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Chandigarh-Haryana News: एससी-एसटी मामलों के लिए हर थाने में अलग जांच विंग, 60 दिनों में चार्जशीट

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सीएम सैनी ने दिए कई निर्देश, अनुसूचित जाति कल्याण में उत्कृष्ट कार्य करने वाली पंचायतों को अब 1 लाख रुपये अनुदान राशि मिलेगी


अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से जुड़े मामलों में तेजी और पारदर्शिता लाने के लिए कई अहम घोषणाएं की हैं। अब प्रदेश के हर थाने में अलग से जांच विंग स्थापित की जाएगी ताकि जांच कार्य प्रभावित न हो और मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित हो सके। साथ ही एससी-एसटी अत्याचार से जुड़े मामलों में 60 दिनों के भीतर न्यायालय में चार्जशीट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। अनुसूचित जाति कल्याण के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाली पंचायतों को मिलने वाली अनुदान राशि 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दी है।
मुख्यमंत्री चंडीगढ़ में आयोजित राज्यस्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे जिसमें अनुसूचित जाति अत्याचार अधिनियम 1989 और नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955 के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। बैठक में विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।सीएम सैनी ने कहा कि एससी-एसटी के विरुद्ध अत्याचार किसी भी स्तर पर सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने नए आपराधिक कानूनों के तहत भी 60 दिन में चार्जशीट पेश करने और ऐसे मामलों के लिए अलग से जांच अधिकारियों की नियुक्ति के निर्देश दिए। उन्होंने चेतावनी दी कि झूठी शिकायत दर्ज करवाने वालों पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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बैठक में उत्कृष्ट पंचायतों को प्रोत्साहन देने की योजना का भी विस्तार किया गया। उत्कृष्ट पंचायतों के चयन में एससी के खिलाफ अत्याचार की रोकथाम, एससी कंपोनेंट राशि का सही उपयोग, नशा विरोधी अभियान, पराली न जलाना और पेयजल समस्या का समाधान जैसे मानदंड शामिल किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2021 से प्रदेश में अनुसूचित जाति और महिलाओं के खिलाफ अपराधों में कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2025-26 में अत्याचार पीड़ित 796 लोगों को राहत और पुनर्वास के लिए 8.84 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। वहीं सामाजिक समरसता अंतरराज्यीय विवाह शगुन योजना के तहत चालू वित्त वर्ष में 1265 लाभार्थियों को 31.62 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद प्रदान की गई।

सीएम ने जिला और उपमंडल स्तर की बैठकों में प्रबुद्ध नागरिकों को शामिल करने और प्रत्येक जिले में साल में चार बार एससी एक्ट की समीक्षा बैठक आयोजित करने के भी निर्देश दिए।

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