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Fatehabad News: आंख की लैंस पर आई झिल्ली हटाने वाली लेजर मशीन खराब
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Thu, 02 Apr 2026 11:43 PM IST
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फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल में खराब पड़ी नेत्र जांच मशीनें संवाद
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फतेहाबाद। नागरिक अस्पताल में आंखों के उपचार में काम आने वाली लेजर मशीन पिछले एक साल से खराब पड़ी हुई है। इससे अस्पताल में इलाज करवाने वाले आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रह है। मजबूरी में मरीजों को निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ रहा है। इससे उन पर आर्थिक भार पड़ रहा है।
इस मशीन के खराब होने से मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद उत्पन्न होने वाली समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार ऑपरेशन के बाद लेंस पर झिल्ली जमने से धुंधलापन आ जाता है जिसे लेजर मशीन से ही ठीक किया जा सकता है, लेकिन अस्पताल में इसकी सुविधा उपलब्ध नहीं है।
रोजाना करीब 15 से 20 मरीज ऐसे होते हैं जिन्हें इस उपचार की आवश्यकता होती है। मशीन खराब होने के कारण मरीजों को निजी अस्पतालों में महंगा इलाज करवाना पड़ रहा है जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर असर पड़ रहा है। कई मरीजों के पास उपचार के लिए पैसे नहीं होते और वे समय पर इलाज नहीं करवा पाते, जिससे उनकी आंखों की समस्या और बढ़ रही है।
चिक्तिसकों के अनुसार अस्पताल प्रशासन को हर माह लेजर मशीन के लिए डिमांड भेजी जा रही है लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। इस स्थिति के कारण नागरिक अस्पताल में आंखों के इलाज में मुश्किलें उत्पन्न हो रही हैं। कई मरीज आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण समय पर उपचार नहीं करा पा रहे, जिससे उनकी आंखों की समस्या और बढ़ रही है।
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दो माह से आंखों के ऑपरेशन भी हैं बंद
ऑपरेशन थियेटर बंद होने के कारण नागरिक अस्पताल में आंखों के ऑपरेशन भी बंद हैं। हर सप्ताह अस्पताल में 15 से 20 मरीजों के आंखों के ऑपरेशन हो रहे थे फिलहाल मरीजों की प्रतीक्षा सूची लंबी हो रही है।
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लेजर मशीन की डिमांड हर माह उच्च अधिकारियों को भेजी जा रही है लेकिन अब तक नई मशीन उपलब्ध नहीं करवाई गई है। मशीन आने से मरीजों को राहत मिलेगी और उन्हें निजी अस्पतालों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- डॉ. राकेश कस्वां, नेत्र रोग विशेषज्ञ।
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इस मशीन के खराब होने से मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद उत्पन्न होने वाली समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार ऑपरेशन के बाद लेंस पर झिल्ली जमने से धुंधलापन आ जाता है जिसे लेजर मशीन से ही ठीक किया जा सकता है, लेकिन अस्पताल में इसकी सुविधा उपलब्ध नहीं है।
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रोजाना करीब 15 से 20 मरीज ऐसे होते हैं जिन्हें इस उपचार की आवश्यकता होती है। मशीन खराब होने के कारण मरीजों को निजी अस्पतालों में महंगा इलाज करवाना पड़ रहा है जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर असर पड़ रहा है। कई मरीजों के पास उपचार के लिए पैसे नहीं होते और वे समय पर इलाज नहीं करवा पाते, जिससे उनकी आंखों की समस्या और बढ़ रही है।
चिक्तिसकों के अनुसार अस्पताल प्रशासन को हर माह लेजर मशीन के लिए डिमांड भेजी जा रही है लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। इस स्थिति के कारण नागरिक अस्पताल में आंखों के इलाज में मुश्किलें उत्पन्न हो रही हैं। कई मरीज आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण समय पर उपचार नहीं करा पा रहे, जिससे उनकी आंखों की समस्या और बढ़ रही है।
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दो माह से आंखों के ऑपरेशन भी हैं बंद
ऑपरेशन थियेटर बंद होने के कारण नागरिक अस्पताल में आंखों के ऑपरेशन भी बंद हैं। हर सप्ताह अस्पताल में 15 से 20 मरीजों के आंखों के ऑपरेशन हो रहे थे फिलहाल मरीजों की प्रतीक्षा सूची लंबी हो रही है।
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लेजर मशीन की डिमांड हर माह उच्च अधिकारियों को भेजी जा रही है लेकिन अब तक नई मशीन उपलब्ध नहीं करवाई गई है। मशीन आने से मरीजों को राहत मिलेगी और उन्हें निजी अस्पतालों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- डॉ. राकेश कस्वां, नेत्र रोग विशेषज्ञ।