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Charkhi Dadri News: निदेशक के आदेश भी बेअसर, एंबुलेंस पार्किंग पर निजी वाहनों का कब्जा
Sat, 11 Jul 2026 10:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sat, 11 Jul 2026 10:54 PM IST
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एंबुलेंस पार्किंग में खड़े किए गए निजी वाहन।
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चरखी दादरी। स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के सरकारी दावों के बीच, शहर का मातृ-शिशु अस्पताल इन दिनों अव्यवस्थाओं का गढ़ बना हुआ है। अस्पताल परिसर में विशेष रूप से एंबुलेंस के लिए निर्धारित पार्किंग क्षेत्र पर निजी वाहन चालकों ने अवैध कब्जा जमा रखा है। हैरानी की बात यह है कि उच्चस्तरीय निरीक्षण और स्पष्ट निर्देशों के बावजूद भी यह समस्या जस की तस बनी हुई है जिससे आपातकालीन स्थिति में मरीजों के लिए भारी परेशानियों का सबब बन सकता है।
करीब एक महीने पहले स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डॉ. वीरेंद्र यादव ने जिले के सभी स्वास्थ्य व उप स्वास्थ्य केंद्रों का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने सरदार झाड़ू सिंह चौक के समीप स्थित मातृ-शिशु अस्पताल का बारीकी से निरीक्षण किया था। अस्पताल परिसर में व्यवस्थाओं की बदहाली और एंबुलेंस पार्किंग क्षेत्र में निजी वाहनों की भरमार देखकर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई थी। उस समय उन्होंने अस्पताल प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पार्किंग क्षेत्र को तुरंत खाली कराया जाए ताकि एंबुलेंस की आवाजाही में कोई बाधा न आए। निदेशक के आदेशों के बाद उम्मीद जगी थी कि प्रशासन हरकत में आएगा और पार्किंग को मुक्त करा लिया जाएगा। हालांकि एक महीने का लंबा समय बीत जाने के बावजूद, धरातल पर स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।
आपातकालीन सेवा के लिए खतरा
जिले के मातृ शिशु अस्पताल में विशेषकर गर्भवती महिलाओं व जच्चा-बच्चा के लिए स्पेशल वार्ड बनाए गए हैं। अस्पताल में बने डिलीवरी वार्ड में महिलाओं को पहुंचाने के लिए एंबुलेंस का आवागमन लगातार जारी रहता है लेकिन परिसर में एंबुलेंस के लिए बनी पार्किंग में निजी वाहनों को पार्क करना सुरक्षा और स्वास्थ्य प्रोटोकॉल के लिहाज से अनिवार्य है। जब भी किसी गंभीर मरीज को अस्पताल लाया जाता है या रेफर किया जाता है तो एंबुलेंस को पार्किंग तक पहुंचने और वहां से निकलने के लिए सुगम मार्ग की आवश्यकता होती है।
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कार-मोटरसाइकिल का जमावड़ा
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार तो एंबुलेंस चालकों को पार्किंग के लिए जगह नहीं मिलती जिसके कारण उन्हें अस्पताल के गेट पर या संकरी सड़क पर गाड़ी रोकनी पड़ती है। ऐसे में मरीज को अस्पताल तक पहुंचाने में काफी समय बर्बाद होता है जो कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में घातक सिद्ध हो सकता है।
प्रशासन की उदासीनता पर सवाल
स्थानीय लोगों और मरीजों के तीमारदारों का कहना है कि अस्पताल के गेट पर तैनात सुरक्षा कर्मियों और प्रशासन की अनदेखी के चलते निजी वाहन चालक बेखौफ होकर अपनी गाड़ियां पार्किंग में खड़ी कर देते हैं। मरीजों का कहना है कि वे कई बार इस बारे में अस्पताल प्रबंधन को सूचित कर चुके हैं लेकिन हर बार उन्हें आश्वासन देकर टाल दिया जाता है।
क्या कहते हैं नियम
सरकारी अस्पताल के परिसरों में सार्वजनिक वाहनों या निजी वाहनों के लिए पार्किंग के सख्त नियम होते हैं। एंबुलेंस क्षेत्र में अनधिकृत वाहनों का खड़ा होना न केवल सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग है बल्कि यह आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा डालने जैसा कार्य है। निदेशक के निर्देशों की अवहेलना करना अस्पताल प्रबंधन की प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।
हर रोज पहुंच रही सैकड़ों महिलाएं
मातृ-शिशु अस्पताल जिले का एक प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है जहां रोजाना सैकड़ों की संख्या में महिलाएं और नवजात शिशुओं के इलाज के लिए मरीज आते हैं। वहीं गंभीर मरीजों को एंबुलेंस की सहायता से अस्पताल पहुंचाया जाता है। ऐसे में एंबुलेंस के लिए जगह न मिलने की स्थिति में किसी बड़ी दुर्घटना या उपचार में देरी से होने वाली किसी अनहोनी को रोका जाना असंभव है।
वर्सन:
हमने स्थानीय गार्ड को एंबुलेंस पार्किंग में अन्य किसी प्रकार के वाहनों को पार्क करवाने के लिए मना किया गया है। सोमवार को इस जगह पर अन्य वाहनों की पार्किंग को बंद करवा केवल एंबुलेंस को पार्क करवाया जाएगा। - डॉ. राहुल अरोड़ा, डिप्टी सीएमओ एवं प्रवक्ता स्वास्थ्य विभाग
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करीब एक महीने पहले स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डॉ. वीरेंद्र यादव ने जिले के सभी स्वास्थ्य व उप स्वास्थ्य केंद्रों का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने सरदार झाड़ू सिंह चौक के समीप स्थित मातृ-शिशु अस्पताल का बारीकी से निरीक्षण किया था। अस्पताल परिसर में व्यवस्थाओं की बदहाली और एंबुलेंस पार्किंग क्षेत्र में निजी वाहनों की भरमार देखकर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई थी। उस समय उन्होंने अस्पताल प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पार्किंग क्षेत्र को तुरंत खाली कराया जाए ताकि एंबुलेंस की आवाजाही में कोई बाधा न आए। निदेशक के आदेशों के बाद उम्मीद जगी थी कि प्रशासन हरकत में आएगा और पार्किंग को मुक्त करा लिया जाएगा। हालांकि एक महीने का लंबा समय बीत जाने के बावजूद, धरातल पर स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।
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आपातकालीन सेवा के लिए खतरा
जिले के मातृ शिशु अस्पताल में विशेषकर गर्भवती महिलाओं व जच्चा-बच्चा के लिए स्पेशल वार्ड बनाए गए हैं। अस्पताल में बने डिलीवरी वार्ड में महिलाओं को पहुंचाने के लिए एंबुलेंस का आवागमन लगातार जारी रहता है लेकिन परिसर में एंबुलेंस के लिए बनी पार्किंग में निजी वाहनों को पार्क करना सुरक्षा और स्वास्थ्य प्रोटोकॉल के लिहाज से अनिवार्य है। जब भी किसी गंभीर मरीज को अस्पताल लाया जाता है या रेफर किया जाता है तो एंबुलेंस को पार्किंग तक पहुंचने और वहां से निकलने के लिए सुगम मार्ग की आवश्यकता होती है।
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कार-मोटरसाइकिल का जमावड़ा
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार तो एंबुलेंस चालकों को पार्किंग के लिए जगह नहीं मिलती जिसके कारण उन्हें अस्पताल के गेट पर या संकरी सड़क पर गाड़ी रोकनी पड़ती है। ऐसे में मरीज को अस्पताल तक पहुंचाने में काफी समय बर्बाद होता है जो कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में घातक सिद्ध हो सकता है।
प्रशासन की उदासीनता पर सवाल
स्थानीय लोगों और मरीजों के तीमारदारों का कहना है कि अस्पताल के गेट पर तैनात सुरक्षा कर्मियों और प्रशासन की अनदेखी के चलते निजी वाहन चालक बेखौफ होकर अपनी गाड़ियां पार्किंग में खड़ी कर देते हैं। मरीजों का कहना है कि वे कई बार इस बारे में अस्पताल प्रबंधन को सूचित कर चुके हैं लेकिन हर बार उन्हें आश्वासन देकर टाल दिया जाता है।
क्या कहते हैं नियम
सरकारी अस्पताल के परिसरों में सार्वजनिक वाहनों या निजी वाहनों के लिए पार्किंग के सख्त नियम होते हैं। एंबुलेंस क्षेत्र में अनधिकृत वाहनों का खड़ा होना न केवल सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग है बल्कि यह आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा डालने जैसा कार्य है। निदेशक के निर्देशों की अवहेलना करना अस्पताल प्रबंधन की प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।
हर रोज पहुंच रही सैकड़ों महिलाएं
मातृ-शिशु अस्पताल जिले का एक प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है जहां रोजाना सैकड़ों की संख्या में महिलाएं और नवजात शिशुओं के इलाज के लिए मरीज आते हैं। वहीं गंभीर मरीजों को एंबुलेंस की सहायता से अस्पताल पहुंचाया जाता है। ऐसे में एंबुलेंस के लिए जगह न मिलने की स्थिति में किसी बड़ी दुर्घटना या उपचार में देरी से होने वाली किसी अनहोनी को रोका जाना असंभव है।
वर्सन:
हमने स्थानीय गार्ड को एंबुलेंस पार्किंग में अन्य किसी प्रकार के वाहनों को पार्क करवाने के लिए मना किया गया है। सोमवार को इस जगह पर अन्य वाहनों की पार्किंग को बंद करवा केवल एंबुलेंस को पार्क करवाया जाएगा। - डॉ. राहुल अरोड़ा, डिप्टी सीएमओ एवं प्रवक्ता स्वास्थ्य विभाग

एंबुलेंस पार्किंग में खड़े किए गए निजी वाहन।