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Fatehabad News: बालक से कुकर्म के दोषी को आजीवन कारावास, डेढ़ लाख रुपये जुर्माना
Mon, 17 Aug 2026 11:10 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Mon, 17 Aug 2026 11:10 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहाबाद। बच्चे से कुकर्म के मामले में अदालत ने दोषी गुलशन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अमित गर्ग की अदालत ने दोषी पर कुल डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने गुलशन को पॉक्सो अधिनियम की धारा 4(2) के तहत उसके प्राकृतिक जीवन के शेष भाग तक आजीवन कारावास दिया है।
इसके अतिरिक्त, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 137(2) के तहत सात वर्ष का कठोर कारावास और पचास हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। धारा 351(3) बीएनएस के तहत पांच वर्ष का कठोर कारावास भी सुनाया गया है। अदालत के आदेशानुसार, सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। जुर्माने की कुल राशि डेढ़ लाख रुपये है।
इसमें से पचास हजार रुपये राज्य के राजकोष में मुकदमे के खर्च के रूप में जमा होंगे। शेष एक लाख रुपये पीड़ित बालक को प्रतिकर के रूप में दिए जाएंगे। यह राशि अपील या पुनरीक्षण की अवधि समाप्त होने अथवा उसके परिणाम के अनुसार प्रदान की जाएगी।
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अपराध का विवरण
अभियोग के अनुसार, आरोपी गुलशन ने एक नाबालिग बालक को बहला-फुसलाया था। वह उसे अपनी मोटरसाइकिल पर एक सुनसान स्थान पर ले गया। वहां उसने बालक के साथ घोर अपराध किया। आरोपी ने पीड़ित को जान से मारने की धमकी भी दी थी। पुलिस ने अनुसंधान के दौरान आरोपी को गिरफ्तार किया। वारदात में प्रयुक्त बाइक और मोबाइल फोन भी पुलिस ने जब्त किए।
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जांच और अभियोजन
आरोपी की निशानदेही, मेडिकल साक्ष्य और दस्तावेजी साक्ष्य के आधार पर चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। इस मामले की प्रभावी पैरवी फतेहाबाद के जिला न्यायवादी देवेन्द्र मित्तल और सहायक जिला न्यायवादी अम्प्रीत कौर ने की। जांच के बाद आरोपी के विरुद्ध ठोस साक्ष्यों के आधार पर चालान पेश किया गया। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों की विश्वसनीय गवाही के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया।
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अदालत की टिप्पणी
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि दोषी ने पीड़ित बालक के साथ यह घोर कृत्य किया है। इस कृत्य के कारण पीड़ित बालक जीवनभर अवसाद में रह सकता है। अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को किसी भी प्रकार की नरमी का पात्र नहीं माना। इसी आधार पर उसे उपरोक्त कठोर सजाएं सुनाई गईं। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि आरोपी के मोबाइल फोन से आपत्तिजनक वीडियो भी बरामद हुए थे। ये साक्ष्य भी रिकॉर्ड पर आए थे।
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फतेहाबाद। बच्चे से कुकर्म के मामले में अदालत ने दोषी गुलशन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अमित गर्ग की अदालत ने दोषी पर कुल डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने गुलशन को पॉक्सो अधिनियम की धारा 4(2) के तहत उसके प्राकृतिक जीवन के शेष भाग तक आजीवन कारावास दिया है।
इसके अतिरिक्त, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 137(2) के तहत सात वर्ष का कठोर कारावास और पचास हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। धारा 351(3) बीएनएस के तहत पांच वर्ष का कठोर कारावास भी सुनाया गया है। अदालत के आदेशानुसार, सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। जुर्माने की कुल राशि डेढ़ लाख रुपये है।
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इसमें से पचास हजार रुपये राज्य के राजकोष में मुकदमे के खर्च के रूप में जमा होंगे। शेष एक लाख रुपये पीड़ित बालक को प्रतिकर के रूप में दिए जाएंगे। यह राशि अपील या पुनरीक्षण की अवधि समाप्त होने अथवा उसके परिणाम के अनुसार प्रदान की जाएगी।
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अपराध का विवरण
अभियोग के अनुसार, आरोपी गुलशन ने एक नाबालिग बालक को बहला-फुसलाया था। वह उसे अपनी मोटरसाइकिल पर एक सुनसान स्थान पर ले गया। वहां उसने बालक के साथ घोर अपराध किया। आरोपी ने पीड़ित को जान से मारने की धमकी भी दी थी। पुलिस ने अनुसंधान के दौरान आरोपी को गिरफ्तार किया। वारदात में प्रयुक्त बाइक और मोबाइल फोन भी पुलिस ने जब्त किए।
जांच और अभियोजन
आरोपी की निशानदेही, मेडिकल साक्ष्य और दस्तावेजी साक्ष्य के आधार पर चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। इस मामले की प्रभावी पैरवी फतेहाबाद के जिला न्यायवादी देवेन्द्र मित्तल और सहायक जिला न्यायवादी अम्प्रीत कौर ने की। जांच के बाद आरोपी के विरुद्ध ठोस साक्ष्यों के आधार पर चालान पेश किया गया। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों की विश्वसनीय गवाही के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया।
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अदालत की टिप्पणी
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि दोषी ने पीड़ित बालक के साथ यह घोर कृत्य किया है। इस कृत्य के कारण पीड़ित बालक जीवनभर अवसाद में रह सकता है। अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को किसी भी प्रकार की नरमी का पात्र नहीं माना। इसी आधार पर उसे उपरोक्त कठोर सजाएं सुनाई गईं। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि आरोपी के मोबाइल फोन से आपत्तिजनक वीडियो भी बरामद हुए थे। ये साक्ष्य भी रिकॉर्ड पर आए थे।