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Fatehabad News: कागजों में कम कमाई, सरकारी योजनाओं की खा रहे मलाई
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sat, 02 May 2026 10:57 PM IST
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लघु सचिवालय के क्रीड विभाग के कार्यालय में परिवार पहचान पत्र की जानकारी लेने नागरिक। संवाद
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फतेहाबाद। नागरिक संसाधन सूचना विभाग (क्रीड) ने परिवार पहचान पत्र में गलत जानकारी देकर सरकारी लाभ उठाने वाले लोगों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। ऐसे परिवारों का भौतिक सत्यापन शुरू किया है जिन्होंने सालाना आय 25,000 रुपये से कम दर्ज कराई है। सत्यापन में इन लोगों की पोल खुली है जो वास्तविक जीवन में अमीर हैं लेकिन सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए गरीब बने हुए हैं।
सत्यापन प्रक्रिया के दौरान गांव लाली में एक संयुक्त परिवार के दो भाइयों ने अपने अलग-अलग परिवार पहचान पत्र बनवा लिए। क्रीड विभाग की जांच टीम ने जब भौतिक सत्यापन किया तो पता चला कि नौ एकड़ कृषि भूमि के मालिक इन भाइयों ने अपनी सालाना कमाई महज 25,000 रुपये दर्शा रखी हैं। विभाग ने इसकी रिपोर्ट बनाकर चंडीगढ़ क्रीड विभाग को भेज दी है। विभाग की ओर से अब इन दोनों परिवारों पर कार्रवाई होने की संभावना है।
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मिस्त्री बन रहे मजदूर
ऐसे कई कारीगरों की मासिक आय ही 30,000 रुपये के करीब है जबकि उन्होंने पूरे साल की आय ही 25,000 रुपये लिखवाई है। गांव फूलां के एक संयुक्त परिवार ने तीन परिवार पहचान पत्र बनाकर सालाना आय 50 हजार रुपये दर्ज करवा रखी है। जब क्रीड की टीम ने भौतिक सत्यापन किया तो उनके परिवार में तीन कुशल राजमिस्त्री मिले जिनकी प्रतिदिन की दिहाड़ी 1000 से लेकर 1100 तक हैं। वहीं गांव खुंबर के एक परिवार में दो लोग मजदूरी करते हैं लेकिन परिवार पहचान पत्र में उनकी सालाना आय मात्र 10000 दर्ज हैं। जांच में सामने आया कि परिवार आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद सरकारी कागजों में गरीब बन रहे हैं।
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176 परिवारों की खुली पोल, प्रशासन ने रिपोर्ट भेजी चंडीगढ़
क्रीड विभाग ने अब तक कुल 176 ऐसे परिवारों की स्थिति जांची है जिन्होंने अपनी आय न्यूनतम श्रेणी में रखी थी। भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिला क्रीड विभाग ने अपनी रिपोर्ट चंडीगढ़ स्थित मुख्यालय को भेज दी है। इस रिपोर्ट में अनुशंसा की गई है कि गलत जानकारी देने वाले इन अपात्र परिवारों की तमाम सरकारी सुविधाएं तुरंत बंद की जाएं।
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जिले में 5 हजार परिवारों की सालाना आय मात्र 25000 रुपये
जिले में करीब 5 हजार परिवारों ने अपनी सालाना आय 25000 रुपये तक दर्ज करवाई है जो कि न्यूनतम श्रेणी में है। ऐसे में अब प्रशासन इन परिवारों के घर टीम भेजकर भौतिक सत्यापन करेगा ताकि परिवार की वास्तविक आय का पता चल सके। यदि जांच में पाया जाता है कि परिवार अमीर है और केवल कागजों में ही गरीब बनने का नाटक कर रहा है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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क्रीड विभाग का डेटा की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। जो लोग वास्तव में जरूरतमंद हैं उनके हक को सुरक्षित रखने के लिए फर्जीवाड़ा करने वालों पर नकेल कसना अनिवार्य है। जिन परिवारों ने गलत जानकारी देकर संपत्ति और व्यवसाय छिपाकर मुफ्त राशन और आयुष्मान कार्ड जैसी सुविधाओं का लाभ लिया है। प्रशासन अब इन सभी परिवारों कार्रवाई व जुर्माने का प्रावधान कर रहा है।
-संदीप, जिला कार्यक्रम अधिकारी, क्रीड विभाग, फतेहाबाद।
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मिस्त्री बन रहे मजदूर
ऐसे कई कारीगरों की मासिक आय ही 30,000 रुपये के करीब है जबकि उन्होंने पूरे साल की आय ही 25,000 रुपये लिखवाई है। गांव फूलां के एक संयुक्त परिवार ने तीन परिवार पहचान पत्र बनाकर सालाना आय 50 हजार रुपये दर्ज करवा रखी है। जब क्रीड की टीम ने भौतिक सत्यापन किया तो उनके परिवार में तीन कुशल राजमिस्त्री मिले जिनकी प्रतिदिन की दिहाड़ी 1000 से लेकर 1100 तक हैं। वहीं गांव खुंबर के एक परिवार में दो लोग मजदूरी करते हैं लेकिन परिवार पहचान पत्र में उनकी सालाना आय मात्र 10000 दर्ज हैं। जांच में सामने आया कि परिवार आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद सरकारी कागजों में गरीब बन रहे हैं।
176 परिवारों की खुली पोल, प्रशासन ने रिपोर्ट भेजी चंडीगढ़
क्रीड विभाग ने अब तक कुल 176 ऐसे परिवारों की स्थिति जांची है जिन्होंने अपनी आय न्यूनतम श्रेणी में रखी थी। भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिला क्रीड विभाग ने अपनी रिपोर्ट चंडीगढ़ स्थित मुख्यालय को भेज दी है। इस रिपोर्ट में अनुशंसा की गई है कि गलत जानकारी देने वाले इन अपात्र परिवारों की तमाम सरकारी सुविधाएं तुरंत बंद की जाएं।
जिले में 5 हजार परिवारों की सालाना आय मात्र 25000 रुपये
जिले में करीब 5 हजार परिवारों ने अपनी सालाना आय 25000 रुपये तक दर्ज करवाई है जो कि न्यूनतम श्रेणी में है। ऐसे में अब प्रशासन इन परिवारों के घर टीम भेजकर भौतिक सत्यापन करेगा ताकि परिवार की वास्तविक आय का पता चल सके। यदि जांच में पाया जाता है कि परिवार अमीर है और केवल कागजों में ही गरीब बनने का नाटक कर रहा है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
क्रीड विभाग का डेटा की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। जो लोग वास्तव में जरूरतमंद हैं उनके हक को सुरक्षित रखने के लिए फर्जीवाड़ा करने वालों पर नकेल कसना अनिवार्य है। जिन परिवारों ने गलत जानकारी देकर संपत्ति और व्यवसाय छिपाकर मुफ्त राशन और आयुष्मान कार्ड जैसी सुविधाओं का लाभ लिया है। प्रशासन अब इन सभी परिवारों कार्रवाई व जुर्माने का प्रावधान कर रहा है।
-संदीप, जिला कार्यक्रम अधिकारी, क्रीड विभाग, फतेहाबाद।
