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एनसीएलटी व न्यायालय के आदेशों का पंजीकरण अनिवार्य : डॉ. मिश्रा

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आदेशों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी
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अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) और न्यायालयों के आदेशों का विधि अनुसार अनिवार्य रूप से पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए। इंडियन स्टांप एक्ट 1899 के प्रावधानों का सख्ती से पालन करें और बिना किसी छूट के सही स्टांप शुल्क का आकलन कर पंजीकरण किया जाए। वित्तायुक्त ने चेतावनी दी कि आदेशों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।


डॉ. मिश्रा ने मंडलायुक्तों और उपायुक्तों को निर्देश दिए कि मुख्य राजस्व अधिकारी, उप-पंजीयक और संयुक्त उप-पंजीयक 13 नवंबर 2013 के पूर्व निर्देशों व 22 नवंबर 2017 की अधिसूचना का पालन करें। उन्होंने बताया कि एनसीएलटी के आदेशों से जुड़े मामलों में स्टांप अधिनियम के तहत 1.5 फीसदी की दर से शुल्क देय है जिसकी अधिकतम सीमा 7.5 करोड़ रुपये निर्धारित है। गैर स्वैच्छिक न्यायालय आदेश भी इसी प्रावधान के तहत आते हैं।
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डॉ. मिश्रा ने यह भी पाया कि अचल संपत्ति से जुड़े मामलों में न्यायालयों के स्थगन आदेश राजस्व अभिलेखों में दर्ज नहीं किए जा रहे जो गंभीर चूक है। उन्होंने किसी भी न्यायालय से प्राप्त स्थगन आदेश को तुरंत जमाबंदी अभिलेख में दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

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