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Fatehabad News: जिले के 972 किसान अपना रहे सूक्ष्म सिंचाई, 70 फीसदी तक पानी की बचत
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Tue, 24 Feb 2026 12:04 AM IST
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फतेहाबाद क्षेत्र में टपका सिंचाई विधि से उगाई गई गोभी की फसल। स्रोत: काडा विभाग
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फतेहाबाद। कृषि क्षेत्र में गिरते भूजल स्तर को देखते हुए किसान पारंपरिक सिंचाई छोड़कर सूक्ष्म सिंचाई तकनीक अपना रहे हैं। जिले के 972 किसान वर्तमान में 2,660 एकड़ भूमि पर इस आधुनिक तकनीक का उपयोग कर रहे हैं।
कृषि एवं कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. राजेश सिहाग ने बताया कि सूक्ष्म सिंचाई से पारंपरिक खुले पानी की तुलना में 70 प्रतिशत तक पानी की बचत संभव है। खुले पानी से सिंचाई करने पर आधे से अधिक पानी वाष्पीकरण या जमीन के भीतर चला जाता है, जबकि सूक्ष्म सिंचाई सीधे पौधों की जड़ों तक पानी पहुंचाती है।
सरकार इस तकनीक को अपनाने वाले किसानों को 85 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान कर रही है। इससे किसान कम पानी में बेहतर फसल उगाने में सक्षम हो रहे हैं और जल संरक्षण के साथ उत्पादन बढ़ाने का मार्ग अपनाया जा रहा है।
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रोगों का प्रकोप कम करता है टपका सिंचाई
टपका सिंचाई बागवानी फसलों के लिए वरदान साबित हो रही है। इसमें पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचता है। इससे खरपतवार कम होती है और खाद का सही उपयोग होता है। फव्वारा प्रणाली खेतों में कृत्रिम बारिश की तरह काम करती है, जो गेहूं, सरसों और दलहन जैसी फसलों के लिए बेहद कारगर है। यह एक गिरते भूजल स्तर को बचाने की एक कवायद है। किसानों के लिए कम पानी में अधिक भूमि को सिंचित करने की तरीका है।
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जिले में सूक्ष्म सिंचाई का रकबा
क्षेत्र-कुल आवेदन-लाभार्थी-कुल रकबा
फतेहाबाद-452-356-1330 एकड़
रतिया-271-238-798 एकड़
टोहाना-180-158-532 एकड़
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सरकार दे रही है अनुदान
किसानों को इस तकनीक के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रही हैं। वर्तमान में केंद्र सरकार की ओर से सूक्ष्म सिंचाई संयंत्रों पर 85 फीसदी तक का अनुदान दिया जा रहा है। किसानों को तकनीक का लाभ उठाने के लिए केवल एक छोटा सा हिस्सा ही खर्च करना पड़ता है। इसके अतिरिक्त, सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु सरकार डिग्गी बनाने पर भी सब्सिडी प्रदान कर रही है। इससे किसान नहर का पानी या बारिश का पानी स्टोर कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर उसे सूक्ष्म सिंचाई के माध्यम से उपयोग में ला सकते हैं।
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:: सूक्ष्म सिंचाई से 70 फीसदी तक पानी की बचत होती है। आने वाले समय में पानी की उपलब्धता कम होने के आसार है, ऐसे में सूक्ष्म सिंचाई ही एकमात्र विकल्प है जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी बचाया जा सकता है। किसानों से अपील है वे खेती में सूक्ष्म सिंचाई की विधि अपनाए।
- सुरेंद्र कुमार, एसडीओ, सूक्ष्म सिंचाई कमांड क्षेत्र प्राधिकरण, फतेहाबाद।
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कृषि एवं कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. राजेश सिहाग ने बताया कि सूक्ष्म सिंचाई से पारंपरिक खुले पानी की तुलना में 70 प्रतिशत तक पानी की बचत संभव है। खुले पानी से सिंचाई करने पर आधे से अधिक पानी वाष्पीकरण या जमीन के भीतर चला जाता है, जबकि सूक्ष्म सिंचाई सीधे पौधों की जड़ों तक पानी पहुंचाती है।
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सरकार इस तकनीक को अपनाने वाले किसानों को 85 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान कर रही है। इससे किसान कम पानी में बेहतर फसल उगाने में सक्षम हो रहे हैं और जल संरक्षण के साथ उत्पादन बढ़ाने का मार्ग अपनाया जा रहा है।
रोगों का प्रकोप कम करता है टपका सिंचाई
टपका सिंचाई बागवानी फसलों के लिए वरदान साबित हो रही है। इसमें पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचता है। इससे खरपतवार कम होती है और खाद का सही उपयोग होता है। फव्वारा प्रणाली खेतों में कृत्रिम बारिश की तरह काम करती है, जो गेहूं, सरसों और दलहन जैसी फसलों के लिए बेहद कारगर है। यह एक गिरते भूजल स्तर को बचाने की एक कवायद है। किसानों के लिए कम पानी में अधिक भूमि को सिंचित करने की तरीका है।
जिले में सूक्ष्म सिंचाई का रकबा
क्षेत्र-कुल आवेदन-लाभार्थी-कुल रकबा
फतेहाबाद-452-356-1330 एकड़
रतिया-271-238-798 एकड़
टोहाना-180-158-532 एकड़
सरकार दे रही है अनुदान
किसानों को इस तकनीक के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रही हैं। वर्तमान में केंद्र सरकार की ओर से सूक्ष्म सिंचाई संयंत्रों पर 85 फीसदी तक का अनुदान दिया जा रहा है। किसानों को तकनीक का लाभ उठाने के लिए केवल एक छोटा सा हिस्सा ही खर्च करना पड़ता है। इसके अतिरिक्त, सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु सरकार डिग्गी बनाने पर भी सब्सिडी प्रदान कर रही है। इससे किसान नहर का पानी या बारिश का पानी स्टोर कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर उसे सूक्ष्म सिंचाई के माध्यम से उपयोग में ला सकते हैं।
:: सूक्ष्म सिंचाई से 70 फीसदी तक पानी की बचत होती है। आने वाले समय में पानी की उपलब्धता कम होने के आसार है, ऐसे में सूक्ष्म सिंचाई ही एकमात्र विकल्प है जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी बचाया जा सकता है। किसानों से अपील है वे खेती में सूक्ष्म सिंचाई की विधि अपनाए।
- सुरेंद्र कुमार, एसडीओ, सूक्ष्म सिंचाई कमांड क्षेत्र प्राधिकरण, फतेहाबाद।