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Fatehabad News: समर्पण के साथ चार दशकों से शिव दल लंगर कमेटी की सेवा यात्रा
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sun, 07 Jun 2026 11:12 PM IST
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अरुणाय में लंगर सेवा करते हुए शिव दल लंगर कमेटी सेवा ट्रस्ट सेवादार ,स्त्रोत कमेटी
- फोटो : सांकेतिक
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रतिया। शिव दल लंगर कमेटी सेवा ट्रस्ट रतिया ने 38 वर्षों में 385 लंगर लगाकर सेवा और समर्पण की अनूठी मिसाल कायम की है। वर्ष 1988 से शुरू हुई यह यात्रा आज भी निरंतर जारी है। संस्था संगमेश्वर धाम अरुणाय (पेहवा) और कपाल मोचन में श्रद्धालुओं की सेवा को अपना प्रमुख दायित्व मानती है।
ट्रस्ट पिछले 38 वर्षों से प्रत्येक माह त्रयोदशी पर संगमेश्वर धाम अरुणाय में लंगर लगाता आ रहा है। विशेष बात यह है कि यह सेवा किभी भी माह बाधित नहीं हुई। संस्था के सदस्य श्रद्धालुओं की सेवा को शिव सेवा मानकर निरंतर कार्य कर रहे हैं। कपाल मोचन, बिलासपुर (यमुनानगर) में भी दीपावली के बाद गुरु पर्व पर लंगर का आयोजन किया जाता है। धार्मिक महत्व वाले इस ऐतिहासिक स्थल पर सेवा करना संस्था सौभाग्य मानती है। संवाद
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जूता सेवा बनी पहचान
शिव दल लंगर कमेटी की विशेष पहचान जूता सेवा है। शहर और आसपास के धार्मिक आयोजनों में कमेटी के सेवादार श्रद्धालुओं के जूते-चप्पलों की व्यवस्था संभालते नजर आते हैं। पीले वस्त्रों में सेवादार पूरी निष्ठा और विनम्रता के साथ यह जिम्मेदारी निभाते हैं। इसी कारण धार्मिक आयोजनों में कमेटी को प्राथमिकता से आमंत्रित किया जाता है।
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लॉकडाउन में भी निभाया मानवता का धर्म
कोरोना महामारी के दौरान संस्था का सेवा अभियान विशेष रूप से सराहनीय रहा। लॉकडाउन के समय ट्रस्ट के सदस्य जरूरतमंद परिवारों तक राशन, दवाइयां और आवश्यक सामग्री पहुंचाते रहे। बेसहारा बुजुर्गों की सहायता, ढाणियों में जरूरी सामान पहुंचाने तथा गोवंश के लिए हरे चारे और पानी की व्यवस्था कर संस्था ने मानवता का परिचय दिया।
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कांवड़ियों और राहगीरों की भी सेवा
महाशिवरात्रि पर हरिद्वार से लौटने वाले शिव कांवड़ियों के लिए लंगर, फल, जूस, दूध और पानी की व्यवस्था की जाती है। गर्मी के दिनों में ठंडे पानी की छबील सहित अनेक सेवा कार्य भी संचालित किए जाते हैं। पुजारा लाल चुघ, सतीश सरदाना, देवराज, संजीव जिंदल, हरबंस खन्ना, मदन सेतिया, सुभाष चुघ, अशोक गर्ग, दर्शन सैनी, वीरभान और भीम सेन सहित अनेक सेवादार संस्था से जुड़े हैं।
ट्रस्ट पिछले 38 वर्षों से प्रत्येक माह त्रयोदशी पर संगमेश्वर धाम अरुणाय में लंगर लगाता आ रहा है। विशेष बात यह है कि यह सेवा किभी भी माह बाधित नहीं हुई। संस्था के सदस्य श्रद्धालुओं की सेवा को शिव सेवा मानकर निरंतर कार्य कर रहे हैं। कपाल मोचन, बिलासपुर (यमुनानगर) में भी दीपावली के बाद गुरु पर्व पर लंगर का आयोजन किया जाता है। धार्मिक महत्व वाले इस ऐतिहासिक स्थल पर सेवा करना संस्था सौभाग्य मानती है। संवाद
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जूता सेवा बनी पहचान
शिव दल लंगर कमेटी की विशेष पहचान जूता सेवा है। शहर और आसपास के धार्मिक आयोजनों में कमेटी के सेवादार श्रद्धालुओं के जूते-चप्पलों की व्यवस्था संभालते नजर आते हैं। पीले वस्त्रों में सेवादार पूरी निष्ठा और विनम्रता के साथ यह जिम्मेदारी निभाते हैं। इसी कारण धार्मिक आयोजनों में कमेटी को प्राथमिकता से आमंत्रित किया जाता है।
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कोरोना महामारी के दौरान संस्था का सेवा अभियान विशेष रूप से सराहनीय रहा। लॉकडाउन के समय ट्रस्ट के सदस्य जरूरतमंद परिवारों तक राशन, दवाइयां और आवश्यक सामग्री पहुंचाते रहे। बेसहारा बुजुर्गों की सहायता, ढाणियों में जरूरी सामान पहुंचाने तथा गोवंश के लिए हरे चारे और पानी की व्यवस्था कर संस्था ने मानवता का परिचय दिया।
कांवड़ियों और राहगीरों की भी सेवा
महाशिवरात्रि पर हरिद्वार से लौटने वाले शिव कांवड़ियों के लिए लंगर, फल, जूस, दूध और पानी की व्यवस्था की जाती है। गर्मी के दिनों में ठंडे पानी की छबील सहित अनेक सेवा कार्य भी संचालित किए जाते हैं। पुजारा लाल चुघ, सतीश सरदाना, देवराज, संजीव जिंदल, हरबंस खन्ना, मदन सेतिया, सुभाष चुघ, अशोक गर्ग, दर्शन सैनी, वीरभान और भीम सेन सहित अनेक सेवादार संस्था से जुड़े हैं।