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Fatehabad News: एलएडीसी नीति के खिलाफ वकीलों का कार्य बहिष्कार, नहीं हो सकी पक्षकारों की सुनवाई

Wed, 29 Jul 2026 10:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Wed, 29 Jul 2026 10:43 PM IST
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Lawyers went on strike against the LADC policy, hearings of the parties could not take place
रतिया/टोहाना। लीगल एड डिफेंस काउंसिल (एलएडीसी) नीति के विरोध में बुधवार को बार एसोसिएशन ने कार्य बहिष्कार कर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए बार प्रधान वेद कंबोज ने कहा कि यह नीति वकील वर्ग और न्याय व्यवस्था के हितों के अनुरूप नहीं है।
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उन्होंने कहा कि इससे युवा अधिवक्ताओं के रोजगार पर असर पड़ने की आशंका है और न्याय प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। हड़ताल के चलते रतिया अदालत में न्यायिक कार्य प्रभावित रहा। दूर-दराज से आए पक्षकारों को सुनवाई नहीं होने से मायूस लौटना पड़ा।
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बार सदस्यों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर मांग की कि सरकार इस नीति पर पुनर्विचार करे। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शन में बार एसोसिएशन के सचिव विक्रम कंबोज समेत अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे।
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टोहाना बार एसोसिएशन के सदस्य भूख हड़ताल पर बैठे : एलएडीसी पॉलिसी के विरोध में बार एसोसिएशन के वकीलों ने बुधवार को लॉयर्स चैंबर बिल्डिंग में धरना देकर भूख हड़ताल की। अधिवक्ताओं ने इस नीति को युवा वकीलों के हितों के विपरीत बताते हुए सरकार से इसे वापस लेने की मांग की।
धरने के दौरान वकीलों ने पॉलिसी के खिलाफ नारेबाजी की। बार एसोसिएशन के सचिव नीरज गोयल और सहसचिव अंकित भालौटिया ने भूख हड़ताल कर विरोध दर्ज कराया। भीम आर्मी लीगल विंग के प्रदेश प्रवक्ता एडवोकेट विजय कृष्ण रंगा ने भी धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलन का समर्थन किया।

बार एसोसिएशन की बैठक में चंडीगढ़ तथा हरियाणा-पंजाब बार की संयुक्त एक्शन कमेटी के आह्वान पर प्रस्तावित आंदोलन का समर्थन करने का निर्णय लिया गया।
वकीलों ने कहा कि एलएडीसी पॉलिसी से युवा अधिवक्ताओं के रोजगार और भविष्य पर असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने मांग की कि सरकार इस नीति पर पुनर्विचार करे।
धरने में वरिष्ठ अधिवक्ता चांदीराम पातड़, पूर्व प्रधान सुभाष चंद्र गर्ग, संजय वर्मा, सुरेश चावला, उप प्रधान अनुराग जैन, राजेश कुमार सभ्रवाल, महासिंह और कुलविंदर सैनी मौजूद रहे।
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