{"_id":"69ed1b001380012f3b08ca0c","slug":"effective-treatment-of-malaria-is-possible-through-ayurveda-dr-bhupendra-charkhi-dadri-news-c-126-1-shsr1012-154373-2026-04-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"आयुर्वेद में मलेरिया का कारगर उपचार संभव : डॉ. भूपेंद्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आयुर्वेद में मलेरिया का कारगर उपचार संभव : डॉ. भूपेंद्र
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sun, 26 Apr 2026 01:20 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
कादमा। विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर शनिवार को आयुष्मान आरोग्य मंदिर जेवली के आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. भूपेंद्र चांदवास ने लोगों को मलेरिया से बचाव एवं उपचार के बारे में जागरूक किया।
डॉ. चांदवास ने बताया कि आयुर्वेद में मलेरिया को विषम ज्वर कहा जाता है जो कई प्रकार का होता है। इसके प्रमुख लक्षणों में बार-बार तेज बुखार, कंपकंपी, सांस लेने में परेशानी, सिर दर्द, बेचैनी, ठंड लगना, थकान, पेट दर्द, उल्टी-दस्त एवं मिचली आना शामिल हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे लक्षण पाए जाने पर मरीज को आराम करना चाहिए। शरीर को हाइड्रेटेड रखना जरूरी है। नारियल पानी पीना, हल्का व सुपाच्य भोजन जैसे खिचड़ी और दलिया का सेवन लाभदायक रहता है। सेब, पपीता, अंगूर, खीरा व तरबूज का सीमित मात्रा में सेवन किया जा सकता है।
डॉ. चांदवास ने सलाह दी कि मलेरिया रोग में आम, अनार, लीची, ठंडे पेय पदार्थ, मिर्च-मसालेदार व भारी भोजन से परहेज करना चाहिए। उन्होंने बताया कि सुबह-शाम एक-एक चम्मच शहद के साथ तुलसी के पत्तों और अदरक के रस का सेवन लाभकारी होता है। उन्होंने कहा कि चिरायता, गिलोय, दालचीनी, पीपली चूर्ण, हल्दी, हरड़ एवं सप्तपर्ण जैसी शास्त्रोक्त आयुर्वेदिक औषधियां भी मलेरिया के उपचार में कारगर हैं।
Trending Videos
डॉ. चांदवास ने बताया कि आयुर्वेद में मलेरिया को विषम ज्वर कहा जाता है जो कई प्रकार का होता है। इसके प्रमुख लक्षणों में बार-बार तेज बुखार, कंपकंपी, सांस लेने में परेशानी, सिर दर्द, बेचैनी, ठंड लगना, थकान, पेट दर्द, उल्टी-दस्त एवं मिचली आना शामिल हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे लक्षण पाए जाने पर मरीज को आराम करना चाहिए। शरीर को हाइड्रेटेड रखना जरूरी है। नारियल पानी पीना, हल्का व सुपाच्य भोजन जैसे खिचड़ी और दलिया का सेवन लाभदायक रहता है। सेब, पपीता, अंगूर, खीरा व तरबूज का सीमित मात्रा में सेवन किया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
डॉ. चांदवास ने सलाह दी कि मलेरिया रोग में आम, अनार, लीची, ठंडे पेय पदार्थ, मिर्च-मसालेदार व भारी भोजन से परहेज करना चाहिए। उन्होंने बताया कि सुबह-शाम एक-एक चम्मच शहद के साथ तुलसी के पत्तों और अदरक के रस का सेवन लाभकारी होता है। उन्होंने कहा कि चिरायता, गिलोय, दालचीनी, पीपली चूर्ण, हल्दी, हरड़ एवं सप्तपर्ण जैसी शास्त्रोक्त आयुर्वेदिक औषधियां भी मलेरिया के उपचार में कारगर हैं।
