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Charkhi Dadri News: मकर संक्रांति पर्व नजदीक आते ही लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही घेवर की सुगंध
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sun, 11 Jan 2026 02:03 AM IST
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चरखी दादरी। मकर संक्रांति पर्व को लेकर जिले के बाजारों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। बाजारों में मिठाई की दुकानों पर घेवर तैयार करने के साथ-साथ बिक्री भी शुरू हो गई है। हलवाईयों की दुकानों पर दिनभर कारीगर घेवर बनाते हुए नजर आ रहे हैं। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि फिलहाल बाजार में प्रतिदिन एक क्विंटल से अधिक घेवर की बिक्री हो रही है। वहीं त्योहार नजदीक आने पर बिक्री का आंकड़ा 10 क्विंटल तक पहुंच जाएगा।
14 जनवरी को मनाए जाने वाले मकर संक्रांति पर्व से करीब एक सप्ताह पहले ही हलवाईयों की दुकानों में घेवर की सुगंध अनायास ही लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। इस दौरान बाजारों में घेवर की अच्छी-खासी बिक्री होती है। इस पर्व पर मायका पक्ष अपनी बेटी के ससुराल में सम्मान के तौर पर घेवर के साथ-साथ अन्य सामान पहुंचाते हैं। ताकि दोनों परिवारों में मिठास के संबंध बने रहे। दुकानदारों ने बताया कि घेवर की बिक्री एक सप्ताह तक होती हैं। 11, 12 व 13 जनवरी को घेवर की बिक्री काफी बढ़ जाती है। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि घेवर का कारोबार साल में दो बार ही परवान चढ़ता है। इस पर्व पर अधिकतर लोग अपनी बेटियों के घर सिंधारा नामक परंपरा के मुताबिक घेवर, रेवड़ी व मूंगफली पहुंचाते हैं।
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-आजकल घेवर बनाने वाले कारीगर भी नहीं मिल पाते हैं। दुकान में बिक्री के लिए घेवर बनवाने के लिए बचे हुए कारीगरों ने अपना मेहनताना भी दोगुना किया हुआ हैं। घेवर का कारोबार करीब एक सप्ताह ही चलता है। वहीं सावन माह में पूरा महीना घेवर की अच्छी बिक्री होती हैं।
- जोगेंद्र सैनी, घेवर विक्रेता।
-- सकरात पर्व पर अक्सर ग्रामीण महिलाएं घर के बुजुर्गों को जगाने की परंपरा को निभाती हैं। इस दिन महिलाएं समूह बनाकर गीत गाते हुए घर पहुंचती हैं। यहां वो अपने परिवार के बुजुर्ग को घेवर खिलाने के साथ गर्म वस्त्र भेंट कर आशीर्वाद लेती हैं। इस पर्व के दिन घेवर की बिक्री अन्य दिनों की अपेक्षा चार गुना बढ़ जाती हैं।
-- सौरभ, घेवर विक्रेता।
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14 जनवरी को मनाए जाने वाले मकर संक्रांति पर्व से करीब एक सप्ताह पहले ही हलवाईयों की दुकानों में घेवर की सुगंध अनायास ही लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। इस दौरान बाजारों में घेवर की अच्छी-खासी बिक्री होती है। इस पर्व पर मायका पक्ष अपनी बेटी के ससुराल में सम्मान के तौर पर घेवर के साथ-साथ अन्य सामान पहुंचाते हैं। ताकि दोनों परिवारों में मिठास के संबंध बने रहे। दुकानदारों ने बताया कि घेवर की बिक्री एक सप्ताह तक होती हैं। 11, 12 व 13 जनवरी को घेवर की बिक्री काफी बढ़ जाती है। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि घेवर का कारोबार साल में दो बार ही परवान चढ़ता है। इस पर्व पर अधिकतर लोग अपनी बेटियों के घर सिंधारा नामक परंपरा के मुताबिक घेवर, रेवड़ी व मूंगफली पहुंचाते हैं।
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-आजकल घेवर बनाने वाले कारीगर भी नहीं मिल पाते हैं। दुकान में बिक्री के लिए घेवर बनवाने के लिए बचे हुए कारीगरों ने अपना मेहनताना भी दोगुना किया हुआ हैं। घेवर का कारोबार करीब एक सप्ताह ही चलता है। वहीं सावन माह में पूरा महीना घेवर की अच्छी बिक्री होती हैं।
- जोगेंद्र सैनी, घेवर विक्रेता।