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मजदूर, गरीब, किसान व आमजन के खिलाफ सुनियोजित हमला है केंद्र सरकार की नीतियां : कामरेड
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sun, 01 Feb 2026 12:41 AM IST
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निर्माण मजदूरों को संबोधित करते कामरेड सुखवीर।
- फोटो : 1
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बाढड़ा। लेबर कोड, मनरेगा पर हमले और बीपीएल कार्ड कटौती के जरिए मेहनतकश जनता को गुलामी की ओर धकेला जा रहा है। जो सहन नहीं होगा। यह बात कामरेड सुखबीर सिंह ने शनिवार को गांव कारी व रूपादास में निर्माण मजदूरों की बैठक को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियां मजदूर वर्ग, ग्रामीण गरीब, किसान और आम जनता के खिलाफ एक सुनियोजित और बहुस्तरीय हमला हैं। लेबर कोड, प्रस्तावित बिजली बिल- 2025, मनरेगा को कमजोर करना और बड़े पैमाने पर बीपीएल कार्ड काटना, ये सभी कदम मिलकर मेहनतकश जनता को आर्थिक बदहाली, असुरक्षा की ओर धकेल रहे हैं।
कामरेड सुखबीर सिंह ने कहा कि चारों लेबर कोड मजदूरों के दशकों के संघर्ष से हासिल अधिकारों पर सीधा प्रहार हैं। स्थायी रोजगार, न्यूनतम मजदूरी, आठ घंटे का कार्य दिवस, सामाजिक सुरक्षा, हड़ताल और यूनियन बनाने के अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है। ठेका और फिक्स्ड टर्म रोजगार को बढ़ावा देकर मजदूरों को हर समय नौकरी से निकाले जाने की स्थिति में धकेला जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बिजली बिल- 2025 भी भाजपा सरकार के इसी जनविरोधी एजेंडे का हिस्सा है। इस बिल के जरिए बिजली वितरण को निजी कंपनियों के हवाले करने, सब्सिडी व्यवस्था को खत्म करने और राज्यों के अधिकार छीनने की कोशिश की जा रही है। इसके लागू होने से बिजली के दामों में भारी बढ़ोतरी होगी, गरीब और मध्यम वर्ग पर बोझ बढ़ेगा, किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं को मिलने वाली राहत खत्म होगी।
जिला संयोजक सुमेर धारणी ने कहा कि यह योजना ग्रामीण गरीबों के लिए जीवनरेखा है जबकि सरकार जानबूझकर इसे कमजोर कर रही है। अब नया कानून लाकर इसे खत्म कर दिया है। बैठक में कोषाध्यक्ष रोशनलाल, उमराव, जयवीर सिंह, जसवंत सिंह, जयवीर सिंह, मुकेश कुमार, प्रवीण कुमार, गुणपाल आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियां मजदूर वर्ग, ग्रामीण गरीब, किसान और आम जनता के खिलाफ एक सुनियोजित और बहुस्तरीय हमला हैं। लेबर कोड, प्रस्तावित बिजली बिल- 2025, मनरेगा को कमजोर करना और बड़े पैमाने पर बीपीएल कार्ड काटना, ये सभी कदम मिलकर मेहनतकश जनता को आर्थिक बदहाली, असुरक्षा की ओर धकेल रहे हैं।
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कामरेड सुखबीर सिंह ने कहा कि चारों लेबर कोड मजदूरों के दशकों के संघर्ष से हासिल अधिकारों पर सीधा प्रहार हैं। स्थायी रोजगार, न्यूनतम मजदूरी, आठ घंटे का कार्य दिवस, सामाजिक सुरक्षा, हड़ताल और यूनियन बनाने के अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है। ठेका और फिक्स्ड टर्म रोजगार को बढ़ावा देकर मजदूरों को हर समय नौकरी से निकाले जाने की स्थिति में धकेला जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बिजली बिल- 2025 भी भाजपा सरकार के इसी जनविरोधी एजेंडे का हिस्सा है। इस बिल के जरिए बिजली वितरण को निजी कंपनियों के हवाले करने, सब्सिडी व्यवस्था को खत्म करने और राज्यों के अधिकार छीनने की कोशिश की जा रही है। इसके लागू होने से बिजली के दामों में भारी बढ़ोतरी होगी, गरीब और मध्यम वर्ग पर बोझ बढ़ेगा, किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं को मिलने वाली राहत खत्म होगी।
जिला संयोजक सुमेर धारणी ने कहा कि यह योजना ग्रामीण गरीबों के लिए जीवनरेखा है जबकि सरकार जानबूझकर इसे कमजोर कर रही है। अब नया कानून लाकर इसे खत्म कर दिया है। बैठक में कोषाध्यक्ष रोशनलाल, उमराव, जयवीर सिंह, जसवंत सिंह, जयवीर सिंह, मुकेश कुमार, प्रवीण कुमार, गुणपाल आदि मौजूद रहे।
