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Charkhi Dadri News: बदहाली की मार झेल रहे शहर के मिनी पार्क
Mon, 29 Jun 2026 01:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 29 Jun 2026 01:04 AM IST
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चरखी दादरी। शहर को हरा-भरा और सुंदर बनाने के उद्देश्य से बनाए गए मिनी पार्क आज बदहाली की मार झेल रहे हैं। देखभाल के अभाव और नगर परिषद की उदासीनता के कारण शहर के प्रमुख पार्क अपनी पहचान खोते जा रहे हैं। एक समय जो पार्क लोगों के लिए सुकून और बच्चों के खेलकूद का केंद्र हुआ करते थे, आज वहां हरियाली की जगह बंजर धरती और टूटे-फूटे उपकरण हादसों को न्योता दे रहे हैं।
गौरतलब है कि शहर के बच्चों व बुजुर्गों को दूर-दराज स्थित रोज गार्डन तक नहीं पहुंचने के कारण नगर के वाल्मीकि कॉलोनी व कबीर नगर के पास भगवान वाल्मीकि पार्क का निर्माण करवाया गया था। वहीं शंकर कॉलोनी, ढाणी रोड, पुराना झज्जर रोड आदि क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सैर आदि करने के लिए तिकोना पार्क बनवाया गया था। इसके अलावा रेलवे रोड, पुराना बस स्टैंड क्षेत्र के लिए सरस्वती पार्क तो मंगल मार्केट, काठ मंडी के लिए मंगल पार्क बनवाया गया था।
नगर परिषद की ओर से तीनों पार्कों में ओपन जिम बनवाई गई है लेकिन पिछले लंबे समय से नगर परिषद की अनदेखी के चलते शहर में बनाए गए मिनी पार्कों की हालात दयनीय बनी हुई है। स्थानीय लोगों ने नगर परिषद के अधिकारियों से इन पार्कों की सुध लेने की गुहार लगाई है ताकि संबंधित क्षेत्र के लोग सुबह व सायं यहां सैर आदि कर सके।
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दृश्य 1: भगवान वाल्मीकि पार्क
इस पार्क में लोगों के स्वास्थ्य के लिए लगाए गए ओपन जिम के उपकरण टूट रहे हैं। जंग लगे और क्षतिग्रस्त उपकरण न केवल उपयोग के लायक नहीं हैं बल्कि ये किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। वहीं पार्क में हरियाली घास की जगह बंजर जमीन नजर आ रही है। इस कारण यहां शायद ही कोई सैर आदि करने के लिए आता हो।
दृश्य 2: तिकोना पार्क
देखभाल न होने के कारण यहां हरियाली गायब है और पूरे पार्क में खरपतवार (जंगली घास) उग आई है। रखरखाव के अभाव में यह पार्क अब एक वीरान जगह जैसा नजर आता है। पार्क में शाम ढलने के साथ ही शराबियों का मुख्य केंद्र बन जाता है। वहीं पार्क की देखरेख नहीं होने के कारण अपनी सुंदरता खोता जा रहा है।
दृश्य 3: सरस्वती पार्क
बच्चों के मनोरंजन के लिए लगाए गए झूले अब जर्जर हो चुके हैं। इनमें से एक टूटा हुआ झूला हर समय छोटे बच्चों के लिए हादसों का सबब बना हुआ है। यहां किसी भी अनहोनी की आशंका के बावजूद प्रशासन की ओर से इन्हें ठीक कराने की कोई सुध नहीं ली जा रही है। पार्क में टूटी पड़ी ट्रैक और खुला छोड़ा गया नल नगर परिषद की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा रहा है।
दृश्य 4 : मंगल पार्क
पार्क की सुंदरता बनाए रखने के लिए लगाए गए स्टूल टूट कर बिखर चुके हैं। जगह-जगह टूटे झूले और फैली गंदगी पार्क की पूरी सुंदरता पर ग्रहण लगा रहे हैं। पार्क में शाम के समय अक्सर बुजुर्ग सैर करने और बच्चे खेलने आते हैं। लेकिन पार्क के हालात देखकर अभिभावक अपने बच्चों को पार्क में भेजने से डरते हैं क्योंकि टूटे हुए झूले और जर्जर उपकरण किसी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।
शहर के सभी मिनी पार्कों में ओपन जिम लगवाए गए हैं, वहीं पार्कों की देखभाल के लिए भी कर्मचारी लगाए गए हैं। जल्दी ही सभी मिनी पार्कों के लिए विशेष बजट का प्रावधान करवाया जाएगा ताकि पार्कों में टूटे पड़े झूलों व उपकरणों को ठीक करवाया जा सके।
- बख्शी राम सैनी, चेयरमैन, नगर परिषद।
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गौरतलब है कि शहर के बच्चों व बुजुर्गों को दूर-दराज स्थित रोज गार्डन तक नहीं पहुंचने के कारण नगर के वाल्मीकि कॉलोनी व कबीर नगर के पास भगवान वाल्मीकि पार्क का निर्माण करवाया गया था। वहीं शंकर कॉलोनी, ढाणी रोड, पुराना झज्जर रोड आदि क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सैर आदि करने के लिए तिकोना पार्क बनवाया गया था। इसके अलावा रेलवे रोड, पुराना बस स्टैंड क्षेत्र के लिए सरस्वती पार्क तो मंगल मार्केट, काठ मंडी के लिए मंगल पार्क बनवाया गया था।
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नगर परिषद की ओर से तीनों पार्कों में ओपन जिम बनवाई गई है लेकिन पिछले लंबे समय से नगर परिषद की अनदेखी के चलते शहर में बनाए गए मिनी पार्कों की हालात दयनीय बनी हुई है। स्थानीय लोगों ने नगर परिषद के अधिकारियों से इन पार्कों की सुध लेने की गुहार लगाई है ताकि संबंधित क्षेत्र के लोग सुबह व सायं यहां सैर आदि कर सके।
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दृश्य 1: भगवान वाल्मीकि पार्क
इस पार्क में लोगों के स्वास्थ्य के लिए लगाए गए ओपन जिम के उपकरण टूट रहे हैं। जंग लगे और क्षतिग्रस्त उपकरण न केवल उपयोग के लायक नहीं हैं बल्कि ये किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। वहीं पार्क में हरियाली घास की जगह बंजर जमीन नजर आ रही है। इस कारण यहां शायद ही कोई सैर आदि करने के लिए आता हो।
दृश्य 2: तिकोना पार्क
देखभाल न होने के कारण यहां हरियाली गायब है और पूरे पार्क में खरपतवार (जंगली घास) उग आई है। रखरखाव के अभाव में यह पार्क अब एक वीरान जगह जैसा नजर आता है। पार्क में शाम ढलने के साथ ही शराबियों का मुख्य केंद्र बन जाता है। वहीं पार्क की देखरेख नहीं होने के कारण अपनी सुंदरता खोता जा रहा है।
दृश्य 3: सरस्वती पार्क
बच्चों के मनोरंजन के लिए लगाए गए झूले अब जर्जर हो चुके हैं। इनमें से एक टूटा हुआ झूला हर समय छोटे बच्चों के लिए हादसों का सबब बना हुआ है। यहां किसी भी अनहोनी की आशंका के बावजूद प्रशासन की ओर से इन्हें ठीक कराने की कोई सुध नहीं ली जा रही है। पार्क में टूटी पड़ी ट्रैक और खुला छोड़ा गया नल नगर परिषद की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा रहा है।
दृश्य 4 : मंगल पार्क
पार्क की सुंदरता बनाए रखने के लिए लगाए गए स्टूल टूट कर बिखर चुके हैं। जगह-जगह टूटे झूले और फैली गंदगी पार्क की पूरी सुंदरता पर ग्रहण लगा रहे हैं। पार्क में शाम के समय अक्सर बुजुर्ग सैर करने और बच्चे खेलने आते हैं। लेकिन पार्क के हालात देखकर अभिभावक अपने बच्चों को पार्क में भेजने से डरते हैं क्योंकि टूटे हुए झूले और जर्जर उपकरण किसी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।
शहर के सभी मिनी पार्कों में ओपन जिम लगवाए गए हैं, वहीं पार्कों की देखभाल के लिए भी कर्मचारी लगाए गए हैं। जल्दी ही सभी मिनी पार्कों के लिए विशेष बजट का प्रावधान करवाया जाएगा ताकि पार्कों में टूटे पड़े झूलों व उपकरणों को ठीक करवाया जा सके।
- बख्शी राम सैनी, चेयरमैन, नगर परिषद।