{"_id":"6a68e2b73000c67b470fef6e","slug":"rotten-wheat-on-the-plates-of-the-poor-fatehabad-news-c-127-1-shsr1017-158205-2026-07-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Fatehabad News: गरीबों की थाली में सड़ा गेहूं...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Fatehabad News: गरीबों की थाली में सड़ा गेहूं...
Tue, 28 Jul 2026 10:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Tue, 28 Jul 2026 10:41 PM IST
विज्ञापन
फतेहाबाद में अधिकारियों से मिलने आए डिपू संचालक जानकारी देते हुए संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फतेहाबाद। गरीब परिवारों के राशन वितरण में प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। सितंबर माह में दिए जाने वाले गेहूं की सप्लाई करीब डेढ़ माह पहले ही डिपो पर भेजनी शुरू कर दी गई है। वहीं गेहूं से आ रही बदबू और खराब गुणवत्ता देखकर डिपो संचालकों ने उसे लेने से साफ इन्कार कर दिया है।
डिपो संचालक मंगलवार को जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों के समक्ष इस बारे में विरोध दर्ज कराया। उनका कहना था कि ऐसा गेहूं उपभोक्ताओं में वितरित नहीं किया जा सकता क्योंकि यह पूरी तरह खराब है। संचालकों के विरोध के बाद अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जिन डिपो पर खराब गेहूं पहुंच चुका है वहां से उसे वापस मंगाकर नई सप्लाई भेजी जाएगी।
ऑल फेयर प्राइस शॉप डीलर्स फेडरेशन के प्रदेशाध्यक्ष शीशपाल गोदारा ने बताया कि सितंबर और अक्तूबर माह की सप्लाई समय से पहले भेजी जा रही है। जो गेहूं भेजा जा रहा है उसकी गुणवत्ता बेहद खराब है। गेहूं पूरी तरह सड़ा हुआ है और उसकी बदबू स्पष्ट तौर पर महसूस की जा सकती है। इस संबंध में अधिकारियों से बात की गई है। अधिकारियों ने खराब गेहूं बदलने का भरोसा दिया है। संवाद
विज्ञापन
-
गोदाम खाली करने के लिए विभाग निकाल रहे स्टॉक
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की तरफ से जिले के डिपो पर सितंबर माह का स्टॉक भेजा जा रहा है। विभाग पहले से ही जुलाई और अगस्त माह का राशन भेज चुका है। डिपो संचालकों का कहना है कि उनके पास इतनी जगह नहीं होती है कि वह दो-दो माह का स्टॉक एक साथ कर लें।
-
खराब गेहूं पर कार्ड धारक करते हैं लड़ाई
डिपो संचालकों का कहना है कि हर बार गेहूं की गुणवत्ता खराब होती है। इस बार ज्यादा खराब है। खराब गेहूं के बारे में राशन कार्ड धारक लड़ाई करते हैं। इस बारे में कार्ड धारक उन्हें ही जिम्मेदार ठहराते हैं।
-
जिले में ये है स्थिति
राशन डिपो - 366
लाभार्थी - 6,35,732
-
सप्लाई के दौरान कई बार एक-आध बैग में खराब गेहूं आ जाता है। इस बारे में निर्देश दिए हुए हैं कि कहीं अगर दिक्कत है तो उसे बदला जाएगा। डिपो संचालक मिले थे उनके कुछ और समस्या थी, जिस पर चर्चा की गई है।
- कुशल पाल बूरा, डीएफएससी
विज्ञापन
डिपो संचालक मंगलवार को जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों के समक्ष इस बारे में विरोध दर्ज कराया। उनका कहना था कि ऐसा गेहूं उपभोक्ताओं में वितरित नहीं किया जा सकता क्योंकि यह पूरी तरह खराब है। संचालकों के विरोध के बाद अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जिन डिपो पर खराब गेहूं पहुंच चुका है वहां से उसे वापस मंगाकर नई सप्लाई भेजी जाएगी।
विज्ञापन
ऑल फेयर प्राइस शॉप डीलर्स फेडरेशन के प्रदेशाध्यक्ष शीशपाल गोदारा ने बताया कि सितंबर और अक्तूबर माह की सप्लाई समय से पहले भेजी जा रही है। जो गेहूं भेजा जा रहा है उसकी गुणवत्ता बेहद खराब है। गेहूं पूरी तरह सड़ा हुआ है और उसकी बदबू स्पष्ट तौर पर महसूस की जा सकती है। इस संबंध में अधिकारियों से बात की गई है। अधिकारियों ने खराब गेहूं बदलने का भरोसा दिया है। संवाद
विज्ञापन
-
गोदाम खाली करने के लिए विभाग निकाल रहे स्टॉक
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की तरफ से जिले के डिपो पर सितंबर माह का स्टॉक भेजा जा रहा है। विभाग पहले से ही जुलाई और अगस्त माह का राशन भेज चुका है। डिपो संचालकों का कहना है कि उनके पास इतनी जगह नहीं होती है कि वह दो-दो माह का स्टॉक एक साथ कर लें।
-
खराब गेहूं पर कार्ड धारक करते हैं लड़ाई
डिपो संचालकों का कहना है कि हर बार गेहूं की गुणवत्ता खराब होती है। इस बार ज्यादा खराब है। खराब गेहूं के बारे में राशन कार्ड धारक लड़ाई करते हैं। इस बारे में कार्ड धारक उन्हें ही जिम्मेदार ठहराते हैं।
-
जिले में ये है स्थिति
राशन डिपो - 366
लाभार्थी - 6,35,732
-
सप्लाई के दौरान कई बार एक-आध बैग में खराब गेहूं आ जाता है। इस बारे में निर्देश दिए हुए हैं कि कहीं अगर दिक्कत है तो उसे बदला जाएगा। डिपो संचालक मिले थे उनके कुछ और समस्या थी, जिस पर चर्चा की गई है।
- कुशल पाल बूरा, डीएफएससी