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Fatehabad News: अंबाला के राज्यस्तरीय समारोह का बहिष्कार, फतेहाबाद में ही मनेगी महाराणा प्रताप जयंती
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Fri, 01 May 2026 10:49 PM IST
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फतेहाबाद। बैठक में भाग लेते क्षत्रिय राजपूत महासभा के पदाधिकारीस्त्रोत : स्ंघ
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फतेहाबाद। क्षत्रिय राजपूत महासभा ने अंबाला में 9 मई को प्रस्तावित राज्यस्तरीय महाराणा प्रताप जयंती समारोह में शामिल न होने का निर्णय लिया है। शुक्रवार को बैठक के बाद महासभा सदस्यों ने कहा किया कि इस बार जयंती जिलास्तर पर अपने दम पर मनाई जाएगी।
महासभा ने आरोप लगाया कि राज्यस्तरीय आयोजन से जुड़े प्रतिनिधियों ने फतेहाबाद इकाई की अनदेखी की। उनका कहना है कि टीम का नेतृत्व कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा के पुत्र नेपाल सिंह राणा और विनोद राणा थांबड़ कर रहे हैं लेकिन स्थानीय संगठन को महत्व नहीं दिया गया। सदस्यों ने बताया कि 30 अप्रैल को शाम चार बजे बैठक तय थी पर कार्यक्रम एक निजी स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया। इससे पदाधिकारियों को लंबा इंतजार करना पड़ा और असंतोष बढ़ा। इसी कारण महासभा ने अलग राह चुनने का फैसला लिया।
बैठक में यह भी मुद्दा उठा कि 2019 से फतेहाबाद में महाराणा प्रताप चौक और संस्थान के नामकरण की मांग लंबित है। जिला प्रशासन जनप्रतिनिधियों और नगर परिषद से कई बार आग्रह किया फिर भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। महासभा सदस्यों ने पिछले वर्ष की स्थिति का भी जिक्र किया जब राज्यस्तरीय कार्यक्रम फतेहाबाद के बजाय सिरसा और हिसार में आयोजित हुआ। उस समय भी स्थानीय नेतृत्व ने खुद को उपेक्षित महसूस किया था।
महासभा सदस्यों ने कहा कि प्रदेश सरकार 36 बिरादरी को साथ लेकर चलने का दावा करती है वहीं पिछले कई वर्षों से उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। बैठक में जिला अध्यक्ष जितेंद्र भदौरिया, कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण चंदेल, सचिव रमेश चौहान, सह सचिव रणबीर भाटी, कोषाध्यक्ष रोशन लाल महांस, भंवर रघुराज राठौड़, परमवीर सिसोदिया सहित कई सदस्य मौजूद रहे।
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महासभा ने आरोप लगाया कि राज्यस्तरीय आयोजन से जुड़े प्रतिनिधियों ने फतेहाबाद इकाई की अनदेखी की। उनका कहना है कि टीम का नेतृत्व कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा के पुत्र नेपाल सिंह राणा और विनोद राणा थांबड़ कर रहे हैं लेकिन स्थानीय संगठन को महत्व नहीं दिया गया। सदस्यों ने बताया कि 30 अप्रैल को शाम चार बजे बैठक तय थी पर कार्यक्रम एक निजी स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया। इससे पदाधिकारियों को लंबा इंतजार करना पड़ा और असंतोष बढ़ा। इसी कारण महासभा ने अलग राह चुनने का फैसला लिया।
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बैठक में यह भी मुद्दा उठा कि 2019 से फतेहाबाद में महाराणा प्रताप चौक और संस्थान के नामकरण की मांग लंबित है। जिला प्रशासन जनप्रतिनिधियों और नगर परिषद से कई बार आग्रह किया फिर भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। महासभा सदस्यों ने पिछले वर्ष की स्थिति का भी जिक्र किया जब राज्यस्तरीय कार्यक्रम फतेहाबाद के बजाय सिरसा और हिसार में आयोजित हुआ। उस समय भी स्थानीय नेतृत्व ने खुद को उपेक्षित महसूस किया था।
महासभा सदस्यों ने कहा कि प्रदेश सरकार 36 बिरादरी को साथ लेकर चलने का दावा करती है वहीं पिछले कई वर्षों से उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। बैठक में जिला अध्यक्ष जितेंद्र भदौरिया, कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण चंदेल, सचिव रमेश चौहान, सह सचिव रणबीर भाटी, कोषाध्यक्ष रोशन लाल महांस, भंवर रघुराज राठौड़, परमवीर सिसोदिया सहित कई सदस्य मौजूद रहे।
