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Charkhi Dadri News: साधारण जीवन, असाधारण मुकाम...सेल्फ स्टडी व मेहनत से यूपीएससी में कीर्तिमान
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sat, 07 Mar 2026 01:42 AM IST
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अपने परिजनों के साथ गांव हंसावास कलां निवासी सुनीता।
- फोटो : 1
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चरखी दादरी। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की ओर से घोषित सिविल सेवा परीक्षा परिणाम में जिले के तीन युवाओं ने शानदार प्रदर्शन कर नाम रोशन किया। अंशिका, यशवंत और सुनीता ने कड़ी मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के दम पर इस प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता हासिल की है।
मूलरूप से गांव चंदेनी और वर्तमान में नजफगढ़ निवासी 22 वर्षीय अंशिका सांगवान ने पहले ही प्रयास में 330वीं रैंक हासिल की। मूलरूप से गांव चरखी हाल निवासी भगवान परशुराम चौक के यशवंत सांगवान ने 391वीं रैंक प्राप्त की। गांव हंसावास कलां निवासी सुनीता ने चौथे प्रयास में 958वीं रैंक हासिल कर अपने परिवार और गांव का नाम रोशन किया है।
तीनों युवाओं की सफलता की खास बात यह है कि उन्होंने साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से निकलकर अपनी मेहनत के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। किसी के पिता खेतीबाड़ी करते हैं तो कोई पशुपालन कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं, फिर भी इन युवाओं ने कठिन परिस्थितियों के बीच लगातार मेहनत करते हुए अपने लक्ष्य को हासिल किया। संवाद
अंशिका ने पहले प्रयास में पाई 330वीं रैंक
मूलरूप से दादरी जिले के गांव चंदेनी निवासी 22 वर्षीय अंशिका सांगवान ने पहले ही प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा में 330वीं रैंक हासिल की है। अंशिका फिलहाल अपने परिवार के साथ नजफगढ़ में रहती हैं। अंशिका सांगवान ने अपनी स्कूली शिक्षा नजफगढ़ के निजी स्कूल से की। इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से 2024 में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। तब से सेल्फ स्टडी से अंशिका यूपीएससी की तैयारी कर रहीं थी। अंशिका के पिता डीटीसी में क्लर्क के पद से सेवानिवृत्त हैं। अंशिका ने युवाओं को अपने संदेश में कहा कि अपने लक्ष्य को निर्धारित कर उसे पाने को पूरी ताकत झोंक दें। निरंतर की गई मेहनत जरूर सफलता दिलाती है।
यशवंत ने पांचवें प्रयास में पाई 391वीं रैंक
मूलरूप से गांव चरखी व वर्तमान में दादरी निवासी 29 वर्षीय यशवंत सांगवान ने सिविल सेवा परीक्षा में 391वीं रैंक हासिल की है। यशवंत के पिता संजय सांगवान खेतीबाड़ी करते हैं। यशवंत ने स्कूली शिक्षा शहर के गीता निकेतन स्कूल से पूरी की। इसके बाद वह फरीदाबाद चले गए और वहीं से 12वीं की परीक्षा पास की। इसके बाद उन्होंने स्नातक की पढ़ाई दिल्ली यूनिवर्सिटी के भगत सिंह कॉलेज से की और सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में जुट गए। पांचवें प्रयास में उन्हें यह सफलता मिली है। पिता संजय सांगवान ने कहा कि यशवंत परीक्षा पास करने के लिए दृढ़ संकल्प लेकर पढ़ाई कर रहा था, आखिरकार बेटे को सफलता मिली है।
सरकारी स्कूल, कॉलेज में पढ़ सुनीता ने उत्तीर्ण की परीक्षा
गांव हंसावास कलां निवासी 28 वर्षीय सुनीता ने 958 रैंक के साथ चौथे प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की है। छोटे से गांव में बेहद साधारण परिवार में जन्मी सुनीता के पिता गुणपाल पशुपालन करते हैं। सुनीता ने बाढड़ा के राजकीय स्कूल से बारहवीं की परीक्षा पास की, इसके बाद सुनीता बीएससी स्नातक की पढ़ाई के लिए महेंद्रगढ़ के राजकीय महाविद्यालय में पहुंची। इसके बाद सुनीता ने एमएससी वनस्पति-शास्त्र विषय में स्नातकोत्तर की पढ़ाई नारनौल के राजकीय महाविद्यालय से पूरी की। सुनीता ने अन्य युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि निरंतर मेहनत से हर चुनौती को पार किया जा सकता है। सुनीता के बड़े भाई विशाल ने कहा कि सुनीता बचपन से पढ़ाई में अव्वल रही है, उन्हें विश्वास था कि वह बड़े स्तर पर माता-पिता, गांव व प्रदेश का नाम रोशन करेगी।
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मूलरूप से गांव चंदेनी और वर्तमान में नजफगढ़ निवासी 22 वर्षीय अंशिका सांगवान ने पहले ही प्रयास में 330वीं रैंक हासिल की। मूलरूप से गांव चरखी हाल निवासी भगवान परशुराम चौक के यशवंत सांगवान ने 391वीं रैंक प्राप्त की। गांव हंसावास कलां निवासी सुनीता ने चौथे प्रयास में 958वीं रैंक हासिल कर अपने परिवार और गांव का नाम रोशन किया है।
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तीनों युवाओं की सफलता की खास बात यह है कि उन्होंने साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से निकलकर अपनी मेहनत के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। किसी के पिता खेतीबाड़ी करते हैं तो कोई पशुपालन कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं, फिर भी इन युवाओं ने कठिन परिस्थितियों के बीच लगातार मेहनत करते हुए अपने लक्ष्य को हासिल किया। संवाद
अंशिका ने पहले प्रयास में पाई 330वीं रैंक
मूलरूप से दादरी जिले के गांव चंदेनी निवासी 22 वर्षीय अंशिका सांगवान ने पहले ही प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा में 330वीं रैंक हासिल की है। अंशिका फिलहाल अपने परिवार के साथ नजफगढ़ में रहती हैं। अंशिका सांगवान ने अपनी स्कूली शिक्षा नजफगढ़ के निजी स्कूल से की। इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से 2024 में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। तब से सेल्फ स्टडी से अंशिका यूपीएससी की तैयारी कर रहीं थी। अंशिका के पिता डीटीसी में क्लर्क के पद से सेवानिवृत्त हैं। अंशिका ने युवाओं को अपने संदेश में कहा कि अपने लक्ष्य को निर्धारित कर उसे पाने को पूरी ताकत झोंक दें। निरंतर की गई मेहनत जरूर सफलता दिलाती है।
यशवंत ने पांचवें प्रयास में पाई 391वीं रैंक
मूलरूप से गांव चरखी व वर्तमान में दादरी निवासी 29 वर्षीय यशवंत सांगवान ने सिविल सेवा परीक्षा में 391वीं रैंक हासिल की है। यशवंत के पिता संजय सांगवान खेतीबाड़ी करते हैं। यशवंत ने स्कूली शिक्षा शहर के गीता निकेतन स्कूल से पूरी की। इसके बाद वह फरीदाबाद चले गए और वहीं से 12वीं की परीक्षा पास की। इसके बाद उन्होंने स्नातक की पढ़ाई दिल्ली यूनिवर्सिटी के भगत सिंह कॉलेज से की और सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में जुट गए। पांचवें प्रयास में उन्हें यह सफलता मिली है। पिता संजय सांगवान ने कहा कि यशवंत परीक्षा पास करने के लिए दृढ़ संकल्प लेकर पढ़ाई कर रहा था, आखिरकार बेटे को सफलता मिली है।
सरकारी स्कूल, कॉलेज में पढ़ सुनीता ने उत्तीर्ण की परीक्षा
गांव हंसावास कलां निवासी 28 वर्षीय सुनीता ने 958 रैंक के साथ चौथे प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की है। छोटे से गांव में बेहद साधारण परिवार में जन्मी सुनीता के पिता गुणपाल पशुपालन करते हैं। सुनीता ने बाढड़ा के राजकीय स्कूल से बारहवीं की परीक्षा पास की, इसके बाद सुनीता बीएससी स्नातक की पढ़ाई के लिए महेंद्रगढ़ के राजकीय महाविद्यालय में पहुंची। इसके बाद सुनीता ने एमएससी वनस्पति-शास्त्र विषय में स्नातकोत्तर की पढ़ाई नारनौल के राजकीय महाविद्यालय से पूरी की। सुनीता ने अन्य युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि निरंतर मेहनत से हर चुनौती को पार किया जा सकता है। सुनीता के बड़े भाई विशाल ने कहा कि सुनीता बचपन से पढ़ाई में अव्वल रही है, उन्हें विश्वास था कि वह बड़े स्तर पर माता-पिता, गांव व प्रदेश का नाम रोशन करेगी।

अपने परिजनों के साथ गांव हंसावास कलां निवासी सुनीता। - फोटो : 1

अपने परिजनों के साथ गांव हंसावास कलां निवासी सुनीता। - फोटो : 1