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Charkhi Dadri News: नॉर्वे में बेरला के दृष्टिबाधित खिलाड़ी गौरव श्योराण ने जीता स्वर्ण व रजत पदक
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Thu, 26 Mar 2026 12:25 AM IST
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नाॅर्वे में आयोजित स्कीइंग में अपनी प्रतिभा दिखाते खिलाड़ी गौरव श्योराण।
- फोटो : 1
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चरखी दादरी। नॉर्वे में आयोजित विश्वस्तरीय शीतकालीन खेल प्रतियोगिता रिडररेनेट में दादरी के गांव बेरला निवासी 16 वर्षीय दृष्टिबाधित खिलाड़ी गौरव श्योराण ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत का नाम रोशन किया है। गौरव ने 5 किलोमीटर क्रॉस-कंट्री स्कीइंग में स्वर्ण पदक और स्की-शूटिंग (बायथलॉन) में रजत पदक जीतकर बड़ी उपलब्धि हासिल की।
गौरव ने पांच साल पहले दिल्ली से अपने गांव आते हुए रास्ते में सड़क दुर्घटना में अपनी आंखें गंवा दी थी। इससे पहले भी गौरव शतरंज जैसे खेलों में अपनी प्रतिभा दिखा चुका है। गौरव फिलहाल नॉर्वे में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं।
रिडररेनेट दुनिया की प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में शामिल है जहां दृष्टिबाधित और दिव्यांग खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं। इस मंच पर सफलता हासिल करना किसी बड़े चैलेंज से कम नहीं होता क्योंकि यहां मुकाबला केवल अन्य खिलाड़ियों से नहीं, बल्कि खुद की सीमाओं से भी होता है। ऐसे में गौरव की उपलब्धि और भी खास बन जाती है। क्रॉस-कंट्री स्कीइंग स्पर्धा बेहद कठिन मानी जाती है। बर्फ से ढके लंबे और ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर संतुलन बनाए रखते हुए तेज गति से आगे बढ़ना पड़ता है। ऐसे में गौरव का स्वर्ण पदक जीतना उनकी कड़ी मेहनत, नियमित अभ्यास का परिणाम है। उन्होंने पूरे मुकाबले में शानदार लय बनाए रखी और अंत तक बढ़त कायम रखी। वहीं, बायथलॉन स्पर्धा में चुनौती और बढ़ जाती है। इसमें खिलाड़ियों को स्कीइंग के तीन लैप पूरे करने के साथ-साथ बीच-बीच में रुककर सटीक निशानेबाजी करनी होती है। दृष्टिबाधित खिलाड़ियों के लिए यह कार्य और अधिक जटिल हो जाता है, लेकिन गौरव ने बेहतरीन संयम और एकाग्रता का परिचय देते हुए रजत पदक अपने नाम किया।
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गौरव ने पांच साल पहले दिल्ली से अपने गांव आते हुए रास्ते में सड़क दुर्घटना में अपनी आंखें गंवा दी थी। इससे पहले भी गौरव शतरंज जैसे खेलों में अपनी प्रतिभा दिखा चुका है। गौरव फिलहाल नॉर्वे में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं।
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रिडररेनेट दुनिया की प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में शामिल है जहां दृष्टिबाधित और दिव्यांग खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं। इस मंच पर सफलता हासिल करना किसी बड़े चैलेंज से कम नहीं होता क्योंकि यहां मुकाबला केवल अन्य खिलाड़ियों से नहीं, बल्कि खुद की सीमाओं से भी होता है। ऐसे में गौरव की उपलब्धि और भी खास बन जाती है। क्रॉस-कंट्री स्कीइंग स्पर्धा बेहद कठिन मानी जाती है। बर्फ से ढके लंबे और ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर संतुलन बनाए रखते हुए तेज गति से आगे बढ़ना पड़ता है। ऐसे में गौरव का स्वर्ण पदक जीतना उनकी कड़ी मेहनत, नियमित अभ्यास का परिणाम है। उन्होंने पूरे मुकाबले में शानदार लय बनाए रखी और अंत तक बढ़त कायम रखी। वहीं, बायथलॉन स्पर्धा में चुनौती और बढ़ जाती है। इसमें खिलाड़ियों को स्कीइंग के तीन लैप पूरे करने के साथ-साथ बीच-बीच में रुककर सटीक निशानेबाजी करनी होती है। दृष्टिबाधित खिलाड़ियों के लिए यह कार्य और अधिक जटिल हो जाता है, लेकिन गौरव ने बेहतरीन संयम और एकाग्रता का परिचय देते हुए रजत पदक अपने नाम किया।