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Charkhi Dadri News: गटक रहे बीमारी... दादरी, बाढड़ा व झोझू कलां में पेयजल का हर तीसरा सैंपल फेल
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दादरी की चंपापुरी कॉलोनी स्थित वाटर टेस्टिंग लैब।
- फोटो : 1
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चरखी दादरी। जिले में घर-घर पहुंच रहा पेयजल अब लोगों की प्यास बुझाने के बजाय उनकी सेहत के लिए खतरे की घंटी बनता जा रहा है। ताजा जांच रिपोर्ट के अनुसार जिले में लिया गया प्रत्येक तीसरा पानी का सैंपल बैक्टीरियोलॉजिकल टेस्ट में फेल पाया गया है। यह स्थिति न केवल जन स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि आमजन के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता भी पैदा करती है।
नियमों के अनुसार शहर के प्रत्येक वार्ड से हर माह कम से कम तीन पेयजल सैंपल लेना अनिवार्य है, ताकि समय रहते दूषित पानी की पहचान कर सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें। दिसंबर माह में लिए गए सैंपलों की रिपोर्ट विभागीय दावों की पोल खोलती नजर आई। दादरी फेज-1 क्षेत्र में 142 सैंपल लिए गए, जिनमें से 52 सैंपल जांच में फेल पाए गए।
इसी प्रकार दादरी फेज-2 में 121 में से 38, बाढड़ा में 74 में से 26 और झोझू कलां ब्लॉक में 63 में से 18 सैंपल फेल मिले।
विशेषज्ञों के अनुसार पानी में पाए जाने वाले रोगजनक बैक्टीरिया मुख्य रूप से गंदे सीवर पानी के पेयजल लाइनों में रिसाव, जर्जर पाइपलाइन, कम दबाव में जलापूर्ति और टंकियों की समय पर सफाई न होने से पनपते हैं। कई इलाकों में 30 से 40 साल पुरानी पेयजल लाइनें अब पूरी तरह से कमजोर हो चुकी हैं जिससे दूषित पानी के मिश्रण की आशंका और बढ़ जाती है।
रिपोर्ट आने के बावजूद प्रभावित वार्डों में लंबे समय तक वही दूषित पानी सप्लाई होता रहता है।
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नियमों के अनुसार शहर के प्रत्येक वार्ड से हर माह कम से कम तीन पेयजल सैंपल लेना अनिवार्य है, ताकि समय रहते दूषित पानी की पहचान कर सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें। दिसंबर माह में लिए गए सैंपलों की रिपोर्ट विभागीय दावों की पोल खोलती नजर आई। दादरी फेज-1 क्षेत्र में 142 सैंपल लिए गए, जिनमें से 52 सैंपल जांच में फेल पाए गए।
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इसी प्रकार दादरी फेज-2 में 121 में से 38, बाढड़ा में 74 में से 26 और झोझू कलां ब्लॉक में 63 में से 18 सैंपल फेल मिले।
विशेषज्ञों के अनुसार पानी में पाए जाने वाले रोगजनक बैक्टीरिया मुख्य रूप से गंदे सीवर पानी के पेयजल लाइनों में रिसाव, जर्जर पाइपलाइन, कम दबाव में जलापूर्ति और टंकियों की समय पर सफाई न होने से पनपते हैं। कई इलाकों में 30 से 40 साल पुरानी पेयजल लाइनें अब पूरी तरह से कमजोर हो चुकी हैं जिससे दूषित पानी के मिश्रण की आशंका और बढ़ जाती है।
रिपोर्ट आने के बावजूद प्रभावित वार्डों में लंबे समय तक वही दूषित पानी सप्लाई होता रहता है।