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Chandigarh-Haryana News: एंटी रैगिंग की नई व्यवस्था, छात्रों के साथ अभिभावक भी लेंगे जिम्मेदारी
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- नए सत्र से पीजी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए विद्यार्थियों को ऑनलाइन अपलोड करना होाग एंटी रैगिंग शपथपत्र
- सुप्रीम कोर्ट और यूजीसी के सख्त निर्देशों के बाद हरियाणा में एंटी रैगिंग शपथपत्र अनिवार्य किया गया
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा के कॉलेजों में नए शैक्षणिक सत्र से रैगिंग के खिलाफ सख्ती की तैयारी की गई है। अब स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को एंटी रैगिंग शपथ पत्र देना अनिवार्य होगा। खास बात यह है कि इस बार केवल छात्र ही नहीं बल्कि अभिभावकों की जिम्मेदारी भी तय की गई है।
उच्चतर शिक्षा विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और यूजीसी के नियमों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि एंटी रैगिंग शपथ पत्र जमा किए बिना दाखिला प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जाएगी। शपथ पत्र में विद्यार्थी को यह घोषित करना होगा कि वह किसी भी प्रकार की रैगिंग में शामिल नहीं होगा, न उसे बढ़ावा देगा और न ही किसी साजिश का हिस्सा बनेगा। इसका उल्लंघन करने पर प्रवेश रद्द किए जाने तक की कार्रवाई हो सकती है।
रैगिंग केवल अनुशासनहीनता नहीं बल्कि नए विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और मानसिक सुरक्षा पर हमला है इसलिए अब इसे रोकने के लिए जवाबदेही का दायरा छात्र से बढ़ाकर परिवार तक किया गया है। इस प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए शिक्षा मंत्रालय के एंटी रैगिंग पोर्टल पर ऑनलाइन शपथ पत्र की व्यवस्था की गई है। विद्यार्थियों को पोर्टल पर फॉर्म भरकर उसे डाउनलोड करना होगा और अपने लॉगिन के माध्यम से प्रवेश पोर्टल पर अपलोड करना होगा। पहले अधिकांश संस्थानों में भाैतिक शपथ पत्र जमा कराए जाते थे।
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सभी के लिए परिवार पहचान पत्र अनिवार्य
छात्रों के लिए कॉलेजों में प्रवेश लेने के लिए परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) अनिवार्य रहेगा। पारिवारिक आय सत्यापित आय से ली जाएगी। किसी भी स्तर पर किसी भी विसंगति की स्थिति में, कॉलेज को मानदंडों, पात्रता और सीटों की उपलब्धता के अनुसार छात्र का अनंतिम प्रवेश रद्द करने या उसका स्ट्रीम, विषय बदलने का अधिकार होगा।
शुल्क ऑनलाइन ही भरना होगा
सरकारी कॉलेजों में सिर्फ ऑनलाइन शुल्क भुगतान होगा। यहां विद्यार्थियों से वार्षिक शुल्क केवल एक किश्त में ही लिया जाएगा। वहीं सहायता प्राप्त और स्ववित्तपोषित कॉलेजों के लिए शुल्क भुगतान का तरीका ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों होगा और विद्यार्थियों के पास किश्तों में शुल्क भुगतान करने का विकल्प होगा। विभिन्न पीजी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए पात्रता संबंद्ध विश्वविद्यालय के मानदंडों के अनुसार होगी और प्रधानाचार्यों को इसे सुनिश्चित करना होगा।
- सुप्रीम कोर्ट और यूजीसी के सख्त निर्देशों के बाद हरियाणा में एंटी रैगिंग शपथपत्र अनिवार्य किया गया
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा के कॉलेजों में नए शैक्षणिक सत्र से रैगिंग के खिलाफ सख्ती की तैयारी की गई है। अब स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को एंटी रैगिंग शपथ पत्र देना अनिवार्य होगा। खास बात यह है कि इस बार केवल छात्र ही नहीं बल्कि अभिभावकों की जिम्मेदारी भी तय की गई है।
उच्चतर शिक्षा विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और यूजीसी के नियमों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि एंटी रैगिंग शपथ पत्र जमा किए बिना दाखिला प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जाएगी। शपथ पत्र में विद्यार्थी को यह घोषित करना होगा कि वह किसी भी प्रकार की रैगिंग में शामिल नहीं होगा, न उसे बढ़ावा देगा और न ही किसी साजिश का हिस्सा बनेगा। इसका उल्लंघन करने पर प्रवेश रद्द किए जाने तक की कार्रवाई हो सकती है।
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रैगिंग केवल अनुशासनहीनता नहीं बल्कि नए विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और मानसिक सुरक्षा पर हमला है इसलिए अब इसे रोकने के लिए जवाबदेही का दायरा छात्र से बढ़ाकर परिवार तक किया गया है। इस प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए शिक्षा मंत्रालय के एंटी रैगिंग पोर्टल पर ऑनलाइन शपथ पत्र की व्यवस्था की गई है। विद्यार्थियों को पोर्टल पर फॉर्म भरकर उसे डाउनलोड करना होगा और अपने लॉगिन के माध्यम से प्रवेश पोर्टल पर अपलोड करना होगा। पहले अधिकांश संस्थानों में भाैतिक शपथ पत्र जमा कराए जाते थे।
सभी के लिए परिवार पहचान पत्र अनिवार्य
छात्रों के लिए कॉलेजों में प्रवेश लेने के लिए परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) अनिवार्य रहेगा। पारिवारिक आय सत्यापित आय से ली जाएगी। किसी भी स्तर पर किसी भी विसंगति की स्थिति में, कॉलेज को मानदंडों, पात्रता और सीटों की उपलब्धता के अनुसार छात्र का अनंतिम प्रवेश रद्द करने या उसका स्ट्रीम, विषय बदलने का अधिकार होगा।
शुल्क ऑनलाइन ही भरना होगा
सरकारी कॉलेजों में सिर्फ ऑनलाइन शुल्क भुगतान होगा। यहां विद्यार्थियों से वार्षिक शुल्क केवल एक किश्त में ही लिया जाएगा। वहीं सहायता प्राप्त और स्ववित्तपोषित कॉलेजों के लिए शुल्क भुगतान का तरीका ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों होगा और विद्यार्थियों के पास किश्तों में शुल्क भुगतान करने का विकल्प होगा। विभिन्न पीजी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए पात्रता संबंद्ध विश्वविद्यालय के मानदंडों के अनुसार होगी और प्रधानाचार्यों को इसे सुनिश्चित करना होगा।