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Charkhi Dadri News: नियमों को ताक पर रख स्कूलों बच्चों को ऑटो में बैठा रहे चालक, हादसों की बनी रहती है संभावना
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चालक सीट के साथ स्कूली बच्चे को बैठा कर गुजरता ऑटो चालक।
- फोटो : 1
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चरखी दादरी। शहर स्थित स्कूलों में पढ़ने वाले छोटे बच्चों के लिए लगाई गई ऑटो व ई-रिक्शा चालक नियमों को ताक पर रख धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं। चालक ऑटो को भरने के लिए बच्चों को चालक सीट के दोनों तरफ व पिछली सीट पर बैठाने से भी नहीं हिचक रहे हैं। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा होने की संभावना बनी रहती है। पुलिस प्रशासन व परिवहन विभाग भी इस प्रकार नियमों की अवहेलना करने वाले वाहनों पर कार्रवाई करने से बचते नजर आते हैं।
बच्चों की छुट्टी होने के साथ ही स्कूलों के सामने ऑटो व ई-रिक्शा चालकों का जमावड़ा लगना शुरू हो जाता है। हालात ऐसे बन जाते हैं कि चालक नियमों को ताक पर रख छोटे बच्चों को ऑटो में बैठाना शुरू कर देते हैं। जगह सीमित होने के कारण चालक अपनी सीट के दोनों तरफ भी बच्चों को बैठा लेते है। ऐसे में शहर की जर्जर सड़कें कभी भी बड़े हादसे को निमंत्रण दे सकती हैं। वहीं शहर के चौक-चौराहों पर तैनात पुलिस कर्मचारी भी ऐसे गंभीर मामलों पर कार्रवाई करने की अपेक्षा चुप्पी साधे देखते रहते हैं।
ऑटो चालकों ने किसी भी स्कूल से बच्चों को बैठाने के लिए अनुमति पत्र नहीं लिया गया है। वहीं अभिभावक भी देखादेखी के चलते अपने बच्चों को ऐसे ऑटो चालकों के हाथ सौंप देते है जिनके पास स्कूली बच्चों को बैठाने के दस्तावेज तक नहीं होते।
गिरने से बचाने के लिए नहीं है इंतजाम
शहर में 20 से अधिक निजी स्कूल हैं। इन स्कूलों में हजारों की संख्या में विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने के लिए पहुंचते हैं। इनमें अधिकतर अभिभावकों ने बच्चों को घर से स्कूल तक पहुंचाने व लाने के लिए ऑटो रिक्शा लगाई गई है लेकिन चालकों ने अपने वाहन में बच्चों की सुरक्षा के लिए कोई भी उपकरण नहीं लगवाया है। ऑटो चालकों की लापरवाही कभी भी बड़े हादसे का रूप ले सकती है।
वर्सन :
जल्दी ही स्कूली बच्चों को बैठाने वाले ऑटो चालकों के दस्तावेजों की जांच करने का अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान नियमों की अवहेलना मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।- निरीक्षक रमेश कुमार, प्रभारी, जिला यातायात पुलिस थाना दादरी।
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बच्चों की छुट्टी होने के साथ ही स्कूलों के सामने ऑटो व ई-रिक्शा चालकों का जमावड़ा लगना शुरू हो जाता है। हालात ऐसे बन जाते हैं कि चालक नियमों को ताक पर रख छोटे बच्चों को ऑटो में बैठाना शुरू कर देते हैं। जगह सीमित होने के कारण चालक अपनी सीट के दोनों तरफ भी बच्चों को बैठा लेते है। ऐसे में शहर की जर्जर सड़कें कभी भी बड़े हादसे को निमंत्रण दे सकती हैं। वहीं शहर के चौक-चौराहों पर तैनात पुलिस कर्मचारी भी ऐसे गंभीर मामलों पर कार्रवाई करने की अपेक्षा चुप्पी साधे देखते रहते हैं।
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ऑटो चालकों ने किसी भी स्कूल से बच्चों को बैठाने के लिए अनुमति पत्र नहीं लिया गया है। वहीं अभिभावक भी देखादेखी के चलते अपने बच्चों को ऐसे ऑटो चालकों के हाथ सौंप देते है जिनके पास स्कूली बच्चों को बैठाने के दस्तावेज तक नहीं होते।
गिरने से बचाने के लिए नहीं है इंतजाम
शहर में 20 से अधिक निजी स्कूल हैं। इन स्कूलों में हजारों की संख्या में विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने के लिए पहुंचते हैं। इनमें अधिकतर अभिभावकों ने बच्चों को घर से स्कूल तक पहुंचाने व लाने के लिए ऑटो रिक्शा लगाई गई है लेकिन चालकों ने अपने वाहन में बच्चों की सुरक्षा के लिए कोई भी उपकरण नहीं लगवाया है। ऑटो चालकों की लापरवाही कभी भी बड़े हादसे का रूप ले सकती है।
वर्सन :
जल्दी ही स्कूली बच्चों को बैठाने वाले ऑटो चालकों के दस्तावेजों की जांच करने का अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान नियमों की अवहेलना मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।- निरीक्षक रमेश कुमार, प्रभारी, जिला यातायात पुलिस थाना दादरी।
