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गुरुग्राम मेट्रो के लिए जमीन खरीद की नई नीति: निजी भूमि खरीद में मुआवजे से 25 फीसदी ज्यादा मिलेगी कीमत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 22 Jan 2026 12:59 PM IST
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सार
हरियाणा सरकार गुरुग्राम मानेसर कांप्लेक्स के लिए लगभग 200 किलोमीटर का एक जन परिवहन नेटवर्क तैयार किया है। इसे साल 2041 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। गुरुग्राम शहर में मिलेनियम सिटी सेंटर-साइबर सिटी मेट्रो कॉरिडोर 29.05 किलोमीटर की लंबाई में फैला हुआ है।
मेट्रो
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
हरियाणा सरकार ने गुरुग्राम में आगामी मेट्रो कॉरिडोर के लिए आपसी बातचीत के माध्यम से निजी भूमि/संपत्ति की सीधी खरीद के लिए एक नीति अधिसूचित की है।
यह नीति 29.05 किलोमीटर लंबे मिलेनियम सिटी सेंटर-साइबर सिटी मेट्रो कॉरिडोर के लिए आवश्यक भूमि पर लागू होती है। इसके तहत गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (जीएमआरएल) निजी जमीन मालिकों से बातचीत व आपसी सहमति के आधार पर खरीदेगी। वहीं, यदि कोई मालिक जमीन बेचने से इंकार करता है तो राज्य सरकार भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 के तहत जमीन को अधिग्रहण कर लेगी। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एके सिंह की ओर से इस नीति को अधिसूचित कर दिया गया है।
इस नीति के तहत जो जमीन मालिक आपसी बातचीत के जरिये अपनी जमीन बेचेगा, उसे 2013 के अधिनियम के तहत मिलने वाले मुआवजे से 25 फीसदी से ज्यादा राशि होगी। इसके अलावा भूमि पंजीकरण शुल्क में छूट दी जाएगी और पुनर्वास व पुनर्स्थापन का भी लाभ दिया जाएगा। जमीन खरीद का भुगतान सीधे बैंक खातों में किया जाएगा। जमीन खरीद की पूरी कीमत जीएमआरएल की ओर से दी जाएगी।
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार गुरुग्राम मानेसर कांप्लेक्स के लिए लगभग 200 किलोमीटर का एक जन परिवहन नेटवर्क तैयार किया है। इसे साल 2041 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। गुरुग्राम शहर में मिलेनियम सिटी सेंटर-साइबर सिटी मेट्रो कॉरिडोर 29.05 किलोमीटर की लंबाई में फैला हुआ है। इसका मार्ग इस प्रकार तय किया गया है कि इसका अधिकतर भाग सरकारी भूमि से होकर गुजरता है। मगर कुछ स्थानों पर यह पुल निजी भूमि से होकर गुजरता है जबकि कुछ जगहों पर यह संपत्तियों के बहुत करीब से गुजरता है, जिन्हें ध्वस्त करना या अधिग्रहित करना आवश्यक होगा।
वहीं, मेट्रो डिपो भी सरकारी भूमि में बनाने की योजना है। इसके बावजूद निजी भूमि के एक छोटे से हिस्से की आवश्यकता होगी। इसलिए राज्य सरकार ने 29.05 किलोमीटर जगह के लिए भूमि खरीद की नीति लाई है। इस मेट्रो कॉरिडोर का निर्माण गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (जीएमआरएल) की ओर से किया जा रहा है।
2. गुरुग्राम उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित कमेटी मुआवजे का निर्धारण और बातचीत की पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगी।
3. भूमि की खरीद से पहले कई विभागों की टीम संयुक्त निरीक्षण करेगी।
4. राजस्व दस्तावेजों से भूमि के कागजों की जांच की जाएगी।
5.भूमि बेचने के इच्छुक भूमि मालिकों की पहचान की जाएगी।
6. फिर अखबार में सूचना देकर आपत्तियों के लिए 30 दिन का समय दिया जाएगा
7. एक बार समझौता हो जाने के बाद, भूस्वामियों को लिखित रूप में यह वचन देना होगा कि वे भविष्य में किसी भी अदालत या कानूनी मंच में अधिक मुआवजे की मांग नहीं करेंगे।
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यह नीति 29.05 किलोमीटर लंबे मिलेनियम सिटी सेंटर-साइबर सिटी मेट्रो कॉरिडोर के लिए आवश्यक भूमि पर लागू होती है। इसके तहत गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (जीएमआरएल) निजी जमीन मालिकों से बातचीत व आपसी सहमति के आधार पर खरीदेगी। वहीं, यदि कोई मालिक जमीन बेचने से इंकार करता है तो राज्य सरकार भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 के तहत जमीन को अधिग्रहण कर लेगी। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एके सिंह की ओर से इस नीति को अधिसूचित कर दिया गया है।
इस नीति के तहत जो जमीन मालिक आपसी बातचीत के जरिये अपनी जमीन बेचेगा, उसे 2013 के अधिनियम के तहत मिलने वाले मुआवजे से 25 फीसदी से ज्यादा राशि होगी। इसके अलावा भूमि पंजीकरण शुल्क में छूट दी जाएगी और पुनर्वास व पुनर्स्थापन का भी लाभ दिया जाएगा। जमीन खरीद का भुगतान सीधे बैंक खातों में किया जाएगा। जमीन खरीद की पूरी कीमत जीएमआरएल की ओर से दी जाएगी।
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उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार गुरुग्राम मानेसर कांप्लेक्स के लिए लगभग 200 किलोमीटर का एक जन परिवहन नेटवर्क तैयार किया है। इसे साल 2041 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। गुरुग्राम शहर में मिलेनियम सिटी सेंटर-साइबर सिटी मेट्रो कॉरिडोर 29.05 किलोमीटर की लंबाई में फैला हुआ है। इसका मार्ग इस प्रकार तय किया गया है कि इसका अधिकतर भाग सरकारी भूमि से होकर गुजरता है। मगर कुछ स्थानों पर यह पुल निजी भूमि से होकर गुजरता है जबकि कुछ जगहों पर यह संपत्तियों के बहुत करीब से गुजरता है, जिन्हें ध्वस्त करना या अधिग्रहित करना आवश्यक होगा।
वहीं, मेट्रो डिपो भी सरकारी भूमि में बनाने की योजना है। इसके बावजूद निजी भूमि के एक छोटे से हिस्से की आवश्यकता होगी। इसलिए राज्य सरकार ने 29.05 किलोमीटर जगह के लिए भूमि खरीद की नीति लाई है। इस मेट्रो कॉरिडोर का निर्माण गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (जीएमआरएल) की ओर से किया जा रहा है।
सरकार इसलिए लाई यह नीति
हरियाणा सरकार के अधिकारियों ने बताया, केंद्र व राज्य सरकार मेट्रो परियोजना के लिए अत्यंत गंभीर है। यदि अधिनियम 2013 के तहत भूमि अधिग्रहण की जाती तो इसमें काफी लंबा समय लग सकता था। यह प्रक्रिया काफी धीमी है। इसमें कई अधिसूचनाएं, सामाजिक प्रभाव आकलन, सुनवाई, आपत्तियां और वैधानिक प्रतीक्षा अवधि अनिवार्य हैं। उसके बाद भी यदि मामला अदालत में चला जाए तो भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया वर्षों तक खिंच जाती है। इससे दोनों सरकारों का ड्रीम प्रोजेक्ट भी लटक सकता है। इन्हीं सब कारणों को देखते हुए राज्य सरकार ने निजी भूमि खरीद की नीति लेकर आई है। यह नीति अत्यंत महत्वपूर्ण मामलों में लागू की जाएगी। वहीं, यदि कोई व्यक्ति अपनी जमीन देने से मना करता है तो सरकार के पास 2013 के अधिनियम के तहत भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही शुरू करने का अधिकार सुरक्षित है। यदि एक बार भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू हो गई तो निजी जमीन मालिकों के पास कीमत तय करने का विकल्प नहीं बचेगा।इस तरह से यह नीति कार्य करेगी
1. सबसे पहले अधिग्रहण की जाने वाली भूमि की पहचान की जाएगी2. गुरुग्राम उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित कमेटी मुआवजे का निर्धारण और बातचीत की पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगी।
3. भूमि की खरीद से पहले कई विभागों की टीम संयुक्त निरीक्षण करेगी।
4. राजस्व दस्तावेजों से भूमि के कागजों की जांच की जाएगी।
5.भूमि बेचने के इच्छुक भूमि मालिकों की पहचान की जाएगी।
6. फिर अखबार में सूचना देकर आपत्तियों के लिए 30 दिन का समय दिया जाएगा
7. एक बार समझौता हो जाने के बाद, भूस्वामियों को लिखित रूप में यह वचन देना होगा कि वे भविष्य में किसी भी अदालत या कानूनी मंच में अधिक मुआवजे की मांग नहीं करेंगे।