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Chandigarh-Haryana News: तीन साल से अधिक हिरासत और ट्रायल में देरी, कोर्ट ने कहा अपराधी पैदा नहीं होते, बनाए जाते हैं
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- यूएपीए मामले में आरोपी को हाईकोर्ट ने दी जमानत अनुच्छेद 21 को बताया सर्वोपरि-हर संत का अतीत और हर पापी का भविष्य होता है: हाईकोर्ट
चंडीगढ़। गैर कानूनी गतिविधियां (यूएपीए) के एक मामले में फैसला सुनाते हुए पंजाब व चंडीगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि अपराधी पैदा नहीं होते, बनाए जाते हैं और किसी भी व्यक्ति को सुधार से परे नहीं माना जा सकता। आरोपी के तीन साल से अधिक समय से हिरासत में होने व ट्रायल में देरी को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट ने हरविंदर सिंह उर्फ प्रिंस को नियमित जमानत दे दी। याची पर आतंकी जीएस पुन्नु से कथित संपर्क के आरोप हैं।
खंडपीठ ने दो अप्रैल 2024 को ट्रायल कोर्ट की ओर से जमानत से इनकार करने के आदेश को रद्द कर दिया। जस्टिस अनुपेंद्र सिंह ग्रेवाल और जस्टिस दीपक मनचंदा की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि मानव में सुधार की अपार संभावनाएं होती हैं। हर संत का अतीत और हर पापी का भविष्य होता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान का अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है जिसमें त्वरित सुनवाई का अधिकार भी निहित है और यह अधिकार पवित्र है।
मामला 28 जुलाई 2022 को अंबाला के बलदेव नगर थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार आरोपी ने सह आरोपी के साथ मिलकर एक आपत्तिजनक बैनर लगाया था। हालांकि उसका नाम मूल एफआईआर में नहीं था बाद में पटियाला के एक अन्य मामले में सह आरोपी के खुलासे के आधार पर उसे नामजद किया गया। बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपित के पास से कोई हथियार, गोला-बारूद या अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई है और वर्तमान मामले के अलावा वह किसी अन्य आपराधिक प्रकरण में शामिल नहीं है। अदालत ने कहा कि लंबी पूर्व-ट्रायल हिरासत स्वयं में दंड का रूप नहीं ले सकती। पीठ ने कहा कि संवैधानिक न्यायालयों का दायित्व है कि वे विधि-राज और स्वतंत्रता के सिद्धांतों की रक्षा करें, ताकि ट्रायल की लंबी प्रक्रिया स्वयं सजा में न बदल जाए।
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चंडीगढ़। गैर कानूनी गतिविधियां (यूएपीए) के एक मामले में फैसला सुनाते हुए पंजाब व चंडीगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि अपराधी पैदा नहीं होते, बनाए जाते हैं और किसी भी व्यक्ति को सुधार से परे नहीं माना जा सकता। आरोपी के तीन साल से अधिक समय से हिरासत में होने व ट्रायल में देरी को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट ने हरविंदर सिंह उर्फ प्रिंस को नियमित जमानत दे दी। याची पर आतंकी जीएस पुन्नु से कथित संपर्क के आरोप हैं।
खंडपीठ ने दो अप्रैल 2024 को ट्रायल कोर्ट की ओर से जमानत से इनकार करने के आदेश को रद्द कर दिया। जस्टिस अनुपेंद्र सिंह ग्रेवाल और जस्टिस दीपक मनचंदा की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि मानव में सुधार की अपार संभावनाएं होती हैं। हर संत का अतीत और हर पापी का भविष्य होता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान का अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है जिसमें त्वरित सुनवाई का अधिकार भी निहित है और यह अधिकार पवित्र है।
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मामला 28 जुलाई 2022 को अंबाला के बलदेव नगर थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार आरोपी ने सह आरोपी के साथ मिलकर एक आपत्तिजनक बैनर लगाया था। हालांकि उसका नाम मूल एफआईआर में नहीं था बाद में पटियाला के एक अन्य मामले में सह आरोपी के खुलासे के आधार पर उसे नामजद किया गया। बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपित के पास से कोई हथियार, गोला-बारूद या अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई है और वर्तमान मामले के अलावा वह किसी अन्य आपराधिक प्रकरण में शामिल नहीं है। अदालत ने कहा कि लंबी पूर्व-ट्रायल हिरासत स्वयं में दंड का रूप नहीं ले सकती। पीठ ने कहा कि संवैधानिक न्यायालयों का दायित्व है कि वे विधि-राज और स्वतंत्रता के सिद्धांतों की रक्षा करें, ताकि ट्रायल की लंबी प्रक्रिया स्वयं सजा में न बदल जाए।