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Fatehabad News: दिल्ली–बठिंडा–श्रीगंगानगर रूट हुआ इलेक्ट्रिक
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Wed, 17 Jun 2026 11:25 PM IST
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टोहाना। उत्तर रेलवे ने दिल्ली–बठिंडा–श्रीगंगानगर रेल मार्ग पर बड़ा बदलाव लागू करते हुए ट्रेनों को पूरी तरह इलेक्ट्रिक संचालन में बदल दिया है। इस निर्णय के बाद इस रूट पर चलने वाली प्रमुख ट्रेनें अब डीजल के बजाय इलेक्ट्रिक इंजन से संचालित होंगी जिससे यात्रियों का सफर अधिक तेज और सुविधाजनक हो जाएगा।
रेलवे के अनुसार 12481/82 इंटरसिटी एक्सप्रेस 17 जून से दिल्ली से और 18 जून से श्रीगंगानगर से पूरी तरह इलेक्ट्रिक इंजन पर चलने लगी हैं। इससे बठिंडा स्टेशन पर इंजन बदलने की प्रक्रिया समाप्त हो गई है। इस बदलाव के चलते समय की बचत होगी और यात्रा सुगम बनेगी। पहले यह ट्रेन दिल्ली से बठिंडा तक इलेक्ट्रिक और आगे डीजल इंजन से संचालित होती थी।
दैनिक रेल यात्री एसोसिएशन के प्रवक्ता हरजीत सिंह ने बताया कि 14525/26 ट्रेन भी 16 जून से अंबाला–श्रीगंगानगर रूट पर इलेक्ट्रिक इंजन से चल रही है जबकि 12455/56 ट्रेन 17 जून से दिल्ली-बीकानेर मार्ग पर इलेक्ट्रिक हो गई है। इस बदलाव से बठिंडा में इंजन परिवर्तन में लगने वाला लगभग 20 मिनट का समय बच जाएगा।
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इलेक्ट्रिक इंजन की बेहतर गति क्षमता के कारण ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी साथ ही डीजल इंजन हटने से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। इस पूरे रूट के इलेक्ट्रिफाइड हो जाने के बाद अब दिल्ली से रोहतक, जींद, जाखल, बठिंडा होते हुए श्रीगंगानगर तक ट्रेन संचालन पूरी तरह बिजली पर आधारित हो गया है। रेलवे के पास इस मार्ग पर वंदे भारत या सुपरफास्ट ट्रेन संचालन का प्रस्ताव भी विचाराधीन है जिससे भविष्य में यात्रियों को और बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है।
रेलवे के अनुसार 12481/82 इंटरसिटी एक्सप्रेस 17 जून से दिल्ली से और 18 जून से श्रीगंगानगर से पूरी तरह इलेक्ट्रिक इंजन पर चलने लगी हैं। इससे बठिंडा स्टेशन पर इंजन बदलने की प्रक्रिया समाप्त हो गई है। इस बदलाव के चलते समय की बचत होगी और यात्रा सुगम बनेगी। पहले यह ट्रेन दिल्ली से बठिंडा तक इलेक्ट्रिक और आगे डीजल इंजन से संचालित होती थी।
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दैनिक रेल यात्री एसोसिएशन के प्रवक्ता हरजीत सिंह ने बताया कि 14525/26 ट्रेन भी 16 जून से अंबाला–श्रीगंगानगर रूट पर इलेक्ट्रिक इंजन से चल रही है जबकि 12455/56 ट्रेन 17 जून से दिल्ली-बीकानेर मार्ग पर इलेक्ट्रिक हो गई है। इस बदलाव से बठिंडा में इंजन परिवर्तन में लगने वाला लगभग 20 मिनट का समय बच जाएगा।
इलेक्ट्रिक इंजन की बेहतर गति क्षमता के कारण ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी साथ ही डीजल इंजन हटने से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। इस पूरे रूट के इलेक्ट्रिफाइड हो जाने के बाद अब दिल्ली से रोहतक, जींद, जाखल, बठिंडा होते हुए श्रीगंगानगर तक ट्रेन संचालन पूरी तरह बिजली पर आधारित हो गया है। रेलवे के पास इस मार्ग पर वंदे भारत या सुपरफास्ट ट्रेन संचालन का प्रस्ताव भी विचाराधीन है जिससे भविष्य में यात्रियों को और बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है।