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Fatehabad News: साहब! मैं 65 का, पीपीपी में 2 साल का बच्चा बना दिया...
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Thu, 29 Jan 2026 11:34 PM IST
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फतेहाबाद के नगर परिषद कार्यालय में शिविर के दौरान मौजूद लोग संवाद
- फोटो : credit
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फतेहाबाद। परिवार पहचान पत्र में डाटा अपडेट के बाद बुजुर्गों की पेंशन और राशन कार्ड व्यवस्था बुरी तरह से उलझ गई है। कई बुजुर्गों की पेंशन रोक दी गई, तो किसी का राशन कार्ड अचानक बंद हो गया। यह नया सुविधाजनक सिस्टम बुजुर्गों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। पीपीपी में किसी की उम्र ही 2 साल कर दी गई तो किसी की आय बढ़ा दी गई। क्रीड विभाग ने पीपीपी की समस्याओं के समाधान के लिए वीरवार से दो दिवसीय शिविर शुरू किया। पहला दिन ही बुजुर्गों के लिए लंबा इंतजार और निराशा लेकर आया। शहरों में नगर परिषद और नगर पालिका भवनों में, गांवों में बीडीपीओ कार्यालयों में बुजुर्ग घंटों अपनी समस्याओं के समाधान के लिए लाइनों में लगे रहे।
शिविर में पहुंचे बुजुर्ग कई प्रकार की विचित्र वजहों से परेशान दिखाई दिए। किसी की पेंशन इसलिए बंद कर दी गई कि उसकी उम्र पीपीपी में 65 साल से दो साल कर दी गई तो किसी की पेंशन इसलिए कट गई क्योंकि उनके पीपीपी में 12 साल पुरानी गाड़ी दिखा दी गई। शिविर में आई एक बुजुर्ग महिला के तो समस्या बताते हुए आंसू तक निकल पड़े क्योंकि घर में कमाने वाला कोई नहीं है और दिव्यांग पोती की जिम्मेदारी भी उस पर है, पिछले छह माह से वह राशन कार्ड बंद होने से परेशान है।
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मीटिंग हाल की जगह कमरे में लगा कैंप
नगर परिषद कार्यालय में शिविर पहले मीटिंग कक्ष में लगाने की योजना थी लेकिन उसे प्रॉपर्टी आईडी कक्ष में लगाया गया। वजह यह थी कि मीटिंग हाल में पहुंचने के लिए व्यवस्था ही नहीं थी। कमरे में शिविर लगने के कारण बुजुर्गों को खड़े रहना पड़ा। वहां पर बैठने की व्यवस्था भी नहीं की गई। यहां तक कि बुजुर्गों के लिए कोई व्हील चेयर तक की व्यवस्था नहीं थी।
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पोती दिव्यांग, मैं कमा नहीं सकती, कई बार भूखे सोना पड़ रहा
शिविर में फतेहाबाद के भीमा बस्ती के मस्जिद वाली गली निवासी प्रवीन कुमारी ने रोते हुए कहा कि उसकी पोती उसके साथ रहती है। पोती दिव्यांग है। पहले पोती और उसे अलग-अलग राशन मिल रहा था लेकिन पीपीपी में ज्यादा आय दिखाकर पोती का राशन 6 माह से और मेरा 4 माह से बंद कर दिया गया है। रोजाना चक्कर काट रही हूं लेकिन कोई सुनवाई ही नहीं हो रही है।
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हरनाम सिंह कॉलोनी निवासी सौदागर ने बताया कि उसे बुढ़ापा पेेंशन मिल रही थी लेकिन अब पीपीपी में उसकी उम्र दो साल दिखाकर पेंशन बंद कर दी गई है। यहां तक उसकी आय भी 75 हजार तक दिखाई गई है। पेंशन शुरू करवाने के लिए चक्कर काट रहे है लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।
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राजीव कॉलोनी निवासी शीला रानी ने बताया कि पिछले डेढ़ साल से विधवा पेंशन के लिए वह विभाग के चक्कर काट रही है लेकिन शुरू नहीं हो पाई है। पीपीपी में एसएलसी मांगी जा रही है लेकिन उसके पास वह है ही नहीं।
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सूर्या एंकलेव निवासी अरविंद ने कहा कि उसके पास वर्ष 2014 मॉडल की कार है। पीपीपी में करीब 12 साल पुरानी कार दिखाकर पेंशन बंद कर दी गई है। पेंशन उनका अधिकार है उसे बंद करना गलत है। सरकार को इसे फिर से शुरू करना चाहिए।
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मीटिंग हाल की जगह कमरे में लगा कैंप
नगर परिषद कार्यालय में शिविर पहले मीटिंग कक्ष में लगाने की योजना थी लेकिन उसे प्रॉपर्टी आईडी कक्ष में लगाया गया। वजह यह थी कि मीटिंग हाल में पहुंचने के लिए व्यवस्था ही नहीं थी। कमरे में शिविर लगने के कारण बुजुर्गों को खड़े रहना पड़ा। वहां पर बैठने की व्यवस्था भी नहीं की गई। यहां तक कि बुजुर्गों के लिए कोई व्हील चेयर तक की व्यवस्था नहीं थी।
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पोती दिव्यांग, मैं कमा नहीं सकती, कई बार भूखे सोना पड़ रहा
शिविर में फतेहाबाद के भीमा बस्ती के मस्जिद वाली गली निवासी प्रवीन कुमारी ने रोते हुए कहा कि उसकी पोती उसके साथ रहती है। पोती दिव्यांग है। पहले पोती और उसे अलग-अलग राशन मिल रहा था लेकिन पीपीपी में ज्यादा आय दिखाकर पोती का राशन 6 माह से और मेरा 4 माह से बंद कर दिया गया है। रोजाना चक्कर काट रही हूं लेकिन कोई सुनवाई ही नहीं हो रही है।
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हरनाम सिंह कॉलोनी निवासी सौदागर ने बताया कि उसे बुढ़ापा पेेंशन मिल रही थी लेकिन अब पीपीपी में उसकी उम्र दो साल दिखाकर पेंशन बंद कर दी गई है। यहां तक उसकी आय भी 75 हजार तक दिखाई गई है। पेंशन शुरू करवाने के लिए चक्कर काट रहे है लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।
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राजीव कॉलोनी निवासी शीला रानी ने बताया कि पिछले डेढ़ साल से विधवा पेंशन के लिए वह विभाग के चक्कर काट रही है लेकिन शुरू नहीं हो पाई है। पीपीपी में एसएलसी मांगी जा रही है लेकिन उसके पास वह है ही नहीं।
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सूर्या एंकलेव निवासी अरविंद ने कहा कि उसके पास वर्ष 2014 मॉडल की कार है। पीपीपी में करीब 12 साल पुरानी कार दिखाकर पेंशन बंद कर दी गई है। पेंशन उनका अधिकार है उसे बंद करना गलत है। सरकार को इसे फिर से शुरू करना चाहिए।