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Charkhi Dadri News: कॉमर्शियल गैस की कमी, इंडक्शन चूल्हों पर चल रही होटल-रेस्टोरेंट की रसोई
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sun, 15 Mar 2026 12:07 AM IST
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बाजार में इंडक्शन की खरीदारी करते हुए ग्राहक।
- फोटो : 1
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चरखी दादरी। युद्ध का असर अब स्थानीय बाजारों तक पहुंच गया है। अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच जारी तनाव से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति शृंखला प्रभावित होने से जिले में पिछले करीब एक सप्ताह से कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की आपूर्ति पूरी तरह से ठप है। इस संकट के कारण होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों के सामने जहां रोजी-रोटी का संकट आने को है। वहीं इस प्रकार के प्रतिष्ठानों में कामकाज के तरीकों में भी बदलाव आ रहा है। कॉमर्शियल सिलिंडर की आपूर्ति न होने से अब दुकानदार मजबूरन इंडक्शन चूल्हों की तरफ रुख कर रहे हैं जिससे बाजार में बिजली से चलने वाले इन उपकरणों की मांग और कीमतों में उछाल आने लगा है।
जिले में कॉमर्शियल सिलिंडरों की आपूर्ति बंद होने से होटल और खाद्य पदार्थ विक्रेताओं का कामकाज ठप होने की कगार पर पहुंच गया है। कई संचालकों के पास मौजूद एलपीजी का पुराना स्टॉक खत्म हो चुका है जिसके कारण चाय-नाश्ते से लेकर भोजन तक तैयार करना मुश्किल हो गया है। इस स्थिति से निपटने के लिए व्यापारियों ने अब वैकल्पिक तकनीक के तौर पर इंडक्शन चूल्हों को अपनाना शुरू कर दिया है।
बाजार में इंडक्शन चूल्हों की मांग इतनी बढ़ गई है कि दुकानदारों के पास मौजूद स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है। स्थानीय विक्रेताओं का कहना है कि जहां पहले महीने भर में इक्का-दुक्का चूल्हे बिकते थे, वहीं अब एक-एक दुकान पर रोजाना तीन से चार चूल्हों की बिक्री हो रही है। यदि आपूर्ति की स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो आने वाले दिनों में यह समस्या और भी गंभीर रूप धारण कर सकती है।
वहीं आपूर्ति कम और मांग अधिक होने से इंडक्शन चूल्हों की कीमतों में 25 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। विक्रेताओं के अनुसार जो चूल्हा 10 दिन पहले तक 1800 रुपये में उपलब्ध था, उसकी कीमत अब बढ़कर 2300 रुपये तक पहुंच गई है। थोक विक्रेताओं के पास भी माल की भारी कमी बनी हुई है जिससे खुदरा विक्रेताओं को भी स्टॉक जुटाने में पसीने छूट रहे हैं।
क्या कहते हैं दुकानदार...
= कॉमर्शियल सिलिंडरों की आपूर्ति बंद होने के बाद इंडक्शन चूल्हों की भारी मांग बनी हुई है। अधिकतर खाद्य पदार्थ विक्रेता ही इसकी खरीदारी कर रहे हैं। मांग इतनी अधिक है कि होलसेल विक्रेताओं के पास भी माल खत्म हो गया है। फिलहाल पूरे बाजार में शायद ही किसी एकाध दुकानदार के पास स्टॉक बचा होगा।- विष्णु कुमार, चूल्हा विक्रेता।
= बाजार में इंडक्शन चूल्हों की अचानक बढ़ी मांग के कारण कीमतों में भारी उछाल आया है। 10 दिन पहले तक चूल्हे की कीमत 1800 रुपये थी, जो अब बढ़कर 2300 रुपये तक पहुंच गई है। पहले जहां महीने में एक-दो चूल्हे बिकते थे, अब प्रतिदिन इतनी ही संख्या में बिक्री हो रही है।
-- संजय जैन, स्थानीय दुकानदार।
= पिछले दो दिनों से हमारे पास कॉमर्शियल सिलिंडर खत्म हैं और निकट भविष्य में आपूर्ति मिलने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही। दुकानदारी प्रभावित न हो। इसके लिए मजबूरी में इंडक्शन चूल्हा खरीदना पड़ा है ताकि कारोबार को किसी तरह चालू रखा जा सके।- संजय कुमार, खाद्य पदार्थ विक्रेता।
पिछले करीब एक सप्ताह से कॉमर्शियल सिलिंडर की आपूर्ति नहीं हुई है जिससे चाय और समोसे की दुकान चलाना मुश्किल हो गया है। काम बंद होने की कगार पर पहुंच गया था, इसलिए अब काम को सुचारू रखने के लिए इलेक्ट्रिक चूल्हा खरीदना ही एकमात्र विकल्प बचा है।- अनिल कुमार, खाद्य पदार्थ विक्रेता।
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जिले में कॉमर्शियल सिलिंडरों की आपूर्ति बंद होने से होटल और खाद्य पदार्थ विक्रेताओं का कामकाज ठप होने की कगार पर पहुंच गया है। कई संचालकों के पास मौजूद एलपीजी का पुराना स्टॉक खत्म हो चुका है जिसके कारण चाय-नाश्ते से लेकर भोजन तक तैयार करना मुश्किल हो गया है। इस स्थिति से निपटने के लिए व्यापारियों ने अब वैकल्पिक तकनीक के तौर पर इंडक्शन चूल्हों को अपनाना शुरू कर दिया है।
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बाजार में इंडक्शन चूल्हों की मांग इतनी बढ़ गई है कि दुकानदारों के पास मौजूद स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है। स्थानीय विक्रेताओं का कहना है कि जहां पहले महीने भर में इक्का-दुक्का चूल्हे बिकते थे, वहीं अब एक-एक दुकान पर रोजाना तीन से चार चूल्हों की बिक्री हो रही है। यदि आपूर्ति की स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो आने वाले दिनों में यह समस्या और भी गंभीर रूप धारण कर सकती है।
वहीं आपूर्ति कम और मांग अधिक होने से इंडक्शन चूल्हों की कीमतों में 25 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। विक्रेताओं के अनुसार जो चूल्हा 10 दिन पहले तक 1800 रुपये में उपलब्ध था, उसकी कीमत अब बढ़कर 2300 रुपये तक पहुंच गई है। थोक विक्रेताओं के पास भी माल की भारी कमी बनी हुई है जिससे खुदरा विक्रेताओं को भी स्टॉक जुटाने में पसीने छूट रहे हैं।
क्या कहते हैं दुकानदार...
= कॉमर्शियल सिलिंडरों की आपूर्ति बंद होने के बाद इंडक्शन चूल्हों की भारी मांग बनी हुई है। अधिकतर खाद्य पदार्थ विक्रेता ही इसकी खरीदारी कर रहे हैं। मांग इतनी अधिक है कि होलसेल विक्रेताओं के पास भी माल खत्म हो गया है। फिलहाल पूरे बाजार में शायद ही किसी एकाध दुकानदार के पास स्टॉक बचा होगा।- विष्णु कुमार, चूल्हा विक्रेता।
= बाजार में इंडक्शन चूल्हों की अचानक बढ़ी मांग के कारण कीमतों में भारी उछाल आया है। 10 दिन पहले तक चूल्हे की कीमत 1800 रुपये थी, जो अब बढ़कर 2300 रुपये तक पहुंच गई है। पहले जहां महीने में एक-दो चूल्हे बिकते थे, अब प्रतिदिन इतनी ही संख्या में बिक्री हो रही है।
= पिछले दो दिनों से हमारे पास कॉमर्शियल सिलिंडर खत्म हैं और निकट भविष्य में आपूर्ति मिलने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही। दुकानदारी प्रभावित न हो। इसके लिए मजबूरी में इंडक्शन चूल्हा खरीदना पड़ा है ताकि कारोबार को किसी तरह चालू रखा जा सके।- संजय कुमार, खाद्य पदार्थ विक्रेता।
पिछले करीब एक सप्ताह से कॉमर्शियल सिलिंडर की आपूर्ति नहीं हुई है जिससे चाय और समोसे की दुकान चलाना मुश्किल हो गया है। काम बंद होने की कगार पर पहुंच गया था, इसलिए अब काम को सुचारू रखने के लिए इलेक्ट्रिक चूल्हा खरीदना ही एकमात्र विकल्प बचा है।- अनिल कुमार, खाद्य पदार्थ विक्रेता।