{"_id":"6a2c52b232d004b09c07ea44","slug":"the-aspirations-of-the-youth-and-the-problems-of-the-village-charkhi-dadri-news-c-126-1-cdr1010-156475-2026-06-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Charkhi Dadri News: युवाओं की उम्मीदें और गांव की समस्याएं, दोनों इंतजार में","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Charkhi Dadri News: युवाओं की उम्मीदें और गांव की समस्याएं, दोनों इंतजार में
विज्ञापन
स्वामी वाला कुंआ, जो दो साल से बंद हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
चरखी दादरी। जिले के ऐतिहासिक एवं बड़े गांवों में शुमार बेरला आज भी कई मूलभूत समस्याओं से जूझ रहा है। गांव के युवाओं के लिए बनाई गई व्यायामशाला केवल कागजों तक सीमित होकर रह गई है जबकि पेयजल, स्वास्थ्य, परिवहन और बाजार की सुविधाओं को लेकर भी ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार मांग उठाने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा जिससे उन्हें रोजमर्रा की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
गांव में युवाओं को खेलों और सेना भर्ती की तैयारियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खेल मैदान व व्यायामशाला का निर्माण किया गया था लेकिन धरातल पर स्थिति विपरीत है। व्यायामशाला परिसर में केवल चहारदीवारी, फुटपाथ और घास दिखाई दे रही है। आधुनिक जिम उपकरण अब तक स्थापित नहीं किए गए हैं। यहां तक कि शौचालय भी चालू स्थिति में नहीं हैं। पंचायत को जिम का सामान मिलने के बावजूद उसे शुरू नहीं किया गया है। ऐसे में युवा खुले मैदानों और निजी संसाधनों के सहारे तैयारी करने को मजबूर हैं।
मैदान को बना दिया जाता है मंडी
ग्रामीणों ने बताया कि गांव के अनेक युवा सेना और पुलिस भर्ती की तैयारी करते हैं लेकिन उनके लिए समुचित खेल मैदान तक उपलब्ध नहीं है। जिस मैदान में खिलाड़ी अभ्यास करते हैं उसे अक्सर अस्थायी फसल खरीद केंद्र बना दिया जाता है। इससे खिलाड़ियों का नियमित अभ्यास प्रभावित होता है और उन्हें दूसरे स्थानों का रुख करना पड़ता है।
विज्ञापन
स्वास्थ्य सुविधाओं का टोटा
स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करें तो गांव में आज तक सरकारी अस्पताल की सुविधा उपलब्ध नहीं है। मामूली सी बीमारी होने पर भी ग्रामीणों को बाढड़ा या चरखी दादरी जाना पड़ता है। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है। वहीं सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था भी ग्रामीणों की चिंता का विषय बनी हुई है। बसों की संख्या कम होने से अधिकांश लोग निजी वाहनों पर निर्भर हैं।
कुआं दो साल से बंद
पेयजल संकट भी गांव की बड़ी समस्याओं में शामिल है। ग्रामीणों के अनुसार गांव का ऐतिहासिक स्वामी वाला कुआं पिछले दो वर्षों से बंद पड़ा है। कुएं पर मोटर, बोर और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं होने के बावजूद बिजली बिल जमा न होने से इसका संचालन बंद है। इससे गांव के एक बड़े हिस्से को पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कुएं की भूमि पर कुछ लोगों ने कब्जे भी किए गए हैं जिससे समस्या और बढ़ गई है। पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
बाजार में नहीं सुविधाएं
इसके अलावा गांव के बाजार क्षेत्र में फोरलेन सड़क के किनारे मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। सफाई व्यवस्था कमजोर है और कई स्थानों पर गंदगी के ढेर दिखाई देते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बाजार क्षेत्र में नियमित सफाई, नालों की देखरेख और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।
-- -- -- -- --
गांव के युवाओं में खेलों और सेना भर्ती को लेकर जबरदस्त उत्साह है लेकिन सुविधाओं का अभाव उनकी मेहनत पर पानी फेर रहा है। व्यायामशाला का निर्माण होने के बावजूद उसका लाभ खिलाड़ियों को नहीं मिल पा रहा। यदि आधुनिक उपकरण और खेल सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं तो गांव के खिलाड़ी प्रदेश और देश स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।- राजेश श्योराण
व्यायामशाला में केवल चहारदीवारी और शेड खड़े हैं जबकि जिम उपकरण अब तक स्थापित नहीं किए गए। शौचालय भी उपयोग योग्य नहीं हैं। युवाओं को बेहतर माहौल देने के लिए खेल मैदान और व्यायामशाला को जल्द शुरू किया जाना चाहिए। इससे युवा नशे से दूर रहेंगे और अपनी ऊर्जा सकारात्मक दिशा में लगा सकेंगे। - राजेश मान
स्वामी वाला कुआं गांव की पुरानी धरोहर है लेकिन पिछले करीब दो वर्षों से बंद पड़ा है। मोटर, बोर और अन्य व्यवस्थाएं होने के बावजूद इसका संचालन नहीं हो रहा। प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप कर इसे चालू करवाना चाहिए ताकि लोगों और पशुओं को राहत मिल सके।- पवन स्वामी
गांव में सरकारी अस्पताल नहीं होने से छोटी बीमारी में भी लोगों को बाढड़ा या दादरी जाना पड़ता है। प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं गांव स्तर पर उपलब्ध करवाई जानी चाहिए ताकि लोगों को उपचार के लिए दूर-दराज के शहरों में न जाना पड़े।- रणबीर सिंह
गांव के युवाओं के लिए खेल मैदान बेहद जरूरी है लेकिन कई बार उसी मैदान को अस्थायी फसल खरीद केंद्र बना दिया जाता है। सेना और पुलिस भर्ती की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए अलग से स्थायी खेल मैदान विकसित किया जाना चाहिए। मौजूद खेल मैदान की हालत भी बेहतर हो। - अनुज जांगड़ा
परिवहन और सफाई व्यवस्था दोनों ही गांव की बड़ी समस्याएं हैं। बसों की कमी के कारण लोगों को निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता है। वहीं बाजार क्षेत्र में सफाई और मूलभूत सुविधाओं का अभाव दिखाई देता है। प्रशासन को इन मुद्दों पर गंभीरता से काम कर ग्रामीणों को राहत देनी चाहिए। - मांगेराम
गांव में युवाओं को खेलों और सेना भर्ती की तैयारियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खेल मैदान व व्यायामशाला का निर्माण किया गया था लेकिन धरातल पर स्थिति विपरीत है। व्यायामशाला परिसर में केवल चहारदीवारी, फुटपाथ और घास दिखाई दे रही है। आधुनिक जिम उपकरण अब तक स्थापित नहीं किए गए हैं। यहां तक कि शौचालय भी चालू स्थिति में नहीं हैं। पंचायत को जिम का सामान मिलने के बावजूद उसे शुरू नहीं किया गया है। ऐसे में युवा खुले मैदानों और निजी संसाधनों के सहारे तैयारी करने को मजबूर हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
मैदान को बना दिया जाता है मंडी
ग्रामीणों ने बताया कि गांव के अनेक युवा सेना और पुलिस भर्ती की तैयारी करते हैं लेकिन उनके लिए समुचित खेल मैदान तक उपलब्ध नहीं है। जिस मैदान में खिलाड़ी अभ्यास करते हैं उसे अक्सर अस्थायी फसल खरीद केंद्र बना दिया जाता है। इससे खिलाड़ियों का नियमित अभ्यास प्रभावित होता है और उन्हें दूसरे स्थानों का रुख करना पड़ता है।
स्वास्थ्य सुविधाओं का टोटा
स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करें तो गांव में आज तक सरकारी अस्पताल की सुविधा उपलब्ध नहीं है। मामूली सी बीमारी होने पर भी ग्रामीणों को बाढड़ा या चरखी दादरी जाना पड़ता है। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है। वहीं सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था भी ग्रामीणों की चिंता का विषय बनी हुई है। बसों की संख्या कम होने से अधिकांश लोग निजी वाहनों पर निर्भर हैं।
कुआं दो साल से बंद
पेयजल संकट भी गांव की बड़ी समस्याओं में शामिल है। ग्रामीणों के अनुसार गांव का ऐतिहासिक स्वामी वाला कुआं पिछले दो वर्षों से बंद पड़ा है। कुएं पर मोटर, बोर और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं होने के बावजूद बिजली बिल जमा न होने से इसका संचालन बंद है। इससे गांव के एक बड़े हिस्से को पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कुएं की भूमि पर कुछ लोगों ने कब्जे भी किए गए हैं जिससे समस्या और बढ़ गई है। पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
बाजार में नहीं सुविधाएं
इसके अलावा गांव के बाजार क्षेत्र में फोरलेन सड़क के किनारे मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। सफाई व्यवस्था कमजोर है और कई स्थानों पर गंदगी के ढेर दिखाई देते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बाजार क्षेत्र में नियमित सफाई, नालों की देखरेख और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।
गांव के युवाओं में खेलों और सेना भर्ती को लेकर जबरदस्त उत्साह है लेकिन सुविधाओं का अभाव उनकी मेहनत पर पानी फेर रहा है। व्यायामशाला का निर्माण होने के बावजूद उसका लाभ खिलाड़ियों को नहीं मिल पा रहा। यदि आधुनिक उपकरण और खेल सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं तो गांव के खिलाड़ी प्रदेश और देश स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।- राजेश श्योराण
व्यायामशाला में केवल चहारदीवारी और शेड खड़े हैं जबकि जिम उपकरण अब तक स्थापित नहीं किए गए। शौचालय भी उपयोग योग्य नहीं हैं। युवाओं को बेहतर माहौल देने के लिए खेल मैदान और व्यायामशाला को जल्द शुरू किया जाना चाहिए। इससे युवा नशे से दूर रहेंगे और अपनी ऊर्जा सकारात्मक दिशा में लगा सकेंगे। - राजेश मान
स्वामी वाला कुआं गांव की पुरानी धरोहर है लेकिन पिछले करीब दो वर्षों से बंद पड़ा है। मोटर, बोर और अन्य व्यवस्थाएं होने के बावजूद इसका संचालन नहीं हो रहा। प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप कर इसे चालू करवाना चाहिए ताकि लोगों और पशुओं को राहत मिल सके।- पवन स्वामी
गांव में सरकारी अस्पताल नहीं होने से छोटी बीमारी में भी लोगों को बाढड़ा या दादरी जाना पड़ता है। प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं गांव स्तर पर उपलब्ध करवाई जानी चाहिए ताकि लोगों को उपचार के लिए दूर-दराज के शहरों में न जाना पड़े।- रणबीर सिंह
गांव के युवाओं के लिए खेल मैदान बेहद जरूरी है लेकिन कई बार उसी मैदान को अस्थायी फसल खरीद केंद्र बना दिया जाता है। सेना और पुलिस भर्ती की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए अलग से स्थायी खेल मैदान विकसित किया जाना चाहिए। मौजूद खेल मैदान की हालत भी बेहतर हो। - अनुज जांगड़ा
परिवहन और सफाई व्यवस्था दोनों ही गांव की बड़ी समस्याएं हैं। बसों की कमी के कारण लोगों को निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता है। वहीं बाजार क्षेत्र में सफाई और मूलभूत सुविधाओं का अभाव दिखाई देता है। प्रशासन को इन मुद्दों पर गंभीरता से काम कर ग्रामीणों को राहत देनी चाहिए। - मांगेराम