र में बताया गया है कि प्रधान महालेखाकार हरियाणा ने 10 अप्रैल 2026 को भेजे गए एक पत्र में वित्त विभाग को अवगत कराया कि कई विभाग अभी भी इन निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। इसके कारण अदालतों में प्रतिकूल निर्णय आने, कार्यों की पुनरावृत्ति व राज्य सरकार पर अनावश्यक वित्तीय बोझ बढ़ने की स्थिति पैदा हो रही है।
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वित्त विभाग के अनुसार राज्य सरकार के पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों की ओर से दायर अधिकांश याचिकाएं एसीपी लाभ, वेतनमान, चिकित्सा बिलों की प्रतिपूर्ति व अन्य प्रशासनिक मामलों से संबंधित होती हैं। ऐसे मामलों का सीधा संबंध संबंधित प्रशासनिक विभागों और पेंशन स्वीकृत करने वाली प्राधिकृत संस्थाओं से होता है जबकि प्रधान महालेखाकार कार्यालय केवल प्रतिवादी की भूमिका में होता है और इन मामलों में उसकी प्रत्यक्ष प्रशासनिक भूमिका नहीं होती। नए निर्देशों के अनुसार जिला और उच्च न्यायालयों में लंबित मामलों में वित्त विभाग व प्रधान महालेखाकार की ओर से संयुक्त जवाब महाधिवक्ता कार्यालय के माध्यम से दाखिल किया जाएगा। यदि किसी मामले में वित्त विभाग के नियमों, निर्देशों या सलाह को चुनौती दी गई है तो लिखित बयान पहले वित्त विभाग से अनुमोदित कराया जाएगा।