{"_id":"6a78b9f02aa18078ec00a551","slug":"fir-registered-against-6-people-for-manufacturing-medical-equipment-using-stolen-software-fatehabad-news-c-127-1-shsr1017-158968-2026-08-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Fatehabad News: सॉफ्टवेयर चोरी कर बनाए मेडिकल उपकरण, 6 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Fatehabad News: सॉफ्टवेयर चोरी कर बनाए मेडिकल उपकरण, 6 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज
Sun, 09 Aug 2026 11:03 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sun, 09 Aug 2026 11:03 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फतेहाबाद/भट्टू कलां। गांव किरढ़ान स्थित फोरमोस्ट मेडिटेक प्राइवेट लिमिटेड का गोपनीय डेटा चोरी कर समान मेडिकल प्रोडक्ट तैयार करने के आरोप में छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई है। कंपनी मैनेजर ओमप्रकाश की शिकायत पर अदालत के आदेश से भट्टू कलां थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है।
पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। कंपनी मैनेजर ओमप्रकाश ने बताया कि फोरमोस्ट मेडिटेक आईसीयू, वेंटिलेटर सहित विभिन्न मेडिकल प्रोडक्ट तैयार करती है। इनके निर्माण के लिए कंपनी ने अपना सॉफ्टवेयर विकसित किया हुआ है। नामजद छह आरोपी पहले कंपनी में काम कर चुके हैं।
नामजद आरोपियों में बिहार के सिवान जिले के बंगरा निवासी अभिषेक कुमार, पानीपत के काबड़ी रोड स्थित गोल्डन खैनी निवासी सन्नी कुमार, गुरुग्राम निवासी मुकेश कुमार, दिल्ली के भारथल-बगडोला निवासी दीपक कुमार, गुरुग्राम के मेहचाना गांव निवासी जिले सिंह और गुरुग्राम के पटेल नगर निवासी अश्वनी कुमार शामिल हैं।
विज्ञापन
कंपनी मैनेजर के अनुसार मार्च में कंपनी के एक डीलर ने बाजार में फोरमोस्ट मेडिटेक जैसे प्रोडक्ट बिकने की जानकारी दी। इसके बाद कंपनी ने अपने स्तर पर जांच शुरू की। आरोप है कि पूर्व कर्मचारी अश्वनी कुमार ने गुरुग्राम में ब्रीथोवेंट मेडिटेक नाम से कंपनी बनाई। वहीं मुकेश कुमार ने ब्रेथएक्स सिस्टम नाम से कंपनी शुरू की।
कंपनी मैनेजर का आरोप है कि दोनों ने फोरमोस्ट मेडिटेक के समान मेडिकल प्रोडक्ट तैयार कर बाजार में बेचने शुरू किए। शिकायत में अभिषेक कुमार पर कंपनी के गोपनीय डेटा, सॉफ्टवेयर, सोर्स कोड, डिजाइन फाइलें, तकनीकी जानकारी और ट्रेड सीक्रेट की अनधिकृत कॉपी तैयार करने का आरोप लगाया गया है।
-- -- -- -- -- --
डेटा 13 लाख रुपये में बेचने का आरोप
आरोप है कि यह मेडिकल प्रोडक्ट बनाने का डेटा करीब 13 लाख रुपये में मुकेश कुमार और अश्वनी कुमार को बेचा गया। शिकायतकर्ता के अनुसार इतने कम समय में समान प्रोडक्ट के लिए नया सॉफ्टवेयर तैयार करना संभव नहीं था। इसी आधार पर कंपनी ने डेटा चोरी कर इस्तेमाल किए जाने की आशंका जताई। अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पुलिस अब आरोपों की जांच के साथ डेटा और सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से जुड़े तथ्यों की भी पड़ताल कर रही है।
विज्ञापन
पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। कंपनी मैनेजर ओमप्रकाश ने बताया कि फोरमोस्ट मेडिटेक आईसीयू, वेंटिलेटर सहित विभिन्न मेडिकल प्रोडक्ट तैयार करती है। इनके निर्माण के लिए कंपनी ने अपना सॉफ्टवेयर विकसित किया हुआ है। नामजद छह आरोपी पहले कंपनी में काम कर चुके हैं।
विज्ञापन
नामजद आरोपियों में बिहार के सिवान जिले के बंगरा निवासी अभिषेक कुमार, पानीपत के काबड़ी रोड स्थित गोल्डन खैनी निवासी सन्नी कुमार, गुरुग्राम निवासी मुकेश कुमार, दिल्ली के भारथल-बगडोला निवासी दीपक कुमार, गुरुग्राम के मेहचाना गांव निवासी जिले सिंह और गुरुग्राम के पटेल नगर निवासी अश्वनी कुमार शामिल हैं।
विज्ञापन
कंपनी मैनेजर के अनुसार मार्च में कंपनी के एक डीलर ने बाजार में फोरमोस्ट मेडिटेक जैसे प्रोडक्ट बिकने की जानकारी दी। इसके बाद कंपनी ने अपने स्तर पर जांच शुरू की। आरोप है कि पूर्व कर्मचारी अश्वनी कुमार ने गुरुग्राम में ब्रीथोवेंट मेडिटेक नाम से कंपनी बनाई। वहीं मुकेश कुमार ने ब्रेथएक्स सिस्टम नाम से कंपनी शुरू की।
कंपनी मैनेजर का आरोप है कि दोनों ने फोरमोस्ट मेडिटेक के समान मेडिकल प्रोडक्ट तैयार कर बाजार में बेचने शुरू किए। शिकायत में अभिषेक कुमार पर कंपनी के गोपनीय डेटा, सॉफ्टवेयर, सोर्स कोड, डिजाइन फाइलें, तकनीकी जानकारी और ट्रेड सीक्रेट की अनधिकृत कॉपी तैयार करने का आरोप लगाया गया है।
डेटा 13 लाख रुपये में बेचने का आरोप
आरोप है कि यह मेडिकल प्रोडक्ट बनाने का डेटा करीब 13 लाख रुपये में मुकेश कुमार और अश्वनी कुमार को बेचा गया। शिकायतकर्ता के अनुसार इतने कम समय में समान प्रोडक्ट के लिए नया सॉफ्टवेयर तैयार करना संभव नहीं था। इसी आधार पर कंपनी ने डेटा चोरी कर इस्तेमाल किए जाने की आशंका जताई। अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पुलिस अब आरोपों की जांच के साथ डेटा और सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से जुड़े तथ्यों की भी पड़ताल कर रही है।